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चित्रगुप्त पूजा 2026: 11 नवंबर को कलम-दवात पूजा, चित्रगुप्त कौन हैं और पूजा की सरल विधि

यम द्वितीया को कायस्थ समाज भगवान चित्रगुप्त की पूजा करता है, जिन्हें कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाला देवता माना जाता है। जानिए 2026 की तारीख, कलम-दवात पूजा, सामग्री और सरल विधि।

चित्रगुप्त पूजा 2026 कलम-दवात पूजा का ग्राफिक
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सारांश

  • भाई दूज के दिन ही कायस्थ समाज भगवान चित्रगुप्त की पूजा करता है।
  • यम द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। चित्रगुप्त यमराज के सहायक हैं, इसलिए इसी दिन उनकी पूजा होती है।
  • पूजा के दौरान चित्रगुप्त कथा सुनी या पढ़ी जाती है। इसमें राजा सौदास की कथा प्रचलित है, जिसमें बताया गया है कि चित्रगुप्त की पूजा से उन्हें अपने कर्मों के अच्छे फल मिले।
  • बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में कई जगह कायस्थ सभाएं सामूहिक चित्रगुप्त पूजा का आयोजन करती हैं।

भाई दूज के दिन ही कायस्थ समाज भगवान चित्रगुप्त की पूजा करता है। इस दिन कलम, दवात और बही-खाते की पूजा का खास महत्व है, इसलिए इसे कलम-दवात पूजा भी कहते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार इस बार यम द्वितीया और चित्रगुप्त पूजा 11 नवंबर 2026, बुधवार को है। जानिए चित्रगुप्त पूजा 2026 के बारे में।

भगवान चित्रगुप्त कौन हैं

पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान चित्रगुप्त यमराज के सहायक हैं, जो हर जीव के अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। कथा है कि ब्रह्मा जी के ध्यान से उनकी काया से चित्रगुप्त प्रकट हुए, इसलिए उनके वंशज कायस्थ कहलाए। उन्हें हाथ में कलम और दवात लिए दिखाया जाता है। इसी कारण लिखने-पढ़ने, हिसाब-किताब और ज्ञान से जुड़ी चीजों की पूजा इस दिन की जाती है।

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यम द्वितीया से संबंध

यम द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। चित्रगुप्त यमराज के सहायक हैं, इसलिए इसी दिन उनकी पूजा होती है। कई क्षेत्रों में चैत्र महीने में भी चित्रगुप्त पूजा मनाई जाती है।

पूजा की सामग्री

  • भगवान चित्रगुप्त का चित्र या मूर्ति
  • नई कलम और दवात या स्याही
  • सादा कागज या नई बही
  • रोली, चंदन, हल्दी और अक्षत
  • फूल, माला और तुलसी पत्र
  • धूप, दीपक और कपूर
  • मिठाई, फल और पंचामृत
  • गुड़ और अदरक, कई घरों में प्रसाद के रूप में

यह भी पढ़ें: भाई दूज 2026 कब है: 11 नवंबर को यम द्वितीया, यमराज-यमुना की कथा और तिलक की परंपरा | गोवर्धन पूजा 2026 कब है: 9 या 10 नवंबर, तारीख पर स्पष्टता, कथा और क्यों मनाते हैं

सरल विधि

  • पूजा स्थान साफ कर चौकी पर चित्र स्थापित करें
  • दीपक जलाकर गणेश जी का स्मरण करें
  • भगवान चित्रगुप्त को रोली, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें
  • कलम, दवात और बही पर तिलक लगाकर उनकी पूजा करें
  • नए कागज पर अपना नाम, पता और परिवार की आय-व्यय का संक्षिप्त ब्योरा लिखने की परंपरा कई परिवारों में है
  • कई लोग कागज पर अपने इष्ट देव का नाम या कोई मंत्र भी लिखते हैं
  • आरती करके प्रसाद बांटें

पूजा के दिन कई परिवार कलम का इस्तेमाल पूजा के बाद ही करते हैं।

कथा सुनने की परंपरा

पूजा के दौरान चित्रगुप्त कथा सुनी या पढ़ी जाती है। इसमें राजा सौदास की कथा प्रचलित है, जिसमें बताया गया है कि चित्रगुप्त की पूजा से उन्हें अपने कर्मों के अच्छे फल मिले।

आधुनिक संदर्भ

आज के समय में कई परिवार कलम-दवात के साथ लैपटॉप, किताबें और हिसाब के रजिस्टर भी पूजा में रखते हैं। विद्यार्थी अपनी किताबें और कॉपी रखते हैं। संदेश यही है कि ज्ञान, ईमानदारी और सही हिसाब जीवन में जरूरी हैं।

सामूहिक आयोजन

बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में कई जगह कायस्थ सभाएं सामूहिक चित्रगुप्त पूजा का आयोजन करती हैं। इनमें भजन, कथा और भोज होता है।

क्या केवल कायस्थ समाज यह पूजा करता है?

मुख्य रूप से यह कायस्थ समाज की परंपरा है, लेकिन कई व्यापारी, लेखाकार और विद्यार्थी भी श्रद्धा से इस दिन कलम-दवात की पूजा करते हैं।

पूजा के बाद क्या करें?

पूजा में रखी कलम से कई लोग साल भर का पहला हिसाब या कोई शुभ शब्द लिखते हैं। प्रसाद परिवार और पड़ोस में बांटा जाता है और बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।

स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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