विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एंटीगुआ और बारबुडा में गयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफ़ान अली के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की है। इस उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान भारत ने गयाना की विकास परियोजनाओं के लिए 500 मिलियन डॉलर की एक नई क्रेडिट लाइन देने की घोषणा की। यह वित्तीय सहायता मुख्य रूप से गयाना में सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और रक्षा क्षेत्र की परियोजनाओं पर केंद्रित होगी। यह बैठक राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक 2026 के इतर आयोजित की गई थी, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को दर्शाती है।

भारत और गयाना के बीच रणनीतिक वार्ता
विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार, 4 नवंबर, 2026 को सेंट जॉन्स पहुंचे थे, जिसके बाद बुधवार को उन्होंने राष्ट्रपति इरफ़ान अली से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और गयाना के बीच द्विपक्षीय सहयोग में हुई निरंतर प्रगति की समीक्षा की। विशेष रूप से वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गयाना यात्रा के बाद से दोनों देशों के संबंधों में जो गति आई है, उस पर संतोष व्यक्त किया गया। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुलाकात पर प्रसन्नता व्यक्त की और बताया कि भारत गयाना के साथ अपनी विकास साझेदारी को और अधिक मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता
भारत द्वारा घोषित 500 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन गयाना के बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए एक बड़ा कदम है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस ऋण सुविधा का उपयोग सड़कों के निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और रक्षा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किया जाएगा। भारत पहले ही गयाना में कई विकास परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है, और यह नई क्रेडिट लाइन उस लंबी साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह वित्तीय सहायता गयाना की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है और इससे वहां के नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर
इस बैठक के दौरान भारत और गयाना ने तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए जो विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देंगे। पहला समझौता सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए विनिर्माण परियोजनाओं की आपूर्ति और स्थापना से संबंधित है। यह समझौता गयाना के स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने में सहायक होगा। दूसरा समझौता त्वरित प्रभाव परियोजनाओं (क्यूआईपी) के कार्यान्वयन के लिए अनुदान सहायता प्रदान करने के बारे में है, जो स्थानीय समुदायों के लिए तत्काल लाभ वाली छोटी परियोजनाओं पर केंद्रित होगा। ये समझौते दिखाते हैं कि भारत केवल बड़े ऋण ही नहीं दे रहा है, बल्कि जमीनी स्तर पर विकास के लिए भी गयाना का साथ दे रहा है।
डिजिटल बुनियादी ढांचे और यूपीआई पर सहयोग
तीसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के क्षेत्र में सहयोग को लेकर हुआ है। इसके तहत गयाना में भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसी प्रणाली के संचालन पर काम किया जाएगा। भारत की डिजिटल भुगतान तकनीक ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, और अब गयाना भी इस तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह सहयोग गयाना के वित्तीय तंत्र को आधुनिक बनाने और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने में मील का पत्थर साबित होगा। दोनों देशों ने डिजिटल तकनीक और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को और गहरा करने की इच्छा जताई है।
वैश्विक दक्षिण और राष्ट्रमंडल का संदर्भ
भारत और गयाना के संबंध केवल द्विपक्षीय नहीं हैं, बल्कि वे ग्लोबल साउथ के साझेदारों के रूप में भी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। दोनों देश राष्ट्रमंडल के सदस्य हैं और ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा लोगों से लोगों के बीच के संबंधों की एक मजबूत नींव साझा करते हैं। अपनी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों और व्यापारिक नेताओं की एक ब्रेकफास्ट मीटिंग में भी हिस्सा लिया। वहां उन्होंने राष्ट्रमंडल भागीदारों से जोखिम कम करने और विविधता लाने का आग्रह किया। भारत और गयाना साझा प्राथमिकताओं, विकास और समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी एकजुटता को दर्शाता है।
स्रोत: The Hindu





