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कॉमनवेल्थ क्या है: 56 देशों का संगठन, भारत की भूमिका और एंटीगुआ में हो रही CHOGM 2026 बैठक

राष्ट्रमंडल यानी कॉमनवेल्थ 56 देशों का स्वैच्छिक संगठन है। इसकी शीर्ष बैठक CHOGM इस बार कैरेबियाई देश एंटीगुआ एंड बारबुडा में हो रही है।

कई देशों के झंडों और विश्व मानचित्र का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • दुनिया के 56 देशों का एक ऐसा संगठन है जिसमें भारत जैसा बड़ा लोकतंत्र भी शामिल है और प्रशांत महासागर के छोटे द्वीपीय देश भी।
  • आधुनिक कॉमनवेल्थ की नींव 1949 की लंदन घोषणा से पड़ी। भारत 1950 में गणतंत्र बनने वाला था और वह ब्रिटिश सम्राट को अपना राष्ट्राध्यक्ष नहीं मानना चाहता था, लेकिन संगठन में बना रहना चाहता था।
  • आम लोगों के बीच कॉमनवेल्थ का सबसे जाना-पहचाना चेहरा कॉमनवेल्थ गेम्स हैं।
  • कॉमनवेल्थ सचिवालय के अनुसार इसमें 56 सदस्य देश हैं।

दुनिया के 56 देशों का एक ऐसा संगठन है जिसमें भारत जैसा बड़ा लोकतंत्र भी शामिल है और प्रशांत महासागर के छोटे द्वीपीय देश भी। इसका नाम है कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस, जिसे हिंदी में राष्ट्रमंडल कहा जाता है। इसके शासनाध्यक्षों की बैठक, जिसे CHOGM यानी कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग कहते हैं, इस बार कैरेबियाई देश एंटीगुआ एंड बारबुडा की राजधानी सेंट जॉन्स में 1 से 4 नवंबर 2026 तक हो रही है। इस मौके पर समझते हैं कि कॉमनवेल्थ क्या है, यह कैसे काम करता है और भारत के लिए इसका क्या महत्व है।

कॉमनवेल्थ क्या है

कॉमनवेल्थ स्वतंत्र और बराबर देशों का स्वैच्छिक संगठन है। कॉमनवेल्थ सचिवालय के अनुसार इसके 56 सदस्य देश हैं, जो अफ्रीका, एशिया, अमेरिका, यूरोप और प्रशांत क्षेत्र में फैले हैं। इनमें से ज्यादातर देश कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहे थे, लेकिन अब कुछ ऐसे देश भी सदस्य हैं जिनका ब्रिटेन से औपनिवेशिक संबंध नहीं रहा। सदस्य देश लोकतंत्र, मानवाधिकार, कानून का शासन और विकास जैसे साझा मूल्यों पर साथ काम करने का संकल्प लेते हैं।

कॉमनवेल्थ कोई सैन्य गठबंधन या व्यापार समझौता नहीं है। इसके फैसले आम सहमति से होते हैं और किसी सदस्य पर बाध्यकारी कानून नहीं थोपे जाते। यह संगठन संवाद, सहयोग और साझा कार्यक्रमों का मंच है।

मुख्य बातें: कई देशों के झंडों और विश्व मानचित्र का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

लंदन घोषणा 1949 और भारत की भूमिका

आधुनिक कॉमनवेल्थ की नींव 1949 की लंदन घोषणा से पड़ी। भारत 1950 में गणतंत्र बनने वाला था और वह ब्रिटिश सम्राट को अपना राष्ट्राध्यक्ष नहीं मानना चाहता था, लेकिन संगठन में बना रहना चाहता था। लंदन घोषणा के जरिये यह रास्ता निकला कि गणतंत्र देश भी सदस्य रह सकते हैं और ब्रिटिश सम्राट को केवल इस स्वतंत्र संगठन के प्रमुख यानी हेड ऑफ द कॉमनवेल्थ के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया जाएगा। इसी घोषणा के बाद नाम से ब्रिटिश शब्द हटा और सदस्य देशों को स्वतंत्र और बराबर माना गया। इस तरह भारत की स्थिति ने आधुनिक कॉमनवेल्थ का स्वरूप तय करने में अहम भूमिका निभाई।

कॉमनवेल्थ कैसे काम करता है

कॉमनवेल्थ का कामकाज लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सचिवालय संभालता है। इसके प्रमुख महासचिव होते हैं। इस समय यह पद घाना की शर्ली बोचवे के पास है। संगठन के कई अंग और संस्थाएं हैं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, युवा, व्यापार और जलवायु जैसे क्षेत्रों पर काम होता है। सबसे बड़ा फैसला लेने वाला मंच CHOGM है, जहां सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष मिलते हैं और साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हैं।

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CHOGM 2026 क्यों अहम है

कॉमनवेल्थ की वेबसाइट के अनुसार CHOGM 2026 सेंट जॉन्स, एंटीगुआ एंड बारबुडा में 1 से 4 नवंबर 2026 तक हो रही है। इसका विषय साझेदारी और निवेश को तेज कर समृद्ध कॉमनवेल्थ बनाना रखा गया है। छोटे द्वीपीय देशों के लिए जलवायु परिवर्तन, समुद्र का बढ़ता स्तर, आपदाओं से निपटने के लिए धन और व्यापार जैसे मुद्दे बहुत अहम हैं। कॉमनवेल्थ के कई सदस्य छोटे देश हैं, इसलिए यह मंच उन्हें बड़े देशों के साथ अपनी बात रखने का अवसर देता है।

कॉमनवेल्थ गेम्स भी इसी परिवार का हिस्सा

आम लोगों के बीच कॉमनवेल्थ का सबसे जाना-पहचाना चेहरा कॉमनवेल्थ गेम्स हैं। यह बहु-खेल प्रतियोगिता हर चार साल में होती है, जिसमें सदस्य देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। भारत ने 2010 में नई दिल्ली में इन खेलों की मेजबानी की थी। इसके अलावा कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप के जरिये कई देशों के छात्रों को उच्च शिक्षा के मौके मिलते हैं।

भारत के लिए कॉमनवेल्थ का महत्व

भारत आबादी के लिहाज से कॉमनवेल्थ का सबसे बड़ा सदस्य है। इस संगठन के जरिये भारत अफ्रीका, कैरेबियन और प्रशांत क्षेत्र के छोटे देशों से जुड़ता है, जिनसे सामान्य तौर पर सीधे संवाद के मौके कम मिलते हैं। साझा भाषा के रूप में अंग्रेजी, मिलती-जुलती कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं और बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी इस रिश्ते को मजबूत करते हैं। विकास सहयोग, क्षमता निर्माण और जलवायु जैसे मुद्दों पर भारत इस मंच का इस्तेमाल ग्लोबल साउथ की आवाज उठाने में कर सकता है।

संगठन पर उठने वाले सवाल

कॉमनवेल्थ की आलोचना भी होती रही है। कुछ लोगों का कहना है कि इसके फैसले बाध्यकारी नहीं होते, इसलिए इसका असर सीमित है। औपनिवेशिक इतिहास से जुड़े सवाल भी समय-समय पर उठते हैं। इसके बावजूद संगठन में नए सदस्यों का जुड़ना दिखाता है कि कई देश इसे सहयोग का उपयोगी मंच मानते हैं।

कॉमनवेल्थ में कितने देश हैं

कॉमनवेल्थ सचिवालय के अनुसार इसमें 56 सदस्य देश हैं।

क्या कॉमनवेल्थ के सभी सदस्य ब्रिटिश उपनिवेश रहे हैं

नहीं। ज्यादातर सदस्य कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहे, लेकिन कुछ सदस्य ऐसे भी हैं जिनका ब्रिटेन से औपनिवेशिक संबंध नहीं रहा।

कॉमनवेल्थ का सचिवालय कहां है

कॉमनवेल्थ सचिवालय लंदन में है। इसके प्रमुख महासचिव होते हैं, जो सदस्य देशों की सहमति से चुने जाते हैं और संगठन के रोजमर्रा के कामकाज की निगरानी करते हैं।

CHOGM 2026 कहां हो रही है

CHOGM 2026 सेंट जॉन्स, एंटीगुआ एंड बारबुडा में 1 से 4 नवंबर 2026 तक हो रही है।

स्रोत: Commonwealth Secretariat: About us, Commonwealth: London Declaration 1949, Commonwealth: CHOGM 2026

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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