इनकम टैक्स की बात होते ही HUF शब्द अक्सर सुनने को मिलता है। कई लोग इसे टैक्स बचाने का तरीका मानते हैं, लेकिन यह असल में एक कानूनी व्यवस्था है जिसकी जड़ें हिंदू पारिवारिक कानून में हैं। HUF यानी हिंदू अविभाजित परिवार को आयकर कानून में व्यक्ति से अलग एक करदाता माना जाता है। इसका मतलब है कि HUF की आय पर अलग से टैक्स का हिसाब होता है और इसका अपना PAN और अलग इनकम टैक्स रिटर्न होता है।
HUF क्या है
हिंदू अविभाजित परिवार एक ऐसा परिवार है जिसमें एक ही पूर्वज के वंशज, उनकी पत्नियां और अविवाहित बेटियां शामिल होते हैं। हिंदू कानून के तहत यह व्यवस्था हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध परिवारों पर लागू होती है। आयकर विभाग की जानकारी के अनुसार HUF को किसी अनुबंध के जरिये नहीं बनाया जा सकता। यह परिवार के ढांचे से अपने आप अस्तित्व में आता है। व्यवहार में शादी के बाद पति, पत्नी और बच्चों वाला परिवार HUF के रूप में अपनी पहचान दर्ज करा सकता है।

कर्ता कौन होता है
HUF का प्रबंधन करने वाला व्यक्ति कर्ता कहलाता है। परंपरागत रूप से परिवार का सबसे बड़ा पुरुष सदस्य कर्ता होता था। कर्ता परिवार की ओर से संपत्ति का प्रबंधन करता है, बैंक खाते चलाता है और HUF की ओर से टैक्स संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करता है। HUF के PAN आवेदन पर भी कर्ता ही हस्ताक्षर करता है।
सहदायिक और सदस्य में अंतर
HUF में दो तरह के लोग होते हैं: सहदायिक यानी कोपार्सनर और सदस्य। सहदायिक वे होते हैं जिनका जन्म से HUF की संपत्ति में हिस्सा होता है और जो बंटवारे की मांग कर सकते हैं। सदस्यों में परिवार के वे लोग आते हैं जिन्हें भरण-पोषण का अधिकार तो होता है, लेकिन बंटवारे की मांग का अधिकार नहीं होता, जैसे परिवार में ब्याहकर आई पत्नियां।
यह भी पढ़ें: दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग क्या है: परंपरा, विशेष सत्र के नियम और नए निवेशकों के लिए सावधानियां | FD और RD में क्या फर्क है: किसमें कैसे जमा होता है पैसा, ब्याज, टैक्स और DICGC बीमा की जानकारी
2005 के बाद बेटियों के अधिकार
हिंदू उत्तराधिकार कानून में 2005 के संशोधन के बाद बेटियों को भी बेटों के बराबर सहदायिक का दर्जा मिल गया। इसका मतलब है कि बेटी भी जन्म से HUF की संपत्ति में हिस्सेदार होती है और शादी के बाद भी अपने पिता के HUF में सहदायिक बनी रहती है। इस बदलाव के बाद एक महिला सहदायिक भी कर्ता बन सकती है।
HUF का PAN कैसे बनता है
आयकर विभाग के दस्तावेजों के अनुसार HUF के PAN के लिए आवेदन फॉर्म 49A के जरिये किया जाता है, जिस पर कर्ता हस्ताक्षर करता है। इसके साथ आमतौर पर ये दस्तावेज लगते हैं:
- कर्ता की पहचान, पते और जन्मतिथि का प्रमाण
- कर्ता का शपथपत्र, जिसमें सभी सहदायिकों के नाम, उनके पिता के नाम और पते दर्ज हों
PAN मिलने के बाद HUF के नाम से बैंक खाता खोला जा सकता है और इसकी आय उसी खाते में रखी जाती है।
HUF की आय कहां से आती है
HUF को पुश्तैनी संपत्ति, परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों से मिले उपहार, वसीयत में मिली संपत्ति या HUF की पूंजी से किए गए निवेश से आय हो सकती है। इस आय पर HUF के नाम से टैक्स का हिसाब होता है। ध्यान रखें कि किसी सदस्य द्वारा अपनी निजी आय या संपत्ति HUF में डालने पर उससे होने वाली आय को टैक्स कानून के तहत उसी सदस्य की आय में जोड़ा जा सकता है। इसलिए HUF में पैसा लाने का तरीका सोच-समझकर और विशेषज्ञ की सलाह से तय करना चाहिए।
टैक्स में HUF का क्या फायदा
चूंकि HUF एक अलग करदाता है, इसलिए इसे अलग से बेसिक छूट सीमा और स्लैब का लाभ मिलता है। इससे परिवार की कुल आय अलग-अलग करदाताओं में बंट सकती है। पुरानी कर व्यवस्था चुनने पर HUF कुछ कटौतियों का दावा कर सकता है, जबकि नई कर व्यवस्था में ज्यादातर कटौतियां नहीं मिलतीं। कौन सी व्यवस्था बेहतर है, यह आय और निवेश पर निर्भर करता है।
HUF की कुछ सीमाएं
HUF बनाना आसान है, लेकिन इसे खत्म करना या बंटवारा करना जटिल हो सकता है। HUF की संपत्ति पर सभी सहदायिकों का अधिकार होता है, इसलिए किसी एक व्यक्ति की मर्जी से इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता। परिवार में विवाद की स्थिति में मामला कानूनी पेचीदगियों में फंस सकता है। आयकर कानून में पूर्ण बंटवारे के लिए भी तय प्रक्रिया है।
क्या अविवाहित व्यक्ति HUF बना सकता है
आमतौर पर HUF के लिए परिवार यानी कम से कम दो सदस्य जरूरी माने जाते हैं, इसलिए आमतौर पर इसे शादी के बाद बनाया जाता है।
क्या बेटी HUF की कर्ता बन सकती है
2005 के संशोधन के बाद बेटियां सहदायिक हैं और महिला सहदायिक भी कर्ता बन सकती है।
सलाह लें: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। HUF बनाने या टैक्स योजना से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या कर विशेषज्ञ से सलाह लें।
स्रोत: Income Tax Department: HUF, Income Tax Department: Documents required for PAN





