केंद्र सरकार द्वारा संचालित पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना देश भर में तेजी से अपनी पकड़ बना रही है और इसके लाभार्थियों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इस महत्वपूर्ण सरकारी पहल के माध्यम से नागरिकों को हर महीने 300 यूनिट तक निशुल्क बिजली प्रदान की जा रही है और साथ ही छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए 78,000 रुपये तक की बड़ी सब्सिडी भी दी जा रही है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने हाल ही में जानकारी दी है कि वर्तमान में भारत में हर छह दिन के भीतर एक लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में इस गति को और अधिक बढ़ाया जाएगा जिससे देश के ऊर्जा ढांचे में व्यापक बदलाव आएगा।

रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना में आई अभूतपूर्व तेजी
भारत में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया ने काफी रफ्तार पकड़ ली है। वर्तमान में हर छह दिन में एक लाख घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं। मंत्री ने विश्वास जताया है कि आने वाले कुछ हफ्तों में यह गति और भी तेज हो जाएगी और सरकार हर चार से पांच दिनों के भीतर एक लाख इंस्टॉलेशन का आंकड़ा छूने में सफल होगी। यह तेजी इस बात का प्रमाण है कि लोग पारंपरिक बिजली के बजाय सौर ऊर्जा को अपनाने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
योजना के वित्तीय लाभ और भारी भरकम सब्सिडी का विवरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2024 में इस योजना की शुरुआत की थी जिसका मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को बिजली के भारी बिलों से राहत दिलाना है। इस योजना के लिए सरकार ने 75,000 करोड़ रुपये का विशाल बजट निर्धारित किया है। योजना के तहत लाभार्थियों को अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाने के लिए आने वाले कुल खर्च पर 78,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए सौर ऊर्जा को सुलभ बनाना है। इसके अतिरिक्त, जो परिवार इस योजना का लाभ उठाते हैं, उन्हें हर महीने 300 यूनिट तक बिजली पूरी तरह से मुफ्त मिलती है, जिससे उनकी मासिक बचत में काफी वृद्धि होती है।
ऊर्जा क्षेत्र में विकेंद्रीकरण और संरचनात्मक परिवर्तन
केंद्रीय मंत्री जोशी के अनुसार, भारत का पावर सिस्टम अब धीरे-धीरे विकेंद्रीकृत हो रहा है। पहले बिजली उत्पादन के केंद्र बहुत सीमित और गिने-चुने होते थे, लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है। पारंपरिक पावर प्लांट के साथ-साथ अब आम नागरिक और किसान भी बिजली उत्पादक की भूमिका में आ गए हैं। अब उत्पादन के बिंदु हजारों और लाखों में पहुंच गए हैं क्योंकि हर घर अपनी बिजली खुद बना सकता है। मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि कई किसान और घर अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा कर रहे हैं और उस अतिरिक्त बिजली को डिस्कॉम यानी बिजली वितरण कंपनियों को बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। यह बदलाव देश के पावर लैंडस्केप को पूरी तरह से बदल रहा है।
एक करोड़ घरों के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम और वर्तमान आंकड़े
सरकार ने इस योजना के तहत 31 मार्च, 2027 तक एक करोड़ घरों को कवर करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। नेशनल पोर्टल फॉर रूफटॉप सोलर पर उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2 नवंबर तक इस योजना के लिए 88.3 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 55.3 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि अब तक 65.4 लाख से ज्यादा घर इस योजना के माध्यम से रोशन हो रहे हैं। मंत्री ने भरोसा जताया है कि सरकार अपने तय किए गए माइलस्टोन को समय पर पूरा करेगी और निर्धारित लक्ष्य को हासिल कर लेगी।
सर्दियों के मौसम में बिजली बिल से बड़ी राहत
वर्तमान में जब देश के कई हिस्सों में सर्दी ने दस्तक दे दी है, घरों में गीजर और रूम हीटर जैसे भारी बिजली खपत वाले उपकरणों का उपयोग बढ़ गया है। आमतौर पर इन उपकरणों के इस्तेमाल से बिजली का बिल काफी बढ़ जाता है, जो आम आदमी के लिए चिंता का विषय होता है। हालांकि, जिन परिवारों ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर पैनल लगवाए हैं, वे इन उपकरणों का उपयोग बिना किसी वित्तीय तनाव के कर पा रहे हैं। सौर ऊर्जा के कारण उनका बिजली बिल शून्य या बहुत कम आ रहा है, जिससे उन्हें सर्दी के मौसम में भी आर्थिक बोझ महसूस नहीं हो रहा है। यह योजना न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि आम जनता की जेब पर पड़ने वाले बोझ को भी कम कर रही है।
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स्रोत: Aaj Tak





