कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घोषणा की है कि राज्य सरकार कन्नड़ ध्वज को आधिकारिक मान्यता देने की दिशा में सक्रिय रूप से विचार कर रही है। सरकार का लक्ष्य इस मुद्दे को बेलगावी में 30 नवंबर से शुरू होने वाले आगामी शीतकालीन विधायी सत्र के दौरान चर्चा के लिए लाना है। इसके अतिरिक्त, सरकार राज्य समर्थित संस्थानों में कन्नड़ ध्वज फहराना अनिवार्य करने और निजी संस्थानों को भी इसे फहराने की अनुमति देने के लिए इसी महीने एक आदेश जारी करने की योजना बना रही है।

आधिकारिक मान्यता और विधायी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार, 1 नवंबर, 2026 को 71वें राज्योत्सव समारोह के अवसर पर बोलते हुए राज्य की इस महत्वपूर्ण योजना का खुलासा किया। उन्होंने कांतीरवा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम और अपने आवास के पास पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार कन्नड़ ध्वज को आधिकारिक दर्जा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस विषय पर बेलगावी में होने वाले आगामी शीतकालीन सत्र में विस्तार से चर्चा की जाएगी। सरकार एक ऐसा कानून लाने की दिशा में काम कर रही है जो राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ राज्य के ध्वज को फहराने की अनुमति और कानूनी सुरक्षा प्रदान करे। शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि यह कदम भारत के संघीय ढांचे के भीतर कर्नाटक की पहचान को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सरकार जनता की भावनाओं का सम्मान करती है और कन्नड़ ध्वज को कन्नड़ भाषियों की भावनाओं का प्रतीक मानती है।
संस्थानों के लिए नए निर्देश और आदेश
राज्य सरकार ने न केवल ध्वज को मान्यता देने की योजना बनाई है, बल्कि इसके उपयोग को लेकर विशिष्ट दिशा-निर्देश भी तैयार किए हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार इसी महीने एक आधिकारिक आदेश जारी करेगी जो निजी संस्थानों को कन्नड़ ध्वज फहराने में सक्षम बनाएगा। इसके साथ ही, सरकार उन सभी संस्थानों में कन्नड़ ध्वज फहराना अनिवार्य करने पर विचार कर रही है जिन्हें राज्य सरकार द्वारा सहायता या समर्थन प्राप्त है। मुख्यमंत्री ने स्वयं राष्ट्रीय ध्वज के साथ कन्नड़ ध्वज फहराया और कहा कि सभी सरकारी कार्यालयों में भी ध्वज फहराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे राज्य की संस्कृति और विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। अगले एक वर्ष के लिए सरकार ने कन्नड़ भाषा और संस्कृति की श्रेष्ठता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन की तैयारी भी पूरी कर ली है।
कानूनी चुनौतियां और ऐतिहासिक संदर्भ
कन्नड़ ध्वज को आधिकारिक मान्यता देने का प्रयास नया नहीं है। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 2018 में तत्कालीन सिद्धारमैया सरकार ने पीले, सफेद और लाल रंग के तिरंगे ध्वज के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके केंद्र में राज्य का प्रतीक गंडाबेरुंडा (एक पौराणिक पक्षी) था। यह डिजाइन कन्नड़ और संस्कृति विभाग द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर आधारित था। हालांकि, उस समय इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा गया था क्योंकि इसके लिए ध्वज संहिता में संशोधन की आवश्यकता थी, लेकिन गृह मंत्रालय ने इसे अस्वीकार कर दिया था। वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए शिवकुमार ने कहा कि वे कानूनी विशेषज्ञों के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि राष्ट्रीय ध्वज के नियमों का उल्लंघन किए बिना या उसका अनादर किए बिना राज्य ध्वज को मान्यता दी जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रचलित पीले और लाल ध्वज को ही लोग स्वीकार करते हैं और इसमें किसी नए बदलाव की आवश्यकता नहीं है।
सामाजिक सद्भाव और कार्यकर्ताओं को चेतावनी
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में रहने वाले विभिन्न भाषाई समूहों के बीच सद्भाव बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि कर्नाटक में रहने वाले मराठी भाषी लोगों को भी राज्योत्सव को स्वीकार करना चाहिए और यहां सम्मानपूर्वक रहना चाहिए। साथ ही, उन्होंने कन्नड़ कार्यकर्ताओं को आईटी कंपनियों और अन्य संस्थानों में नैतिक पुलिसिंग में शामिल न होने की कड़ी चेतावनी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य के हितों की रक्षा के लिए मौजूद है और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन उन्हें कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने ध्वज को समानता, शांति और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की संस्कृति का प्रतीक बताया। सरकार का रुख स्पष्ट है कि कन्नड़ ध्वज ज्ञान और विरासत का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे कानूनी सुरक्षा के साथ सम्मानित किया जाएगा।
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स्रोत: The Hindu





