दिवाली के पांच दिन के उत्सव का पहला बड़ा दिन धनतेरस है। इसे धनत्रयोदशी भी कहते हैं, क्योंकि यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार 2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को है और दिवाली की लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है। शाम को यमराज के नाम का दीप जलाने की परंपरा भी इसी दिन निभाई जाती है।
यहां जानिए धनतेरस 2026 की तिथि, प्रदोष काल, पूजा का शुभ मुहूर्त और प्रमुख शहरों का समय।
धनतेरस 2026 की तिथि और समय
द्रिक पंचांग में नई दिल्ली के लिए दिए गए समय के अनुसार:
- त्रयोदशी तिथि शुरू: 6 नवंबर 2026, सुबह 10:30 बजे
- त्रयोदशी तिथि खत्म: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:47 बजे
- प्रदोष काल: 6 नवंबर, शाम 5:33 से रात 8:09 बजे तक
- वृषभ काल: शाम 6:02 से 7:57 बजे तक
- धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 से 7:57 बजे तक, यानी करीब 1 घंटा 56 मिनट
धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार प्रदोष काल में स्थिर लग्न, यानी वृषभ लग्न में की गई पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है, क्योंकि स्थिर का अर्थ है ठहरा हुआ। इसी कारण दिल्ली में शाम 6:02 से 7:57 बजे का समय मुख्य मुहूर्त बताया गया है।

प्रमुख शहरों में पूजा मुहूर्त
सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए मुहूर्त भी बदलता है। द्रिक पंचांग के अनुसार:
- नई दिल्ली: शाम 6:02 से 7:57
- नोएडा: शाम 6:01 से 7:57
- गुरुग्राम: शाम 6:03 से 7:59
- चंडीगढ़: शाम 6:00 से 7:54
- जयपुर: शाम 6:11 से 8:07
- कोलकाता: शाम 5:28 से 7:26
- मुंबई: शाम 6:35 से 8:35
- पुणे: शाम 6:32 से 8:31
- अहमदाबाद: शाम 6:30 से 8:28
- बेंगलुरु: शाम 6:25 से 8:20
- हैदराबाद: शाम 6:15 से 8:13
- चेन्नई: शाम 6:14 से 8:10
लखनऊ, पटना, देहरादून या दूसरे शहरों के लिए स्थानीय पंचांग देखें। पूर्वी शहरों में सूर्यास्त जल्दी होता है, इसलिए वहां मुहूर्त भी पहले शुरू होगा।
धनतेरस क्यों मनाते हैं
पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है, इसलिए इस दिन को अच्छे स्वास्थ्य की कामना से भी जोड़ा जाता है। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाता रहा है। इसी दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा का भी विधान है। धनतेरस पर नई चीजें खरीदने की परंपरा इसी विश्वास से जुड़ी है कि इस दिन घर में लाई गई वस्तु समृद्धि लाती है।
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पूजा की सरल विधि
- शाम को घर और पूजा स्थल की सफाई करें
- उत्तर दिशा में चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं
- भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की तस्वीर या मूर्ति रखें
- घी का दीपक जलाएं और जल, अक्षत, रोली, फूल अर्पित करें
- नैवेद्य में मिठाई और फल चढ़ाएं
- धन्वंतरि से परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और लक्ष्मी-कुबेर से समृद्धि की प्रार्थना करें
- अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें
पूजा विधि क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती है। जिनके घर में कोई तय रीति है, वे उसी का पालन करें।
यम दीपदान
धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीप जलाने की परंपरा है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। द्रिक पंचांग में भी 6 नवंबर को यम दीपम का उल्लेख है। परंपरा के अनुसार आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक तेल से भरकर घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार पर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि वह किसी पर्दे, कागज या सूखी पत्तियों के पास न हो।
खरीदारी से पहले ध्यान रखें
- सोना या चांदी खरीदते समय BIS हॉलमार्क और HUID जरूर देखें
- बिल लें, जिसमें वजन, शुद्धता और मेकिंग चार्ज अलग से लिखा हो
- बर्तन खरीदते समय धातु की गुणवत्ता और ब्रांड की वारंटी देखें
- ऑनलाइन सेल में कैशबैक के लालच में बजट से बाहर खर्च न करें
- खरीदारी मुहूर्त का पालन चाहें तो करें, लेकिन धोखाधड़ी वाले ऑफर और लिंक से सावधान रहें
घर में दीप कहां-कहां जलाएं
धनतेरस से दीपावली तक घर के मुख्य द्वार, तुलसी के पास, रसोई और आंगन में दीप जलाने की परंपरा है। मिट्टी के दीयों को एक दिन पहले पानी में भिगो दें, ताकि वे तेल कम सोखें। बच्चों को दीयों और मोमबत्तियों से दूर रखें और रात को सोने से पहले जलते दीयों की जांच कर लें।
धनतेरस 2026 किस दिन है
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है। दिवाली की लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर, रविवार को होगी।
क्या 7 नवंबर को भी खरीदारी कर सकते हैं
त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर सुबह 10:47 बजे तक है। फिर भी धनतेरस की पूजा 6 नवंबर की शाम प्रदोष काल में ही बताई गई है। खरीदारी के समय को लेकर अपने परिवार के पुरोहित की सलाह लें।





