भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार जीत दर्ज की है। 4 नवंबर को ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेले गए इस मैच में टीम इंडिया ने डकवर्थ लुईस नियम के आधार पर 5 विकेट से जीत हासिल की। इस जीत में तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज की किफायती गेंदबाजी का बड़ा योगदान रहा, जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

भारत की शानदार जीत और कप्तानी का फैसला
न्यूजीलैंड के खिलाफ इस महत्वपूर्ण श्रृंखला के पहले मैच में भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टॉस और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद एक रणनीतिक फैसला लिया। उन्होंने अपनी अंतिम एकादश में चार प्रमुख तेज गेंदबाजों को शामिल करने का निर्णय लिया, जो ईडन पार्क की पिच और वहां के हालातों के अनुकूल था। गिल का यह फैसला पूरी तरह से सही साबित हुआ क्योंकि सभी तेज गेंदबाजों ने अपनी भूमिका को बखूबी निभाया और विपक्षी टीम के बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा। मैच के दौरान बारिश की बाधा के कारण डकवर्थ लुईस नियम का प्रयोग करना पड़ा, जिसके तहत भारतीय टीम ने 5 विकेट शेष रहते हुए लक्ष्य को प्राप्त कर लिया और श्रृंखला में 1:0 की बढ़त बना ली।
गेंदबाजों का सामूहिक प्रदर्शन और कंबोज की किफायती स्पेल
भारतीय गेंदबाजी आक्रमण ने इस मैच में न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया। अर्शदीप सिंह टीम के सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने 4 विकेट अपने नाम किए, जबकि गुरनूर बरार ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट हासिल किए। हालांकि, मैच का मुख्य आकर्षण अंशुल कंबोज रहे। कंबोज ने अपने कोटे के 10 ओवरों में केवल 22 रन खर्च किए और 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। उनकी गेंदबाजी में जो नियंत्रण और अनुशासन दिखा, उसने चयनकर्ताओं और प्रशंसकों को काफी प्रभावित किया। भले ही अर्शदीप और गुरनूर ने उनसे अधिक विकेट लिए थे, लेकिन कंबोज की रन रोकने की क्षमता और दबाव बनाने के तरीके ने उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के पुरस्कार का हकदार बनाया।
अंशुल कंबोज ने बनाया एक खास रिकॉर्ड
इस पुरस्कार को जीतने के साथ ही अंशुल कंबोज ने भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक विशेष स्थान प्राप्त कर लिया है। वह भारत के छठे ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने एक वनडे मैच में बिना कोई गेंद खेले और 2 या उससे कम विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीता है। इस विशिष्ट क्लब में जसप्रीत बुमराह और अनिल कुंबले जैसे महान गेंदबाजों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपने करियर में दो:दो बार यह उपलब्धि हासिल की है। कंबोज के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि यह उनके करियर का केवल दूसरा वनडे मैच था और उन्होंने बहुत ही कम समय में दिग्गजों की सूची में अपनी जगह बना ली है।
खराब डेब्यू के बाद शानदार वापसी की कहानी
अंशुल कंबोज के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत काफी चुनौतीपूर्ण रही थी। अक्टूबर महीने की शुरुआत में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए अपने डेब्यू मैच में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। उस मुकाबले में उन्होंने 9 ओवरों की गेंदबाजी में बिना कोई विकेट लिए 82 रन लुटा दिए थे। उस खराब प्रदर्शन के बाद कंबोज पर काफी दबाव था, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे ही मैच में उन्होंने जिस तरह से वापसी की, वह उनकी मानसिक मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने अपनी पिछली गलतियों से सीखा और ऑकलैंड में सटीक लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी की, जिससे न्यूजीलैंड के बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आए।
मैच के बाद कंबोज और गिल की प्रतिक्रिया
पुरस्कार जीतने के बाद अंशुल कंबोज ने अपनी सफलता का राज साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी तैयारी का मुख्य आधार केवल एक ही लाइन और लेंथ पर लगातार गेंदबाजी करना था। उन्होंने पिच के व्यवहार के बारे में अधिक सोचने के बजाय अपने बुनियादी प्लान पर ध्यान केंद्रित किया। कंबोज ने विशेष रूप से वबल सीम गेंद का जिक्र किया, जो इस पिच पर काफी प्रभावी साबित हो रही थी। उन्होंने बल्लेबाजों की ताकत और कमजोरी का अध्ययन किया था और उसी के अनुसार अपनी रणनीति बनाई थी। दूसरी ओर, कप्तान शुभमन गिल ने जीत का श्रेय पूरी टीम को दिया और रोहित शर्मा की फील्डिंग की विशेष प्रशंसा की। गिल ने रोहित शर्मा द्वारा किए गए रन:आउट को मैच का टर्निंग पॉइंट बताया, जिसने खेल का रुख भारत की ओर मोड़ दिया।
स्रोत: India TV






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