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छठ पूजा सामग्री: सूप, दउरा, ठेकुआ, फल और अर्घ्य की पूरी सूची, 13 से 16 नवंबर के चार दिन की तैयारी

छठ महापर्व इस बार 13 नवंबर को नहाय खाय से शुरू होकर 16 नवंबर को उषा अर्घ्य के साथ पूरा होगा। जानिए बांस के सूप और दउरा से लेकर ठेकुआ, मौसमी फल, गन्ना और दीप तक, पूजा सामग्री की पूरी सूची और खरीदारी की सलाह।

छठ पूजा सामग्री सूप दउरा और अर्घ्य की सूची का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • छठ महापर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व है, जो बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश-विदेश में बसे पूर्वांचल के लोगों के बीच बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है।
  • अलग-अलग इलाकों और परिवारों में सामग्री थोड़ी अलग होती है। अपने घर के बड़ों से सूची मिला लें।
  • हां। कई शहरों में लोग छत या आंगन में छोटा कुंड बनाकर अर्घ्य देते हैं।
  • सूप और दउरा इस्तेमाल के बाद धोकर धूप में सुखाएं और साफ कपड़े में लपेटकर रखें, कई परिवार इन्हें अगले साल भी इस्तेमाल करते हैं।

छठ महापर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व है, जो बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश-विदेश में बसे पूर्वांचल के लोगों के बीच बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए इस बार नहाय खाय 13 नवंबर, खरना 14 नवंबर, संध्या अर्घ्य 15 नवंबर और उषा अर्घ्य 16 नवंबर 2026 को है। पूजा सामग्री की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो जाती है। जानिए छठ पूजा सामग्री की पूरी सूची।

बांस के बर्तन

  • **सूप:** बांस का बना सूप, जिसमें अर्घ्य का प्रसाद सजाया जाता है। हर व्रती परिवार में कई सूप रखे जाते हैं
  • **दउरा या टोकरी:** बांस की बड़ी टोकरी, जिसमें सारा प्रसाद घाट तक ले जाया जाता है
  • कई परिवार पीतल के सूप का भी इस्तेमाल करते हैं
मुख्य बातें: छठ पूजा सामग्री सूप दउरा और अर्घ्य की सूची का ग्राफिक
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प्रसाद

  • ठेकुआ, जो गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बनता है
  • चावल के लड्डू या कसार
  • गन्ना, जिसके डंठल पत्तों समेत लाए जाते हैं
  • केला, नारियल, सिंघाड़ा, शकरकंद, मूली, अदरक और हल्दी के पौधे
  • मौसमी फल, जैसे सेब, संतरा, शरीफा, नींबू या बड़ा नींबू
  • सुथनी और अन्य कंद, जहां परंपरा हो

पूजा का सामान

  • मिट्टी के दीये और घी या तेल
  • सिंदूर, रोली, अक्षत, फूल और माला
  • पीला या लाल कपड़ा
  • अगरबत्ती और धूप
  • अर्घ्य के लिए तांबे का लोटा या पात्र और दूध
  • पान, सुपारी और मिठाई

यह भी पढ़ें: छठ पूजा 2026: 13 से 16 नवंबर तक महापर्व, जानें नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य का समय | दीपावली और छठ पर ट्रेन टिकट बुकिंग: एडवांस रिजर्वेशन, तत्काल, स्पेशल ट्रेन और रिफंड के नियम

व्रती के लिए

  • नए या साफ धुले वस्त्र, महिलाएं आमतौर पर साड़ी और पुरुष धोती पहनते हैं
  • घाट पर बैठने के लिए चटाई या दरी
  • ठंड के लिए शॉल

चार दिन का क्रम

  • **नहाय खाय:** स्नान के बाद कद्दू-भात और चने की दाल का सात्विक भोजन
  • **खरना:** दिन भर व्रत के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद, इसके बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत
  • **संध्या अर्घ्य:** डूबते सूर्य को घाट पर अर्घ्य
  • **उषा अर्घ्य:** उगते सूर्य को अर्घ्य और पारण

खरीदारी की सलाह

  • सूप और दउरा पहले ले लें, आखिरी दिनों में भीड़ और कीमत दोनों बढ़ती हैं
  • फल और गन्ना संध्या अर्घ्य से एक दिन पहले लें, ताकि ताजे रहें
  • बांस के सामान में फांस न हो, इसे पहले जांच लें
  • सामान रखने के लिए साफ जगह तय करें, छठ में शुद्धता का खास ध्यान रखा जाता है

परंपरा का सम्मान

अलग-अलग इलाकों और परिवारों में सामग्री थोड़ी अलग होती है। अपने घर के बड़ों से सूची मिला लें। प्लास्टिक की जगह बांस, मिट्टी और पत्तों के पारंपरिक सामान का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए भी बेहतर है।

क्या घर की छत पर छठ हो सकता है?

हां। कई शहरों में लोग छत या आंगन में छोटा कुंड बनाकर अर्घ्य देते हैं। परिवार की परंपरा के अनुसार यह किया जाता है।

सामान की देखभाल

सूप और दउरा इस्तेमाल के बाद धोकर धूप में सुखाएं और साफ कपड़े में लपेटकर रखें, कई परिवार इन्हें अगले साल भी इस्तेमाल करते हैं।

स्रोत: द्रिक पंचांग, बिहार पर्यटन। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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