दिवाली के पांच दिन के उत्सव का आखिरी दिन भाई दूज है। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है, इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए इस बार भाई दूज 11 नवंबर 2026, बुधवार को है। इस दिन बहनें भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं और भाई बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा का वचन देता है। जानिए भाई दूज 2026 से जुड़ी कथा और परंपराएं।
तारीख पर स्पष्टता
इस बार दिवाली की लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर को है। गोवर्धन पूजा सरकारी अवकाश सूची में 9 नवंबर और द्रिक पंचांग में 10 नवंबर को है। इसके बाद 11 नवंबर को भाई दूज है। तिलक का शुभ समय अपने शहर के पंचांग या पुरोहित से देखें।

यमराज और यमुना की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य देव की संतान यमराज और यमुना भाई-बहन थे। यमुना अपने भाई से बहुत स्नेह करती थीं और बार-बार उन्हें अपने घर भोजन के लिए बुलाती थीं। यमराज अपने काम में व्यस्त रहने के कारण नहीं जा पाते थे। आखिर कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अचानक बहन के घर पहुंचे। यमुना ने खुश होकर उनका स्वागत किया, तिलक लगाया और प्रेम से भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वर मांगने को कहा। यमुना ने वर मांगा कि हर साल इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक लगवाए और भोजन करे, उसे यम का भय न हो। यमराज ने यह वर दे दिया। तभी से भाई दूज की परंपरा मानी जाती है।
श्रीकृष्ण और सुभद्रा की कथा
एक और मान्यता के अनुसार नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के पास पहुंचे। सुभद्रा ने दीप जलाकर, तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया। इसे भी भाई दूज से जोड़ा जाता है।
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कैसे मनाते हैं
- भाई सुबह स्नान करके बहन के घर जाते हैं
- बहन आटे या चावल से चौक बनाकर भाई को बैठाती है
- रोली, अक्षत से तिलक लगाया जाता है और कलावा बांधा जाता है
- भाई की आरती उतारी जाती है और मिठाई खिलाई जाती है
- बहन भाई के लिए भोजन बनाती है
- भाई बहन को उपहार या शगुन देता है
कई जगह इस दिन यमुना में स्नान का भी महत्व माना जाता है, खासकर मथुरा में।
अलग-अलग नाम
- महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में भाऊबीज
- बंगाल में भाई फोंटा
- नेपाल और कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में भाई टीका
- उत्तर भारत में भैया दूज या भाई दूज
परंपराओं में थोड़ा अंतर है, लेकिन भाव भाई-बहन के प्रेम का है।
इसी दिन चित्रगुप्त पूजा
कायस्थ समाज में इसी दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा होती है, जिसमें कलम और दवात की पूजा का खास महत्व है।
जो भाई दूर हैं
जो भाई-बहन दूर रहते हैं, वे वीडियो कॉल पर तिलक की रस्म निभा सकते हैं। कई बहनें इस दिन भाई के नाम का तिलक भगवान को लगाकर कामना करती हैं।
बहन न हो तो क्या करें?
कई परिवारों में चचेरी, ममेरी बहन या मुंहबोली बहन से तिलक लगवाया जाता है। परिवार की परंपरा के अनुसार ही निर्णय लें।
स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





