दिवाली की शाम का सबसे अहम हिस्सा गणेश और लक्ष्मी की पूजा है। द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए इस बार दिवाली की लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर 2026, रविवार को है। पूजा का शुभ समय हर शहर में सूर्यास्त और स्थानीय गणना के अनुसार अलग होता है, इसलिए वह अपने शहर के पंचांग या पुरोहित से जानें। यहां घर पर की जाने वाली दिवाली गणेश लक्ष्मी पूजा विधि का एक सरल क्रम दिया जा रहा है। हर परिवार की अपनी परंपरा होती है, उसी को प्राथमिकता दें।
पूजा से पहले की तैयारी
- घर की सफाई पूरी करें और मुख्य दरवाजे पर रंगोली और वंदनवार लगाएं
- पूजा स्थान पर चौकी रखकर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं
- गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित करें, आमतौर पर लक्ष्मी जी को गणेश जी के दाहिनी ओर रखा जाता है, बाकी परिवार की परंपरा के अनुसार
- पूजा की सारी सामग्री एक थाली में पास रख लें
- परिवार के सभी सदस्य स्नान कर साफ कपड़े पहनें

पूजा का सरल क्रम
- आचमन और पवित्रीकरण: थोड़ा जल लेकर खुद पर और पूजा सामग्री पर छिड़कें
- संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूजा का संकल्प करें
- कलश स्थापना: जल से भरे कलश पर आम के पत्ते और नारियल रखें और उसकी पूजा करें
- गणेश पूजन: सबसे पहले गणेश जी को रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल और मिठाई अर्पित करें
- लक्ष्मी पूजन: फिर मां लक्ष्मी को रोली, अक्षत, फूल, कमल, वस्त्र या चुनरी और भोग अर्पित करें
- कई परिवार इसी समय कुबेर, सरस्वती और बही-खाते की पूजा भी करते हैं
- मंत्र या स्तुति: गणेश और लक्ष्मी के सरल मंत्र, श्रीसूक्त या परिवार की परंपरा के अनुसार पाठ करें
- आरती: पहले गणेश जी की और फिर लक्ष्मी जी की आरती करें
- क्षमा प्रार्थना: पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा मांगें
भोग और प्रसाद
खील, बताशे, मिठाई और फल का भोग लगाएं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बांटें।
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दीपदान
पूजा के बाद बड़े दीपक से दूसरे दीये जलाकर घर के हर कोने, मुख्य दरवाजे, आंगन, रसोई, पानी के स्थान और छत पर रखें। कई परिवार तुलसी के पास और घर के बाहर भी दीपक रखते हैं। पूजा स्थान का बड़ा दीपक रात भर जलाने की परंपरा है, लेकिन इसे सुरक्षित जगह पर रखें।
पूजा के बाद
- बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें
- घर के सदस्यों के साथ भोजन करें
- पटाखे जलाने हों, तो सुरक्षा का ध्यान रखें और स्थानीय नियमों का पालन करें
ध्यान रखने वाली बातें
- दीयों और मोमबत्तियों को पर्दों, कागज और कपड़ों से दूर रखें
- बच्चों को दीयों के पास अकेला न छोड़ें
- पूजा में ज्यादा धुआं न करें, खासकर अगर घर में सांस के मरीज हों
- पुरानी मूर्तियों का विसर्जन परिवार की परंपरा के अनुसार साफ जल स्रोत या मिट्टी में करें
अगर पुरोहित न मिलें तो?
घर के बड़े सदस्य ऊपर दिए सरल क्रम से पूजा कर सकते हैं। श्रद्धा और भाव सबसे अहम माने जाते हैं।
स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





