कर्नाटक सरकार ने राज्य के चारों सार्वजनिक परिवहन निगमों के लिए बस किराए में वृद्धि की घोषणा की है, जो 4 नवंबर की मध्यरात्रि से प्रभावी हो गई है। इस निर्णय से बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम और कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम सहित अन्य दो निगमों के यात्री प्रभावित होंगे। सरकार के अनुसार, केएसआरटीसी के लिए औसत किराया वृद्धि लगभग 23 प्रतिशत है, जबकि बीएमटीसी के किराए में 33 प्रतिशत से 35 प्रतिशत के बीच की वृद्धि की गई है।

नए किराए की संरचना और प्रभावी तिथि
कर्नाटक सरकार ने राज्य के चारों परिवहन निगमों, बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी), कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी), उत्तर पश्चिमी कर्नाटक सड़क परिवहन निगम (एनडब्ल्यूकेआरटीसी) और कल्याण कर्नाटक रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (केकेआरटीसी) के लिए बस किराए में संशोधन को मंजूरी दे दी है। परिवहन मंत्री बैरथी सुरेश ने 4 नवंबर को इस निर्णय की घोषणा की और स्पष्ट किया कि संशोधित दरें उसी दिन की मध्यरात्रि से लागू हो जाएंगी। इस वृद्धि का प्रभाव साधारण बसों, एक्सप्रेस बसों, लंबी दूरी की सेवाओं और हवाई अड्डे की बस सेवाओं पर पड़ेगा। केएसआरटीसी की साधारण बसों के किराए में यात्रा की दूरी के आधार पर 9 रुपये तक की वृद्धि की गई है। सरकार का तर्क है कि परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक हो गया था।
विशिष्ट रूट और बीएमटीसी किराए में बदलाव
बेंगलुरु शहर के भीतर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बीएमटीसी ने अपने न्यूनतम चरणवार किराए में बदलाव किया है। अब न्यूनतम किराया 6 रुपये से बढ़कर 10 रुपये हो गया है। शहर के महत्वपूर्ण रूटों पर भी इसका असर दिखेगा, जैसे हेब्बल से केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक का बस किराया 175 रुपये से बढ़कर 200 रुपये कर दिया गया है। केएसआरटीसी की सेवाओं में भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई है। नेलमंगला से मैजेस्टिक तक का किराया अब 35 रुपये के बजाय 44 रुपये होगा, जबकि डोड्डाबल्लापुर से मैजेस्टिक का किराया 38 रुपये से बढ़ाकर 47 रुपये कर दिया गया है। केएसआरटीसी एक्सप्रेस सेवाओं के लिए किराया 81 रुपये से बढ़कर 100 रुपये हो गया है, और लंबी दूरी की बसों के लिए यह 75 रुपये से बढ़कर 90 रुपये हो गया है। मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि वज्र और वोल्वो जैसी प्रीमियम सेवाओं के किराए में भी समय-समय पर आवश्यकतानुसार संशोधन किया जा सकता है।
नियामक समिति की सिफारिशें और बोर्ड की मांगें
यह किराया संशोधन सार्वजनिक परिवहन किराया नियामक समिति की सिफारिशों के बाद आया है, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अतुल कुमार तिवारी ने की थी। दिलचस्प बात यह है कि समिति ने किराए में 45 प्रतिशत की वृद्धि की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने इसे कम रखते हुए लागू किया है। इसके अलावा, चारों परिवहन निगमों के बोर्डों ने परिवहन मंत्री बैरथी सुरेश के अनुसार, 90 प्रतिशत तक की किराया वृद्धि की मांग की थी। सरकार ने इन भारी मांगों के मुकाबले एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास किया है। यह वृद्धि राज्य में हाल ही में हुई दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद हुई है, जहां पिछले सप्ताह दूध और दही की सभी श्रेणियों में 8 रुपये से अधिक की वृद्धि की गई थी।
वित्तीय चुनौतियां और किराए में वृद्धि के कारण
परिवहन मंत्री ने किराए में वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कारणों का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि डीजल की बढ़ती कीमतें निगमों के संचालन पर भारी बोझ डाल रही हैं। इसके साथ ही, बसों के रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स पर होने वाले खर्च में भी काफी वृद्धि हुई है। एक अन्य प्रमुख कारण परिवहन निगम के कर्मचारियों के लिए वेतन संशोधन की आवश्यकता है। वर्तमान में, ये चारों परिवहन निगम सामूहिक रूप से लगभग 2,000 करोड़ रुपये का वार्षिक घाटा उठा रहे हैं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन सार्वजनिक सेवाओं की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर किराए में संशोधन करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगमों को घाटे से बाहर निकालने और सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए यह अतिरिक्त राजस्व आवश्यक है।
शक्ति योजना और प्रेस कॉन्फ्रेंस का घटनाक्रम
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री ने शक्ति योजना पर भी बात की, जिसके तहत पात्र महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवहन निगमों की वित्तीय समस्याओं के लिए शक्ति योजना जिम्मेदार नहीं है। कर्नाटक सरकार निगमों को जारी किए गए मुफ्त टिकटों की लागत की प्रतिपूर्ति करती है, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि कभी-कभी इन भुगतानों में देरी हो जाती है। किराए में बढ़ोतरी की घोषणा के दौरान काफी भ्रम की स्थिति भी देखी गई। जब पत्रकारों ने विभिन्न सेवाओं में प्रतिशत के आधार पर वृद्धि की स्पष्टता मांगी, तो मंत्री ने पत्रकारों से स्वयं गणना करने को कहा। निगमों के प्रबंध निदेशकों और अधिकारियों के बीच भी विवरणों को लेकर अनिश्चितता दिखाई दी। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति भी मीडिया के बार-बार अनुरोध के बाद ही उपलब्ध कराई गई, और इस दौरान अधिकारी आपस में विवरणों पर चर्चा करते नजर आए।
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स्रोत: The Hindu





