हर साल लाखों लोग किसी न किसी वजह से तय तारीख तक इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भर पाते। कभी दस्तावेज समय पर नहीं मिलते, कभी पोर्टल पर दिक्कत आती है और कभी बात ध्यान से उतर जाती है। ऐसे लोगों के लिए आयकर कानून में बिलेटेड यानी देर से रिटर्न भरने की व्यवस्था है। आयकर अधिनियम की धारा 139(4) के तहत बिलेटेड रिटर्न संबंधित आकलन वर्ष की 31 दिसंबर तक भरा जा सकता है, बशर्ते उससे पहले विभाग की ओर से आकलन पूरा न हो गया हो।
यानी वित्त वर्ष 2025-26 की कमाई का रिटर्न, जिसका आकलन वर्ष 2026-27 है, अभी भी 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न के रूप में भरा जा सकता है। लेकिन देर से भरने की कुछ कीमत चुकानी पड़ती है।
लेट फीस कितनी लगती है
धारा 234F के तहत तय तारीख के बाद रिटर्न भरने पर लेट फीस देनी होती है:
- कुल आय ₹5 लाख से ज्यादा हो, तो ₹5,000
- कुल आय ₹5 लाख तक हो, तो ₹1,000
- अगर कुल आय मूल छूट सीमा से कम है और रिटर्न भरना अनिवार्य नहीं था, तो आम तौर पर यह फीस नहीं लगती
यह फीस रिटर्न भरने से पहले चालान के जरिए जमा करनी होती है और ITR फॉर्म में इसका ब्योरा देना होता है।

ब्याज भी देना होगा
अगर आप पर टैक्स बकाया है, तो धारा 234A के तहत तय तारीख के अगले दिन से रिटर्न भरने की तारीख तक बकाया टैक्स पर हर महीने या उसके हिस्से के लिए 1 प्रतिशत साधारण ब्याज लगता है। एडवांस टैक्स कम जमा होने पर धारा 234B और 234C का ब्याज अलग से लग सकता है। इसलिए जितनी देर होगी, ब्याज उतना बढ़ेगा।
देर से भरने के और नुकसान
- घाटा आगे नहीं ले जा सकते: कारोबार, कैपिटल गेन जैसे ज्यादातर घाटे अगले सालों में आगे ले जाने के लिए रिटर्न समय पर भरना जरूरी है, हालांकि घर की संपत्ति से हुआ घाटा इसका अपवाद है
- रिफंड में देरी: रिफंड बनता है, तो वह भी देर से आएगा और कुछ मामलों में उस पर मिलने वाला ब्याज कम हो सकता है
- टैक्स व्यवस्था का विकल्प: कारोबारी आय वाले लोगों के लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने का विकल्प आम तौर पर समय पर रिटर्न भरने से जुड़ा होता है, इसलिए अपने मामले में किसी जानकार से पूछ लें
- नोटिस का जोखिम: रिटर्न न भरने वालों को विभाग की ओर से नोटिस मिल सकता है, खासकर जब उनके नाम पर बड़े लेनदेन दर्ज हों
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बिलेटेड रिटर्न कैसे भरें
- incometax.gov.in पर अपने PAN से लॉगिन करें
- e-File में Income Tax Returns और फिर File Income Tax Return पर जाएं
- सही आकलन वर्ष चुनें और फाइलिंग सेक्शन में 139(4) यानी बिलेटेड रिटर्न चुनें
- अपनी आय के हिसाब से सही ITR फॉर्म चुनें
- पहले से भरी जानकारी को AIS और फॉर्म 26AS से मिलाएं
- लेट फीस और बकाया टैक्स का चालान जमा करें और उसका ब्योरा भरें
- रिटर्न सबमिट करें और 30 दिन के भीतर ई-वेरिफाई करना न भूलें
फाइल करने से पहले ये कागज तैयार रखें
- फॉर्म 16, अगर आप नौकरीपेशा हैं
- बैंक खातों के ब्याज प्रमाण पत्र
- निवेश और बीमा की रसीदें, अगर पुरानी टैक्स व्यवस्था चुन रहे हैं
- शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने का कैपिटल गेन स्टेटमेंट
- किराये से आय हो, तो उसका हिसाब और होम लोन ब्याज प्रमाण पत्र
इन कागजों को AIS से मिलाने पर गलती की संभावना काफी कम हो जाती है।
गलती हो जाए तो
बिलेटेड रिटर्न में कोई गलती रह जाए, तो उसे भी संशोधित यानी रिवाइज्ड रिटर्न के जरिए उसी 31 दिसंबर की समय सीमा तक सुधारा जा सकता है। इसलिए जल्दबाजी में आखिरी दिन का इंतजार न करें, ताकि सुधार का मौका बचा रहे।
31 दिसंबर भी निकल जाए तो
इस तारीख के बाद बिलेटेड या रिवाइज्ड रिटर्न नहीं भरा जा सकता। तब अपडेटेड रिटर्न यानी ITR-U का रास्ता बचता है, जो धारा 139(8A) के तहत आता है। इसमें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है और इसके जरिए आम तौर पर रिफंड का दावा नहीं किया जा सकता। इसकी शर्तें अलग हैं, इसलिए यह आखिरी विकल्प ही समझें।
किन्हें रिटर्न जरूर भरना चाहिए
- जिनकी कुल आय मूल छूट सीमा से ज्यादा है
- जिनका TDS कटा है और वे रिफंड चाहते हैं
- जिनके पास विदेश में संपत्ति या विदेशी खाता है
- जिन्होंने बैंक खाते में तय सीमा से ज्यादा पैसा जमा किया, विदेश यात्रा या बिजली बिल पर तय सीमा से ज्यादा खर्च किया
क्या बिलेटेड रिटर्न पर रिफंड मिलता है
हां, अगर ज्यादा टैक्स कटा है, तो बिलेटेड रिटर्न भरने और प्रोसेस होने के बाद रिफंड मिल सकता है।
बिलेटेड और रिवाइज्ड रिटर्न में क्या फर्क है
बिलेटेड रिटर्न उनके लिए है जिन्होंने तय तारीख तक रिटर्न भरा ही नहीं। रिवाइज्ड रिटर्न पहले भरे गए रिटर्न में गलती सुधारने के लिए होता है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। अपने मामले में टैक्स सलाहकार या चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह जरूर लें।
स्रोत: आयकर विभाग: ई-फाइलिंग पोर्टल, आयकर विभाग: रिटर्न से जुड़े सवाल-जवाब





