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खरना का प्रसाद: छठ के दूसरे दिन गुड़ की खीर और रोटी कैसे बनती है, नियम, पूजा और 36 घंटे के व्रत की शुरुआत

छठ के दूसरे दिन खरना पर व्रती दिन भर उपवास के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर ग्रहण करते हैं। इसके बाद निर्जला व्रत शुरू होता है। जानिए खरना के प्रसाद की विधि और उससे जुड़े नियम।

छठ में खरना के प्रसाद गुड़ की खीर और रोटी का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • छठ महापर्व का दूसरा दिन खरना कहलाता है। इस दिन व्रती सुबह से निर्जल उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
  • सामग्री: अरवा चावल, दूध, पानी, गुड़ और चाहें तो थोड़े मेवे।
  • गर्म दूध में गुड़ डालने से दूध फट सकता है, इसलिए खीर को थोड़ा ठंडा होने के बाद ही गुड़ मिलाएं।
  • खरना का प्रसाद पड़ोसियों और रिश्तेदारों में बांटा जाता है। लोग व्रती के घर जाकर प्रसाद लेना शुभ मानते हैं।

छठ महापर्व का दूसरा दिन खरना कहलाता है। इस दिन व्रती सुबह से निर्जल उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद अगले दिन की संध्या अर्घ्य और फिर उषा अर्घ्य तक, लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत चलता है। द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए इस बार खरना 14 नवंबर 2026 को है। जानिए खरना का प्रसाद कैसे बनता है।

खरना का अर्थ

खरना को शुद्धि का दिन माना जाता है। नहाय खाय के अगले दिन व्रती तन और मन की शुद्धता के साथ छठी मैया का प्रसाद बनाते हैं। प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही कठिन व्रत का संकल्प शुरू होता है।

मुख्य बातें: छठ में खरना के प्रसाद गुड़ की खीर और रोटी का ग्राफिक
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प्रसाद बनाने की तैयारी

  • रसोई और बर्तनों की अच्छी सफाई
  • कई परिवार इस दिन नया मिट्टी का चूल्हा बनाते हैं
  • ईंधन के लिए आम की सूखी लकड़ी का इस्तेमाल पारंपरिक है
  • पीतल या मिट्टी के बर्तन
  • शहरों में गैस चूल्हे को अच्छी तरह साफ करके भी प्रसाद बनाया जाता है

गुड़ की खीर

सामग्री: अरवा चावल, दूध, पानी, गुड़ और चाहें तो थोड़े मेवे।

1. चावल धोकर कुछ देर भिगो दें

2. दूध में थोड़ा पानी मिलाकर उबालें

3. चावल डालकर धीमी आंच पर पकाएं, बीच-बीच में चलाते रहें

4. चावल पकने के बाद आंच बंद करके थोड़ा ठंडा होने दें

5. गुड़ को कूटकर या थोड़े पानी में घोलकर मिलाएं

गर्म दूध में गुड़ डालने से दूध फट सकता है, इसलिए खीर को थोड़ा ठंडा होने के बाद ही गुड़ मिलाएं।

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रोटी

गेहूं के आटे की रोटी बनाई जाती है, जिस पर घी लगाया जाता है। कई जगह पूड़ी भी बनती है। प्रसाद में नमक का इस्तेमाल नहीं होता।

पूजा और प्रसाद ग्रहण

  • शाम को केले के पत्ते पर खीर, रोटी और केला रखकर छठी मैया को भोग लगाया जाता है
  • व्रती एकांत में, शांत वातावरण में प्रसाद ग्रहण करते हैं
  • कई परिवारों में मान्यता है कि इस समय कोई आवाज न हो
  • इसके बाद परिवार के लोग और मेहमान प्रसाद पाते हैं

प्रसाद बांटना

खरना का प्रसाद पड़ोसियों और रिश्तेदारों में बांटा जाता है। लोग व्रती के घर जाकर प्रसाद लेना शुभ मानते हैं।

नियम

  • प्रसाद बनाते और खाते समय शुद्धता का पूरा ध्यान
  • प्याज-लहसुन और मांसाहार घर में न बने
  • व्रती जमीन पर सोते हैं, कई परिवारों में यह परंपरा है
  • प्रसाद बनाने के लिए गेहूं और चावल को पहले धोकर सुखाया जाता है

व्रती की सेहत

लंबा निर्जला व्रत शरीर पर असर डालता है। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और किसी बीमारी से जूझ रहे लोग व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

क्या खीर चीनी से बन सकती है?

परंपरा में खरना की खीर गुड़ से ही बनती है। चीनी का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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