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बही खाता पूजन: दिवाली पर व्यापारियों के चोपड़ा पूजन की परंपरा, तैयारी, शुभ चिह्न और नए खाते की शुरुआत

गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के व्यापारी दिवाली पर नई बही की पूजा करके नए हिसाब की शुरुआत करते हैं। जानिए चोपड़ा पूजन की परंपरा, सामग्री, बही पर लिखे जाने वाले शुभ चिह्न और आज के समय में इसका स्वरूप।

दिवाली पर व्यापारियों के बही खाता पूजन की परंपरा का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • दिवाली व्यापारी समुदाय के लिए नए साल की शुरुआत जैसी होती है।
  • यह परिवार और समुदाय की परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।
  • कलम और दवात की पूजा भाई दूज पर चित्रगुप्त पूजा में भी होती है, जिसे कायस्थ समाज खास तौर पर मनाता है।
  • कई परिवार घर के हिसाब की डायरी या पासबुक को भी लक्ष्मी पूजा में रखते हैं।

दिवाली व्यापारी समुदाय के लिए नए साल की शुरुआत जैसी होती है। गुजरात में इसे चोपड़ा पूजन कहते हैं, तो राजस्थान और उत्तर भारत में बही खाता पूजन या बही पूजन। इस दिन दुकान और दफ्तर में लक्ष्मी-गणेश के साथ नई बही, कलम और तिजोरी की पूजा की जाती है। इस बार दिवाली की लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर 2026 को है। जानिए बही खाता पूजन की परंपरा।

परंपरा का अर्थ

पुराने समय में व्यापार का पूरा हिसाब लाल कपड़े में बंधी बही में रखा जाता था। दिवाली पर पुराने हिसाब को बंद करके नई बही शुरू की जाती थी। व्यापारी मानते हैं कि मां लक्ष्मी की कृपा से नया साल शुभ होगा। गुजराती पंचांग में दिवाली के अगले दिन से नया वर्ष शुरू होता है, इसलिए वहां यह परंपरा और गहरी है।

मुख्य बातें: दिवाली पर व्यापारियों के बही खाता पूजन की परंपरा का ग्राफिक
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पूजन की तैयारी

  • नई बही, जो अक्सर लाल कपड़े की जिल्द वाली होती है
  • नई कलम, स्याही या दवात
  • रोली, केसर, हल्दी, अक्षत और फूल
  • सिक्के, जिन्हें बही के पास रखा जाता है
  • लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या तस्वीर
  • तिजोरी या गल्ले की सफाई

बही पर क्या लिखा जाता है

  • पहले पन्ने पर रोली या केसर से स्वास्तिक
  • श्री गणेशाय नमः या श्री लक्ष्मी जी सदा सहाय
  • शुभ और लाभ, कई जगह स्वास्तिक के दोनों ओर
  • कई व्यापारी ऊपर की ओर श्री को कई बार लिखकर पिरामिड जैसा आकार बनाते हैं
  • तारीख और विक्रम संवत

यह परिवार और समुदाय की परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।

यह भी पढ़ें: चित्रगुप्त पूजा 2026: 11 नवंबर को कलम-दवात पूजा, चित्रगुप्त कौन हैं और पूजा की सरल विधि | दिवाली गणेश लक्ष्मी पूजा विधि 2026: घर पर सरल तरीके से पूजा कैसे करें, क्रम और जरूरी बातें

पूजन कैसे होता है

लक्ष्मी पूजा के समय ही नई बही, कलम और तिजोरी को पूजा स्थान पर रखा जाता है। उन पर रोली-अक्षत लगाकर फूल चढ़ाए जाते हैं और पूजा के बाद पहली प्रविष्टि की जाती है। कई परिवार पुरोहित से पूजन कराते हैं, जबकि कई घर के बड़े सदस्य ही यह करते हैं।

कलम-दवात का संबंध

कलम और दवात की पूजा भाई दूज पर चित्रगुप्त पूजा में भी होती है, जिसे कायस्थ समाज खास तौर पर मनाता है। इस बार भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा 11 नवंबर को है।

डिजिटल समय में

आज ज्यादातर कारोबार का हिसाब कंप्यूटर और अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में होता है। फिर भी कई व्यापारी परंपरा के तौर पर छोटी बही की पूजा करते हैं, या लैपटॉप और कैश काउंटर पर स्वास्तिक बनाकर पूजा करते हैं। कुछ लोग पूजा के बाद सॉफ्टवेयर में नए साल का पहला बिल बनाते हैं।

हिसाब के साथ समझदारी

  • नए साल की शुरुआत में पुराने बकाया और उधारी का मिलान कर लें
  • GST, आयकर और दूसरे कानूनी रिकॉर्ड का बैकअप रखें
  • नकद लेनदेन की सीमा के नियम याद रखें

क्या घर में भी बही पूजा होती है?

कई परिवार घर के हिसाब की डायरी या पासबुक को भी लक्ष्मी पूजा में रखते हैं। यह घरेलू परंपरा है, अनिवार्य नहीं।

पुरानी बही का क्या करें

पुरानी बहियां कानूनी जरूरत के हिसाब से तय समय तक संभालकर रखी जाती हैं, क्योंकि आयकर और GST से जुड़े रिकॉर्ड कई साल तक दिखाने पड़ सकते हैं। इन्हें नमी और दीमक से बचाकर सूखी जगह रखें।

स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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