एक समय था जब देश में खबरें, क्रिकेट कमेंट्री, फिल्मी गीत और नाटक सब कुछ रेडियो के जरिये ही घरों तक पहुंचता था। सुबह की शुरुआत आकाशवाणी की धुन से होती थी और शाम को परिवार रेडियो के पास बैठकर समाचार सुनता था। सरकारी प्रसारक आकाशवाणी का यह सफर लगभग सौ साल पुराना है। प्रसार भारती की जानकारी के आधार पर जानिए इसके अहम पड़ाव।
1927: इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी
प्रसार भारती के अनुसार भारत में संगठित रेडियो प्रसारण की शुरुआत 23 जुलाई 1927 को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी यानी IBC के साथ हुई। यह एक निजी कंपनी थी, जिसने बंबई और कलकत्ता से प्रसारण शुरू किया। इसी दिन की याद में 23 जुलाई को राष्ट्रीय प्रसारण दिवस मनाया जाता है। हालांकि यह कंपनी आर्थिक दिक्कतों में फंस गई और मार्च 1930 में इसका परिसमापन हो गया।

1930: सरकार के हाथ में प्रसारण
कंपनी बंद होने के बाद सरकार ने प्रसारण अपने हाथ में ले लिया। अप्रैल 1930 से इसे इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस के नाम से चलाया जाने लगा। यह वह दौर था जब रेडियो सेट महंगे थे और ज्यादातर शहरों तक ही सीमित थे।
1936: ऑल इंडिया रेडियो
प्रसार भारती के अनुसार 8 जून 1936 को इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस का नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो कर दिया गया। इसके बाद देश के अलग-अलग शहरों में रेडियो केंद्र खुलने लगे। आजादी के समय देश में गिने-चुने रेडियो स्टेशन थे। स्वतंत्रता के बाद इनका तेजी से विस्तार हुआ और रेडियो देश के कोने-कोने तक पहुंचा।
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आकाशवाणी नाम कैसे पड़ा
ऑल इंडिया रेडियो को 1956 से आकाशवाणी नाम से पुकारा जाने लगा। आकाशवाणी का अर्थ है आकाश से आने वाली वाणी। यह नाम भारतीय परंपरा से जुड़ा होने के कारण जल्दी लोकप्रिय हो गया। प्रसार भारती अधिनियम में भी आकाशवाणी शब्द का इस्तेमाल पुराने ऑल इंडिया रेडियो के कार्यालयों और केंद्रों के लिए किया गया है। 2023 में आकाशवाणी के महानिदेशक ने निर्देश दिया था कि कानून के अनुरूप प्रसारण में आकाशवाणी नाम का ही इस्तेमाल हो।
1957: विविध भारती
प्रसार भारती के अनुसार 1957 में विविध भारती सेवा शुरू हुई, जिसका शुरुआती फोकस फिल्मी संगीत पर था। फिल्मी गीतों के कार्यक्रम, फरमाइशी गीत और मनोरंजन से भरपूर प्रस्तुतियों ने विविध भारती को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद विज्ञापन प्रसारण की शुरुआत ने भी रेडियो को आर्थिक मजबूती दी।
रेडियो ने कैसे जोड़ा देश
आकाशवाणी ने समाचार, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और मनोरंजन हर क्षेत्र में भूमिका निभाई। किसानों के लिए खेती से जुड़े कार्यक्रम, छात्रों के लिए शैक्षिक प्रसारण, क्षेत्रीय भाषाओं में समाचार और लोक संगीत के कार्यक्रमों ने रेडियो को आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बना दिया। युद्ध, आपदा और राष्ट्रीय संकट के समय आकाशवाणी भरोसेमंद सूचना का सबसे बड़ा स्रोत रहा। क्रिकेट कमेंट्री सुनने के लिए लोग ट्रांजिस्टर कान से लगाए घूमते थे, यह दृश्य कई पीढ़ियों की यादों में बसा है।
1997: प्रसार भारती
1997 में प्रसार भारती का गठन हुआ, जो देश का सार्वजनिक सेवा प्रसारक है। आकाशवाणी और दूरदर्शन इसके दो अंग बने। इसका मकसद सरकारी प्रसारण को एक स्वायत्त निकाय के जरिये चलाना था, ताकि सार्वजनिक हित में सूचना, शिक्षा और मनोरंजन की जिम्मेदारी बेहतर ढंग से निभाई जा सके।
आज की आकाशवाणी
आज आकाशवाणी का नेटवर्क देश के बड़े हिस्से और आबादी तक पहुंचता है। FM रेडियो, क्षेत्रीय केंद्र और विदेश प्रसारण सेवा इसके अहम हिस्से हैं। प्रधानमंत्री का मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात भी आकाशवाणी पर प्रसारित होता है, जो 2014 से चल रहा है। डिजिटल दौर में आकाशवाणी ने न्यूज ऑन एयर ऐप, पॉडकास्ट और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के जरिये नए श्रोताओं तक पहुंचने की कोशिश की है।
आकाशवाणी की प्रमुख सेवाएं
आकाशवाणी कई तरह की सेवाओं के जरिये श्रोताओं तक पहुंचती है:
- प्राइमरी चैनल: राज्यों और क्षेत्रों के केंद्र, जो स्थानीय भाषाओं में समाचार, लोक संगीत, कृषि और सामाजिक कार्यक्रम प्रसारित करते हैं।
- विविध भारती: फिल्मी संगीत और मनोरंजन आधारित सेवा।
- FM गोल्ड और FM रेनबो: शहरी श्रोताओं के लिए संगीत, समाचार और समसामयिक कार्यक्रम।
- समाचार सेवा प्रभाग: हिंदी, अंग्रेजी और कई भारतीय भाषाओं में नियमित समाचार बुलेटिन।
- विदेश प्रसारण सेवा: दुनिया के दूसरे देशों में बसे श्रोताओं और प्रवासी भारतीयों के लिए कई भाषाओं में कार्यक्रम।
रेडियो की ताकत आज भी कायम
टीवी, मोबाइल और इंटरनेट के दौर में भी रेडियो की अहमियत खत्म नहीं हुई है। बिजली या इंटरनेट न होने पर भी बैटरी वाला रेडियो काम करता है, इसलिए बाढ़, चक्रवात और भूकंप जैसी आपदाओं में यह सूचना का सबसे भरोसेमंद साधन बना रहता है। दूर-दराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में लोग खबरों और मनोरंजन के लिए रेडियो पर निर्भर हैं। ड्राइविंग करते समय और खेतों में काम करते हुए रेडियो सुनने की आदत भी इसे प्रासंगिक बनाए रखती है।
आकाशवाणी की शुरुआत कब हुई
भारत में संगठित रेडियो प्रसारण 23 जुलाई 1927 को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी से शुरू हुआ। 8 जून 1936 को इसका नाम ऑल इंडिया रेडियो पड़ा।
राष्ट्रीय प्रसारण दिवस कब मनाया जाता है
हर साल 23 जुलाई को, क्योंकि इसी दिन 1927 में इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी ने प्रसारण शुरू किया था।
स्रोत: Prasar Bharati: Growth & Development, Prasar Bharati: Akashvani





