परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर पंजाब सरकार और इंसाफ कमेटी के बीच एक महत्वपूर्ण सहमति बन गई है। इस समझौते के अनुसार, 6 नवंबर को मृतक का पोस्टमार्टम किया जाएगा और उसके बाद उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा। सरकार ने पीड़ित परिवार को भारी मुआवजा देने, सरकारी नौकरी प्रदान करने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस समझौते के बाद फिलहाल मुख्यमंत्री आवास के घेराव के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है।

समझौते की मुख्य शर्तें और वित्तीय सहायता
पंजाब सरकार और इंसाफ कमेटी के बीच 4 नवंबर को हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है। इस समझौते के तहत परविंदर सिंह झोटा की पत्नी को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसके साथ ही परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए सरकार की ओर से 2 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। यह राशि परिवार को भविष्य में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से तय की गई है। समझौते में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया 6 नवंबर को पूरी की जाएगी, जिसके तुरंत बाद अंतिम संस्कार की रस्में निभाई जाएंगी।
समझौते का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा लुधियाना में हुए प्रदर्शनों से संबंधित है। लुधियाना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले एक युवक के परिवार को भी सरकार की ओर से राहत दी जाएगी। सरकार ने उस युवक के परिवार के लिए 20 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। इसके अलावा, गांव भंमे कलां के निवासी मृतक दलजीत सिंह के परिवार के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। दलजीत सिंह की पत्नी को मानसा जिले के उपायुक्त कार्यालय में नौकरी दी जाएगी और उनके परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई और मुकदमों की वापसी
आंदोलन के दौरान और उससे पहले दर्ज किए गए कई कानूनी मामलों को वापस लेने पर भी सरकार सहमत हुई है। परविंदर सिंह झोटा के पिता और एंटी ड्रग टास्क फोर्स के सदस्यों के खिलाफ जो भी मामले दर्ज किए गए थे, उन्हें अब रद्द कर दिया जाएगा। पंजाब के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान फ्लेक्स बोर्ड फाड़ने की घटनाओं को लेकर जो मुकदमे दर्ज हुए थे, उन्हें भी वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह कदम प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच विश्वास बहाली के लिए उठाया गया है।
समझौते की एक अनिवार्य शर्त यह भी है कि परविंदर सिंह झोटा के पोस्टमार्टम से पहले कुछ व्यक्तियों की रिहाई सुनिश्चित की जाएगी। इसमें लक्खा सिधाना और मोहनीत शेरों का नाम शामिल है। इन दोनों व्यक्तियों को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होने से पहले रिहा किया जाएगा। इस सहमति के बाद इंसाफ कमेटी ने 5 नवंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के संगरूर स्थित आवास का घेराव करने के अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम को फिलहाल के लिए टाल दिया है।
स्मारक और स्वास्थ्य सुविधाओं का निर्माण
परविंदर सिंह झोटा की स्मृति को संजोए रखने के लिए सरकार ने मानसा में एक स्मारक स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह स्मारक उनके द्वारा चलाए गए नशा विरोधी अभियान के सम्मान में बनाया जाएगा। इसके साथ ही, मानसा जिले के गांव ख्याला में एक ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इस ट्रॉमा सेंटर का नाम परविंदर सिंह झोटा के नाम पर रखा जाएगा। सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण के लिए आवश्यक मंजूरी जल्द ही प्रदान कर दी जाएगी ताकि क्षेत्र के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
यह ट्रॉमा सेंटर न केवल एक स्वास्थ्य सुविधा के रूप में कार्य करेगा, बल्कि यह झोटा के सामाजिक कार्यों के प्रति सरकार की स्वीकृति का भी प्रतीक होगा। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के इस कदम को समझौते के एक सकारात्मक पहलू के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की बात कही है।
हत्याकांड का घटनाक्रम और पृष्ठभूमि
परविंदर सिंह झोटा की हत्या 13 अक्टूबर की सुबह मानसा में हुई थी। वह लंबे समय से पंजाब में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ एक सक्रिय अभियान चला रहे थे। घटना के समय वह मानसा में एक मेडिकल स्टोर संचालक से नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर सवाल कर रहे थे। इस पूरी घटना का वह फेसबुक पर सीधा प्रसारण भी कर रहे थे। इसी दौरान विवाद काफी बढ़ गया और मेडिकल स्टोर संचालक ने उन पर गोलियां चला दीं। झोटा को तीन गोलियां लगीं, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इस हमले में उनके साथ मौजूद चार अन्य साथी भी घायल हुए थे।
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को 14 अक्टूबर को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया था। इस हत्याकांड के बाद पूरे पंजाब में रोष की लहर दौड़ गई थी और इंसाफ की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर को इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने की घोषणा की थी। सीबीआई की टीम ने मानसा पहुंचकर पुलिस से केस की फाइलें भी अपने कब्जे में ले ली हैं। अब सरकार और कमेटी के बीच हुए इस नए समझौते से मामले में चल रहे गतिरोध के समाप्त होने की उम्मीद है।
स्रोत: Aaj Tak





