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दूरदर्शन का इतिहास: 1959 में दिल्ली से प्रयोग के तौर पर शुरुआत, 1982 में रंगीन हुआ टीवी, ऐसे बदला भारत का प्रसारण

एक छोटे से प्रायोगिक प्रसारण से शुरू हुआ दूरदर्शन दशकों तक भारत के घरों की खिड़की बना रहा। जानिए इसके सफर के अहम पड़ाव।

पुराने टीवी सेट और एंटीना का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • आज भले ही सैकड़ों टीवी चैनल और ओटीटी प्लेटफॉर्म मौजूद हों, लेकिन कई पीढ़ियों के लिए टीवी का मतलब दूरदर्शन ही था।
  • DD News के मुताबिक 1965 में दिल्ली से नियमित दैनिक प्रसारण शुरू हुआ।
  • 1980 के दशक के मध्य से दूरदर्शन पर पारिवारिक धारावाहिकों, पौराणिक कथाओं पर आधारित कार्यक्रमों, कॉमेडी शो, बच्चों के कार्यक्रमों और फिल्मी गीतों पर आधारित कार्यक्रमों का दौर शुरू हुआ।
  • दूरदर्शन ने भारत में टीवी को एक जन माध्यम बनाया। कृषि दर्शन जैसे कार्यक्रमों ने किसानों तक जानकारी पहुंचाई, शैक्षिक प्रसारणों ने पढ़ाई में मदद की और राष्ट्रीय आयोजनों के प्रसारण ने पूरे देश…

आज भले ही सैकड़ों टीवी चैनल और ओटीटी प्लेटफॉर्म मौजूद हों, लेकिन कई पीढ़ियों के लिए टीवी का मतलब दूरदर्शन ही था। रविवार की सुबह, शाम का समाचार, छत पर एंटीना घुमाना और पूरे मोहल्ले का एक टीवी के सामने बैठना, ये यादें दूरदर्शन से ही जुड़ी हैं। सरकारी प्रसारक दूरदर्शन का सफर एक छोटे प्रयोग से शुरू होकर देश के सबसे बड़े टेलीविजन नेटवर्क तक पहुंचा। आइए जानते हैं इसके अहम पड़ाव।

1959: दिल्ली से प्रायोगिक शुरुआत

DD News और PIB के अनुसार दूरदर्शन की शुरुआत 15 सितंबर 1959 को दिल्ली में एक प्रायोगिक टेलीविजन सेवा के रूप में हुई। इसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था। शुरुआत में यह सेवा आकाशवाणी यानी ऑल इंडिया रेडियो के हिस्से के तौर पर चलती थी। प्रसारण बहुत सीमित समय के लिए होता था और इसका दायरा भी दिल्ली के आसपास तक सीमित था। इन शुरुआती कार्यक्रमों का फोकस शिक्षा और सामुदायिक विकास जैसे विषयों पर था। इसी वजह से 15 सितंबर को दूरदर्शन का स्थापना दिवस माना जाता है।

मुख्य बातें: पुराने टीवी सेट और एंटीना का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

1965 से नियमित सेवा और विस्तार

DD News के मुताबिक 1965 में दिल्ली से नियमित दैनिक प्रसारण शुरू हुआ। इसके बाद 1972 में टेलीविजन सेवा का विस्तार मुंबई और अमृतसर तक हुआ। धीरे-धीरे दूसरे शहरों में भी केंद्र खुलते गए। यह वह दौर था जब टीवी सेट बहुत कम घरों में होते थे और अक्सर सामुदायिक केंद्रों या पंचायत घरों में लोग एक साथ टीवी देखते थे।

1976: आकाशवाणी से अलग पहचान

1 अप्रैल 1976 को टेलीविजन सेवा को आकाशवाणी से अलग कर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत एक अलग विभाग बनाया गया। इसी के साथ दूरदर्शन ने एक स्वतंत्र प्रसारक के रूप में अपनी पहचान बनानी शुरू की। अलग होने के बाद दूरदर्शन के पास अपने कार्यक्रम, अपना ढांचा और अपनी योजनाएं थीं, जिससे इसके विस्तार की गति तेज हुई।

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1982: रंगीन टीवी और राष्ट्रीय कार्यक्रम

दूरदर्शन के इतिहास में 1982 का साल सबसे बड़ा मोड़ माना जाता है। DD News और PIB के अनुसार 15 अगस्त 1982 को रंगीन प्रसारण शुरू हुआ और इसी के साथ राष्ट्रीय कार्यक्रम यानी नेशनल प्रोग्राम की शुरुआत हुई, जो पूरे देश में एक साथ दिखाया जाने लगा। उसी साल नवंबर में नई दिल्ली में हुए एशियाई खेलों का रंगीन प्रसारण किया गया। इस आयोजन ने देश में रंगीन टीवी को लोकप्रिय बनाने और टीवी नेटवर्क के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई।

धारावाहिकों का सुनहरा दौर

1980 के दशक के मध्य से दूरदर्शन पर पारिवारिक धारावाहिकों, पौराणिक कथाओं पर आधारित कार्यक्रमों, कॉमेडी शो, बच्चों के कार्यक्रमों और फिल्मी गीतों पर आधारित कार्यक्रमों का दौर शुरू हुआ। कई धारावाहिक इतने लोकप्रिय हुए कि उनके प्रसारण के समय सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था। यही वह दौर था जब दूरदर्शन ने भारतीय परिवारों के रोजमर्रा के जीवन में गहरी जगह बनाई। समाचार, खेल प्रसारण और राष्ट्रीय आयोजनों के सीधे प्रसारण ने भी इसे देश की साझा स्मृति का हिस्सा बना दिया।

1997: प्रसार भारती का गठन

1997 में प्रसार भारती का गठन हुआ, जो देश का सार्वजनिक सेवा प्रसारक है। दूरदर्शन और आकाशवाणी इसके दो अंग बने। इसका मकसद सरकारी प्रसारण को एक स्वायत्त निकाय के तहत लाना था, ताकि सार्वजनिक हित से जुड़ी सूचना, शिक्षा और मनोरंजन की जिम्मेदारी बेहतर ढंग से निभाई जा सके।

आज का दूरदर्शन

आज दूरदर्शन कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनलों का नेटवर्क है। डीडी नेशनल, डीडी न्यूज, डीडी स्पोर्ट्स, डीडी किसान और विभिन्न भाषाओं के क्षेत्रीय चैनल इसके अहम हिस्से हैं। प्रसार भारती का मुफ्त डीटीएच प्लेटफॉर्म डीडी फ्री डिश दूर-दराज के इलाकों में बिना मासिक शुल्क के टीवी चैनल पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। डिजिटल दौर में दूरदर्शन ने यूट्यूब, सोशल मीडिया और अपने ओटीटी मंचों के जरिये नई पीढ़ी तक पहुंचने की कोशिश भी की है।

क्यों खास है दूरदर्शन की विरासत

दूरदर्शन ने भारत में टीवी को एक जन माध्यम बनाया। कृषि दर्शन जैसे कार्यक्रमों ने किसानों तक जानकारी पहुंचाई, शैक्षिक प्रसारणों ने पढ़ाई में मदद की और राष्ट्रीय आयोजनों के प्रसारण ने पूरे देश को एक साथ जोड़ा। निजी चैनलों के आने के बाद भी आपदा, चुनाव और राष्ट्रीय पर्वों के प्रसारण में दूरदर्शन की भूमिका आज भी अहम मानी जाती है। 2024 में दूरदर्शन ने अपने 65 साल पूरे किए, जिसे DD News ने भारतीय प्रसारण के इतिहास को आकार देने वाली विरासत के रूप में याद किया।

दूरदर्शन की शुरुआत कब हुई थी

दूरदर्शन की शुरुआत 15 सितंबर 1959 को दिल्ली में प्रायोगिक टेलीविजन सेवा के रूप में हुई थी।

भारत में रंगीन टीवी प्रसारण कब शुरू हुआ

15 अगस्त 1982 को दूरदर्शन ने रंगीन प्रसारण शुरू किया। उसी साल नवंबर में दिल्ली एशियाई खेलों का रंगीन प्रसारण हुआ।

स्रोत: DD News: 65 Glorious Years of Doordarshan, PIB: Journey of Television Revolution

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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