भारत सरकार की केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्र की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से कई बड़े फैसलों की घोषणा की है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आयोजित सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में रक्षा क्षेत्र के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस निर्णय के अनुसार, भारतीय नौसेना के बेड़े में आठ नए युद्धपोतों को शामिल किया जाएगा। सरकार ने इस पूरी परियोजना के लिए 40,000 करोड़ रुपये के विशाल बजट का प्रावधान किया है। यह कदम समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के लिए उठाया गया है।
रक्षा क्षेत्र में बड़ा निवेश
नौसेना के लिए इन युद्धपोतों का निर्माण आधुनिक रक्षा तकनीक और रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। 40 हजार करोड़ रुपये का यह निवेश रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति ने देश की वर्तमान सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और पाया कि नौसेना की ताकत बढ़ाना समय की मांग है। इन आठ नए युद्धपोतों के आने से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इस बैठक में लिए गए निर्णयों का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। 40,000 करोड़ रुपये की यह राशि रक्षा बजट के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है। नए युद्धपोतों का निर्माण स्वदेशी क्षमताओं को भी बढ़ावा दे सकता है।

राज्यों में एसआईआर की समय सीमा बढ़ी
रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ सरकार ने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में भी कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार ने देश के छह विभिन्न राज्यों में एसआईआर की समय सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस फैसले से उन राज्यों को अपनी विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। यह विस्तार उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहां परियोजनाएं अपने अंतिम चरण में हैं या जिन्हें पूरा करने के लिए और अधिक समय की आवश्यकता थी। राज्यों में एसआईआर की समय सीमा बढ़ने से स्थानीय सरकारों को अपनी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने का अवसर मिलेगा।
चक्रवात अनर्ब का प्रभाव
कैबिनेट की बैठक में प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेष रूप से चक्रवात अनर्ब के कारण हुए नुकसान और तबाही पर चर्चा की गई। चक्रवात अनर्ब ने कई क्षेत्रों में जनजीवन को प्रभावित किया है और बुनियादी ढांचे को क्षति पहुंचाई है। सरकार इस स्थिति पर निरंतर नजर रख रही है ताकि राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके। चक्रवात अनर्ब की स्थिति पर सरकार की सक्रियता यह दर्शाती है कि वह आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर है। इन निर्णयों के माध्यम से केंद्र सरकार ने रक्षा, विकास और आपदा प्रबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया है।
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स्रोत: Amar Ujala, Amar Ujala






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