मुंबई, 5 नवंबर 2026: घरेलू शेयर बाजार आज गुरुवार को जोरदार शुरुआत की ओर बढ़ता दिख रहा है। बाजार खुलने से पहले GIFT Nifty करीब 342 अंक उछलकर 24,311 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि बाद में यह 24,284 के करीब रहा। इसका सीधा संकेत है कि Nifty 50 आज 24,000 का अहम स्तर पार करके खुल सकता है। बुधवार को Nifty 23,960.60 पर बंद हुआ था, यानी वह 24,000 से सिर्फ करीब 40 अंक नीचे था।

बुधवार को लगातार पांचवें दिन तेजी
बुधवार 4 नवंबर को सेंसेक्स 383.55 अंक यानी 0.50 फीसदी चढ़कर 77,301.40 पर बंद हुआ। वहीं NSE का Nifty 50 149.75 अंक यानी 0.63 फीसदी की बढ़त के साथ 23,960.60 पर बंद हुआ। यह लगातार पांचवां सत्र था जब दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। पिछले पांच सत्रों में दोनों सूचकांक करीब 5.6 फीसदी ऊपर आ चुके हैं, और यह करीब पांच महीने में बाजार की सबसे लंबी जीत की लकीर है।
बुधवार को छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी खरीदारी रही। Nifty MidCap 100 करीब 1.55 फीसदी और Nifty SmallCap 100 करीब 2 फीसदी चढ़ा। Nifty 50 में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, अडानी एंटरप्राइजेज और टाइटन सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयरों में रहे। सेक्टर के हिसाब से देखें तो सिर्फ IT इंडेक्स कमजोर रहा, जो 1 फीसदी से ज्यादा टूटा। TCS करीब 2.5 फीसदी और Infosys करीब 1.7 फीसदी गिरे। मीडिया, मेटल, FMCG और रियल्टी शेयरों ने बाजार को सहारा दिया।
एक और अहम बात यह रही कि सेंसेक्स 23 फरवरी के बाद पहली बार अपने 200 दिन के मूविंग एवरेज तक पहुंचा। Nifty इस स्तर से थोड़ा ही नीचे बंद हुआ। तकनीकी विश्लेषक इसे लंबी अवधि के रुझान में सुधार का संकेत मानते हैं।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव का असर
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजे माने जा रहे हैं। इन चुनावों में डेमोक्रेट पार्टी ने कांग्रेस पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इससे दुनिया भर में व्यापार तनाव और भू राजनीतिक जोखिम कुछ कम हो सकते हैं। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और पश्चिम एशिया के संघर्ष ने इस साल भारतीय बाजार को कमजोर रखा था।
टाटा एसेट मैनेजमेंट के इक्विटी CIO राहुल सिंह के मुताबिक, अगर व्यापार युद्ध और भू राजनीतिक तनाव घटते हैं तो कमोडिटी की लागत और महंगाई का दबाव कम होगा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि बड़ी कंपनियों की कमाई में सुधार दिख रहा है, जो वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही के नतीजों में नजर आया है।
कच्चा तेल 100 डॉलर से नीचे
भारत के लिए दूसरी बड़ी राहत कच्चे तेल से आई है। पिछले सत्र में ब्रेंट क्रूड करीब 8 फीसदी टूट गया। पश्चिम एशिया के संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद ने तेल की कीमतों पर दबाव बनाया। जनवरी डिलीवरी वाला ब्रेंट वायदा करीब 93 डॉलर प्रति बैरल पर दिखा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, इसलिए सस्ता तेल महंगाई, रुपये और सरकारी खजाने तीनों के लिए अच्छी खबर है। आज HPCL, BPCL, ONGC और रिलायंस जैसे तेल से जुड़े शेयरों पर बाजार की खास नजर रहेगी।
अमेरिकी और एशियाई बाजारों का हाल
रात भर अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी रही। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 3.03 फीसदी चढ़ा, जबकि S&P 500 में 1.58 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 1.44 फीसदी की बढ़त रही। दूसरी तरफ एशियाई बाजारों में मिला जुला रुख है। निवेशक टेक्नोलॉजी शेयरों से पैसा निकालकर कंज्यूमर और वित्तीय शेयरों में लगा रहे हैं। सुबह के कारोबार में जापान का निक्केई 225 करीब 0.39 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 3.6 फीसदी नीचे दिखा। चिप और AI से जुड़े शेयरों पर यह डर है कि डेमोक्रेट नियंत्रण वाली कांग्रेस अमेरिका में AI निवेश की रफ्तार धीमी कर सकती है।
विदेशी निवेशकों की वापसी
बाजार को विदेशी निवेशकों से भी सहारा मिल रहा है। 3 नवंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने करीब 6,837 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब 3,679 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। नवंबर की शुरुआत से विदेशी निवेशक करीब 82.1 करोड़ डॉलर के भारतीय शेयर खरीद चुके हैं। हालांकि इस साल उनकी कुल शुद्ध निकासी अब भी करीब 30.59 अरब डॉलर है।
आज किन स्तरों पर रहेगी नजर
आज सेंसेक्स के साप्ताहिक कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी भी है, इसलिए दिन में उतार चढ़ाव बढ़ सकता है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक Nifty अगर 24,000 के ऊपर टिकता है तो 24,250 से 24,300 के स्तर खुल सकते हैं, जबकि नीचे की ओर 23,800 का स्तर सहारा बन सकता है। Nifty Bank के लिए 56,000 का स्तर अहम है। इसके ऊपर जाने पर 56,500 तक तेजी संभव है, जबकि 55,300 से 55,500 का दायरा सहारे का काम कर सकता है।
हालांकि कई जानकार यह भी कह रहे हैं कि गैप अप शुरुआत के बाद यह तेजी कितनी टिकेगी, यह देखना होगा। SBI सिक्योरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च प्रमुख सनी अग्रवाल के मुताबिक आगे बाजार की दिशा तिमाही नतीजों, कच्चे तेल, पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेश पर निर्भर करेगी। आज IT शेयर, तेल कंपनियां, BSE, लेंसकार्ट और नतीजे देने वाली कंपनियां फोकस में रह सकती हैं।
संवत 2083 में नए शिखर की उम्मीद
दिवाली के साथ शुरू हुए संवत 2083 को लेकर भी बाजार में चर्चा तेज है। कई तकनीकी विश्लेषक मानते हैं कि अगर विदेशी निवेश लौटता रहा और कच्चा तेल नरम रहा तो सेंसेक्स और Nifty इस संवत में नए रिकॉर्ड स्तर छू सकते हैं। फिलहाल दोनों सूचकांक अपने पिछले शिखर से नीचे हैं, इसलिए आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि मौजूदा तेजी कितनी मजबूत है।
बाजार 9:15 बजे खुलेगा। शुरुआती कारोबार के स्तरों और दिनभर के अपडेट के लिए democraticbharatlive.com से जुड़े रहें।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के लिए है, इसे निवेश की सलाह न मानें। शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा है, कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से बात करें।
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स्रोत: Business Standard, The Economic Times, CNBC TV18, Reuters





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