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सबरीमाला 2026: 16 नवंबर को खुलेंगे मंदिर के द्वार, मंडला पूजा 27 दिसंबर, मकरविलक्कु 14 जनवरी, जानिए यात्रा के नियम

केरल के सबरीमाला अयप्पा मंदिर का सबसे बड़ा तीर्थ सीजन नवंबर के मध्य से शुरू होता है। जानिए इस साल की तारीखें और जरूरी जानकारी।

पहाड़ी पर स्थित मंदिर और दीपों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • केरल के पथानमथिट्टा जिले में पश्चिमी घाट की पहाड़ियों पर स्थित सबरीमाला श्री धर्मशास्ता मंदिर भगवान अयप्पा का प्रसिद्ध तीर्थ है।
  • माला पहनने के बाद श्रद्धालु को अयप्पा स्वामी का रूप माना जाता है।
  • लोक मान्यताओं के अनुसार भगवान अयप्पा को हरिहर पुत्र, यानी भगवान शिव और विष्णु के मोहिनी रूप का पुत्र माना जाता है।
  • सबरीमाला में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश को लेकर पारंपरिक प्रतिबंध और उस पर सुप्रीम कोर्ट में चली कानूनी बहस लंबे समय से चर्चा में रही है।

केरल के पथानमथिट्टा जिले में पश्चिमी घाट की पहाड़ियों पर स्थित सबरीमाला श्री धर्मशास्ता मंदिर भगवान अयप्पा का प्रसिद्ध तीर्थ है। यह मंदिर साल भर नहीं खुलता। यह मलयालम कैलेंडर के हर महीने के शुरुआती कुछ दिनों, कुछ त्योहारों और सबसे बड़े तीर्थ सीजन मंडला-मकरविलक्कु के दौरान खुलता है। हर साल लाखों श्रद्धालु देश के अलग-अलग हिस्सों, खासकर दक्षिण भारत से, इस यात्रा पर आते हैं।

2026-27 सीजन की तारीखें

मंदिर कैलेंडरों में प्रकाशित जानकारी के अनुसार:

  • मंदिर खुलेगा: सोमवार, 16 नवंबर 2026, शाम 5 बजे
  • मंडला सीजन का पहला दिन, यानी वृश्चिकम महीने की पहली तारीख: मंगलवार, 17 नवंबर 2026
  • मंडला पूजा: रविवार, 27 दिसंबर 2026, इस रात मंदिर बंद होगा
  • मकरविलक्कु उत्सव के लिए मंदिर फिर खुलेगा: बुधवार, 30 दिसंबर 2026, शाम 5 बजे
  • मकरविलक्कु: 14 जनवरी 2027
  • सीजन समाप्त: 20 जनवरी 2027

अलग-अलग पंचांगों में मकरविलक्कु की तारीख में एक दिन का अंतर दिख सकता है। अंतिम तारीख त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड की घोषणा से तय होती है, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

मुख्य बातें: पहाड़ी पर स्थित मंदिर और दीपों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

मंडला काल और 41 दिन का व्रत

मंडला काल 41 दिन का होता है, जो वृश्चिकम महीने की पहली तारीख से शुरू होकर मंडला पूजा पर खत्म होता है। परंपरा के अनुसार सबरीमाला जाने वाले श्रद्धालु 41 दिन का व्रत रखते हैं, जिसे व्रतम कहा जाता है। इस दौरान वे:

  • तुलसी या रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं
  • काले, नीले या भगवा कपड़े पहनते हैं
  • सादा, शाकाहारी भोजन करते हैं
  • ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करते हैं
  • रोज पूजा और भजन करते हैं
  • एक-दूसरे को स्वामी कहकर संबोधित करते हैं

माला पहनने के बाद श्रद्धालु को अयप्पा स्वामी का रूप माना जाता है। आम तौर पर समूह का एक अनुभवी व्यक्ति, जिसे गुरु स्वामी कहा जाता है, नए श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करता है।

इरुमुडी और 18 सीढ़ियां

यात्रा पर श्रद्धालु सिर पर इरुमुडी केट्टु लेकर जाते हैं। यह दो हिस्सों वाली पोटली होती है। एक हिस्से में भगवान के लिए चढ़ावा, जैसे घी से भरा नारियल, और दूसरे हिस्से में यात्रा का सामान होता है। मंदिर के सामने की 18 पवित्र सीढ़ियां, जिन्हें पथिनेट्टाम पडी कहा जाता है, केवल इरुमुडी लेकर आए श्रद्धालु ही चढ़ते हैं। घी से भरे नारियल का घी भगवान के अभिषेक में अर्पित किया जाता है।

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मकरविलक्कु क्या है

मकर संक्रांति के दिन मकरविलक्कु मनाया जाता है। इस शाम पोन्नम्बलमेडु पहाड़ी पर दिखाई देने वाली ज्योति के दर्शन के लिए भारी भीड़ जुटती है। इसी दिन पंडालम राजपरिवार से लाए गए आभूषण यानी तिरुवाभरणम भगवान को पहनाए जाते हैं। यह सीजन का सबसे भीड़ वाला दिन होता है।

सबरीमाला से जुड़ी कथा

लोक मान्यताओं के अनुसार भगवान अयप्पा को हरिहर पुत्र, यानी भगवान शिव और विष्णु के मोहिनी रूप का पुत्र माना जाता है। कथा के अनुसार पंडालम के राजा ने उन्हें बालक के रूप में जंगल में पाया और पाला। बड़े होकर उन्होंने महिषी नाम की राक्षसी का वध किया और फिर सबरीमाला पर तपस्या के लिए विराजमान हुए। इसी कारण पंडालम राजपरिवार का मंदिर से खास संबंध माना जाता है और मकरविलक्कु पर भगवान के आभूषण वहीं से लाए जाते हैं। एरुमेली में स्थित वावर स्वामी का स्थान भी इस यात्रा का हिस्सा है, जो अयप्पा के साथी माने जाते हैं। यह परंपरा सबरीमाला यात्रा के सद्भाव वाले स्वरूप को दिखाती है।

वर्चुअल क्यू बुकिंग

भीड़ को संभालने के लिए त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड ऑनलाइन वर्चुअल क्यू व्यवस्था चलाता है। श्रद्धालुओं को दर्शन का समय पहले से बुक करना होता है। बुकिंग की सीमा, जरूरी पहचान पत्र और नियम हर सीजन में घोषित किए जाते हैं। बिना बुकिंग के जाने पर देरी हो सकती है।

यात्रा का रास्ता

सबसे लोकप्रिय रास्ता पंबा से है। पंबा तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है और वहां से लगभग पांच किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करके सन्निधानम यानी मुख्य मंदिर तक पहुंचते हैं। पारंपरिक लंबा रास्ता एरुमेली से जंगलों के बीच होकर जाता है। नजदीकी बड़े रेलवे स्टेशन चेंगन्नूर और कोट्टायम हैं, और नजदीकी हवाई अड्डा कोच्चि और तिरुवनंतपुरम हैं।

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सावधानियां

  • वर्चुअल क्यू बुकिंग और पहचान पत्र साथ रखें
  • पैदल चढ़ाई कठिन है, बुजुर्ग और बीमार लोग डॉक्टर से सलाह लेकर ही जाएं
  • प्लास्टिक का सामान ले जाने से बचें, बोर्ड ने कई प्लास्टिक वस्तुओं पर रोक लगाई है
  • भीड़ में बच्चों का खास ध्यान रखें
  • प्रशासन और पुलिस के निर्देश मानें
  • पंबा नदी में स्नान करते समय सावधानी रखें

परंपरा से जुड़ी बहस

सबरीमाला में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश को लेकर पारंपरिक प्रतिबंध और उस पर सुप्रीम कोर्ट में चली कानूनी बहस लंबे समय से चर्चा में रही है। यह मामला संवैधानिक पीठ के सामने विचाराधीन रहा है। श्रद्धालु मंदिर प्रशासन के मौजूदा नियमों की जानकारी आधिकारिक स्रोत से लें।

सबरीमाला मंदिर कब खुलता है

मंडला-मकरविलक्कु सीजन के अलावा हर मलयालम महीने के पहले पांच-छह दिन और कुछ त्योहारों पर।

क्या बिना व्रत के दर्शन हो सकते हैं

18 सीढ़ियों पर चढ़ने के लिए इरुमुडी जरूरी है। व्रत से जुड़ी परंपरा के बारे में अपने गुरु स्वामी या मंदिर प्रशासन से जानकारी लें।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता। तारीखों की अंतिम पुष्टि त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड से करें।

स्रोत: Sabarimala Online (Travancore Devaswom Board), Sabarimala Festival Calendar 2026-27

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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