दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों का क्षेत्रीय संगठन आसियान भारत की विदेश नीति और व्यापार दोनों के लिए बेहद अहम है। प्रधानमंत्री स्तर की भारत-आसियान शिखर बैठकें हर साल होती हैं और भारत की एक्ट ईस्ट नीति का केंद्र भी यही क्षेत्र है। आइए समझते हैं कि आसियान क्या है, यह कैसे बना और भारत के साथ इसके रिश्ते कैसे विकसित हुए।
आसियान क्या है
आसियान का पूरा नाम एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस है, यानी दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन। विदेश मंत्रालय के अनुसार इसकी स्थापना 8 अगस्त 1967 को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आसियान घोषणा, जिसे बैंकॉक घोषणा भी कहते हैं, पर हस्ताक्षर के साथ हुई। इसका सचिवालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में है।
संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, सांस्कृतिक सहयोग और क्षेत्र में शांति व स्थिरता को बढ़ावा देना है। आसियान की खासियत यह है कि यहां फैसले आम तौर पर आपसी सहमति से लिए जाते हैं और सदस्य एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने के सिद्धांत को अहमियत देते हैं।

आसियान के सदस्य देश
विदेश मंत्रालय के जुलाई 2025 के ब्रीफ के अनुसार उस समय आसियान के 10 सदस्य थे: ब्रुनेई दारुस्सलाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम। तिमोर-लेस्ते को नवंबर 2022 में सैद्धांतिक रूप से 11वें सदस्य के रूप में मंजूरी और पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था। इसके बाद 26 अक्टूबर 2025 को तिमोर-लेस्ते पूर्ण सदस्य के रूप में आसियान में शामिल हुआ, जिससे सदस्य देशों की संख्या 11 हो गई।
आसियान कैसे काम करता है
आसियान की अध्यक्षता हर साल सदस्य देशों के बीच बारी-बारी से बदलती है। अध्यक्ष देश उस साल की शिखर बैठकों और संबंधित बैठकों की मेजबानी करता है। 2026 में आसियान की अध्यक्षता फिलीपींस के पास है। आसियान के साथ कई बाहरी देश संवाद साझेदार यानी डायलॉग पार्टनर के रूप में जुड़े हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। आसियान से जुड़े मंचों में ईस्ट एशिया समिट और आसियान रीजनल फोरम जैसे मंच भी आते हैं, जहां बड़े देश क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग पर चर्चा करते हैं।
यह भी पढ़ें: ब्रिक्स क्या है, इतिहास और भारत की भूमिका, 11 सदस्य, 2006 से सफर और 2026 की अध्यक्षता | ईरान में 23 वर्षीय छात्रा नजमे अमीनी को सोशल मीडिया पोस्ट पर ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा, अपील का रास्ता खुला
भारत-आसियान संबंधों का सफर
विदेश मंत्रालय के ब्रीफ के अनुसार भारत-आसियान संबंधों का सफर इस तरह आगे बढ़ा:
- 1992: भारत ने सेक्टोरल डायलॉग पार्टनर के रूप में औपचारिक जुड़ाव शुरू किया।
- 1995: भारत को डायलॉग पार्टनर का दर्जा मिला।
- 2002: रिश्ते को शिखर सम्मेलन स्तर तक बढ़ाया गया।
- दिसंबर 2012: नई दिल्ली में स्मारक शिखर सम्मेलन में रिश्ता रणनीतिक साझेदारी बना।
- जनवरी 2018: 25 साल पूरे होने पर नई दिल्ली में स्मारक शिखर सम्मेलन, समुद्री सहयोग पर जोर और दिल्ली घोषणा।
- 12 नवंबर 2022: नोम पेन्ह में रिश्ते को व्यापक रणनीतिक साझेदारी यानी CSP का दर्जा मिला।
2022 को आसियान-भारत मैत्री वर्ष के रूप में मनाया गया था, क्योंकि उस साल संबंधों के 30 साल पूरे हुए थे। 2024 को भारत की एक्ट ईस्ट नीति के एक दशक के रूप में चिह्नित किया गया।
एक्ट ईस्ट नीति और आसियान
भारत ने 1990 के दशक में पूर्व की ओर देखो यानी लुक ईस्ट नीति अपनाई थी, जिसे 2014 में एक्ट ईस्ट नीति का रूप दिया गया। इसका मकसद दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया के देशों के साथ व्यापार, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और लोगों के बीच रिश्तों को मजबूत करना है। आसियान इस नीति का केंद्र है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को म्यांमार के रास्ते दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाली सड़क और जलमार्ग परियोजनाएं भी इसी सोच का हिस्सा हैं।
भारत के लिए आसियान क्यों अहम
आसियान देश भारत के बड़े व्यापारिक साझेदारों में हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय संतुलन जैसे मुद्दों पर भी आसियान की भूमिका अहम है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 2023 की 20वीं आसियान-भारत शिखर बैठक में समुद्री सहयोग और खाद्य सुरक्षा पर संयुक्त बयान अपनाए गए थे। सांस्कृतिक रूप से भी भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच पुराने रिश्ते हैं, जिनकी झलक इस क्षेत्र के मंदिरों, भाषाओं और परंपराओं में दिखती है।
आसियान का मुख्यालय कहां है
आसियान सचिवालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में है।
भारत आसियान का सदस्य है या नहीं
भारत आसियान का सदस्य नहीं है, बल्कि डायलॉग पार्टनर है। 2022 से भारत-आसियान संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर हैं।
भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी कब बनी
विदेश मंत्रालय के अनुसार 12 नवंबर 2022 को कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में हुए स्मारक शिखर सम्मेलन में भारत-आसियान रणनीतिक साझेदारी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया।
2026 में आसियान की अध्यक्षता किसके पास है
2026 में आसियान की अध्यक्षता फिलीपींस के पास है। अध्यक्ष देश साल भर की शिखर बैठकों और मंत्री स्तर की बैठकों की मेजबानी करता है।
आसियान का 11वां सदस्य कौन है
तिमोर-लेस्ते 26 अक्टूबर 2025 को आसियान का 11वां पूर्ण सदस्य बना।
स्रोत: MEA: Brief on India-ASEAN Relations (July 2025), ASEAN Secretariat





