प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक विशेष पोस्ट साझा करते हुए विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट के परिणामों की सराहना की है। इस रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया है कि भारत ने दुनिया में सबसे तेज़ गरीबी गिरावट दर्ज करने वाले देशों में अपना स्थान बनाया है। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया और कहा कि गरीबी में यह भारी कमी देश की वर्तमान पीढ़ी के लिए अवसरों की एक नई और बड़ी लहर का प्रतिनिधित्व करती है। इस संदेश को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने बॉलीवुड फिल्म दसवीं के ऊर्जावान गीत थान लिया का उपयोग किया है, जो दृढ़ संकल्प और सफलता की कहानी कहता है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े और निष्कर्ष
विश्व बैंक की इस रिपोर्ट का शीर्षक इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ: अक्टूबर 2026 है, जिसमें भारत के आर्थिक परिदृश्य का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2011 और 2023 के बीच भारत में लगभग 49.6 करोड़ लोग गरीबी की रेखा से बाहर निकलने में सफल रहे हैं। इस बदलाव के कारण भारत में अत्यधिक गरीबी की दर में 90 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, पहले जहां हर चार में से एक से अधिक भारतीय अत्यधिक गरीबी की स्थिति में था, वहीं अब यह अनुपात घटकर लगभग 38 भारतीयों में से एक रह गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इन आंकड़ों को साझा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह परिवर्तन केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन में आए वास्तविक सुधार को दर्शाता है।
आर्थिक असमानता और गिनी इंडेक्स में सुधार
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि देश में केवल गरीबी ही कम नहीं हुई है, बल्कि आर्थिक असमानता में भी महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। उन्होंने विश्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत का गिनी इंडेक्स, जो आर्थिक असमानता को मापने का प्राथमिक पैमाना है, उसमें 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। वर्तमान में भारत का गिनी इंडेक्स गिरकर 23.0 के स्तर पर पहुंच गया है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि देश का आर्थिक विकास अधिक समावेशी हो रहा है और धन का वितरण पहले की तुलना में अधिक संतुलित हुआ है। प्रधानमंत्री ने इसे अपनी सरकार की नीतियों की सफलता के रूप में प्रस्तुत किया है, जो समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का प्रयास करती हैं।
रोजगार सृजन और कार्यबल में वृद्धि
रिपोर्ट में रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक आंकड़े पेश किए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने जानकारी दी कि पिछले केवल छह वर्षों की अवधि में भारत में रोजगार के अवसरों में 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि भारत की कार्यशील आयु वाली जनसंख्या में हुई वृद्धि की तुलना में लगभग दोगुनी है। इसका अर्थ यह है कि देश में न केवल नए लोगों को काम मिल रहा है, बल्कि पहले से मौजूद कार्यबल के लिए भी अधिक अवसर पैदा हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि गरीबी उन्मूलन उनकी सरकार के लिए केवल एक नारा नहीं रहा है, बल्कि यह एक निरंतर और दृढ़ प्रतिबद्धता रही है। उन्होंने विपक्षी दल कांग्रेस के दशकों पुराने गरीबी हटाओ अभियान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने इसे वास्तविकता में बदलने का काम किया है।
रिपोर्ट की कार्यप्रणाली और सांस्कृतिक संदर्भ
विश्व बैंक की इस रिपोर्ट में गरीबी के आकलन के लिए विशिष्ट मानकों का उपयोग किया गया है। इसमें निम्न-मध्यम आय वाली गरीबी सीमा के लिए 4.20 डॉलर प्रति दिन और अत्यधिक गरीबी रेखा के लिए 3 डॉलर प्रति दिन का मानक रखा गया है, जिसे 2021 की क्रय शक्ति समता यानी पीपीपी के आधार पर मापा गया है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत ने पिछले दशक में मौद्रिक और गैर-मौद्रिक दोनों ही क्षेत्रों में गरीबी कम करने की दिशा में बड़ी छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री की पोस्ट में उपयोग किया गया गीत थान लिया, जिसे सुखविंदर सिंह और तनिष्का संघवी ने गाया है, आत्म-विश्वास और कड़ी मेहनत का संदेश देता है। यह गीत 2022 की फिल्म दसवीं का है, जिसमें अभिषेक बच्चन और यामी गौतम ने अभिनय किया है। फिल्म की कहानी एक जेल में बंद राजनेता के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी हाई स्कूल की परीक्षा पास करने का निर्णय लेता है। यह गीत और फिल्म का संदर्भ इस बात को पुष्ट करता है कि समर्पण और कठिन परिश्रम से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है, जो भारत की गरीबी के खिलाफ लड़ाई के संदेश से मेल खाता है।
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स्रोत: The Hindu





