हर आम चुनाव के बाद जब नई लोकसभा गठित होती है, तो उसके पहले सत्र में सबसे पहले एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो सदन की कार्यवाही चला सके। उस समय सदन का कोई अध्यक्ष नहीं होता, क्योंकि अध्यक्ष का चुनाव नए सांसदों को ही करना होता है। इस खाली समय में सदन की जिम्मेदारी संभालने वाले को प्रोटेम स्पीकर कहा जाता है। प्रो टेम लैटिन शब्द प्रो टेम्पोर का छोटा रूप है, जिसका अर्थ है कुछ समय के लिए।
संविधान क्या कहता है
संविधान में प्रोटेम स्पीकर शब्द का सीधा उल्लेख नहीं है। इसका आधार अनुच्छेद 95(1) माना जाता है। इसके अनुसार जब अध्यक्ष का पद खाली हो और उपाध्यक्ष का पद भी खाली हो, तो अध्यक्ष के कर्तव्यों का पालन लोकसभा का वह सदस्य करेगा जिसे राष्ट्रपति इस काम के लिए नियुक्त करें। नई लोकसभा के गठन के समय ठीक यही स्थिति होती है, क्योंकि पिछली लोकसभा भंग होने के साथ नए सदन में न अध्यक्ष होता है और न उपाध्यक्ष।
संविधान के अनुच्छेद 99 के तहत हर सांसद को अपनी सीट ग्रहण करने से पहले राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के सामने शपथ लेनी होती है। इसी व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति प्रोटेम स्पीकर को शपथ दिलाते हैं और फिर प्रोटेम स्पीकर बाकी सांसदों को शपथ दिलाते हैं।

प्रोटेम स्पीकर के मुख्य काम
- नई लोकसभा की पहली बैठकों की अध्यक्षता करना।
- नवनिर्वाचित सांसदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाना।
- लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया संपन्न कराना।
नया अध्यक्ष चुने जाते ही प्रोटेम स्पीकर की भूमिका खत्म हो जाती है और वह एक सामान्य सदस्य के रूप में सदन में बैठता है। आमतौर पर प्रोटेम स्पीकर की मदद के लिए कुछ और सदस्यों का एक पैनल भी नियुक्त किया जाता है, जो शपथ ग्रहण के दौरान अध्यक्षता में सहयोग करता है।
किसे बनाया जाता है प्रोटेम स्पीकर
संविधान यह नहीं बताता कि किस सांसद को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाए। संसदीय परंपरा यह रही है कि सबसे लंबे समय तक सांसद रहे सदस्य, यानी वरिष्ठतम सदस्य, को इस पद के लिए चुना जाए। संसदीय कार्य मंत्रालय वरिष्ठ सदस्यों की सूची तैयार करता है और सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं। लेकिन यह सिर्फ परंपरा है, कोई बाध्यकारी नियम नहीं।
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2024 का उदाहरण
2024 में 18वीं लोकसभा के गठन के समय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा के कटक से सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया था। उन्होंने नए सांसदों को शपथ दिलाई और ओम बिरला के अध्यक्ष चुने जाने तक सदन की अध्यक्षता की। इस नियुक्ति पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे, क्योंकि उनके मुताबिक आठ बार के सांसद के. सुरेश वरिष्ठता के आधार पर इस पद के हकदार थे। सरकार का कहना था कि महताब लगातार सात बार सांसद रहे हैं। यह विवाद दिखाता है कि परंपरा और नियम के बीच की यह जगह कभी-कभी राजनीतिक बहस का कारण बन जाती है।
राज्यों की विधानसभाओं में भी यही व्यवस्था
नई विधानसभा के गठन के समय राज्यों में भी प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किए जाते हैं। संविधान का अनुच्छेद 180 विधानसभाओं के लिए ऐसी ही व्यवस्था करता है, जिसमें राज्यपाल नियुक्ति करते हैं। कई बार राज्यों में सरकार गठन और बहुमत परीक्षण जैसे संवेदनशील मौकों पर प्रोटेम स्पीकर की भूमिका काफी अहम हो जाती है। कुछ मामलों में अदालतों ने भी बहुमत परीक्षण के लिए प्रोटेम स्पीकर की देखरेख में कार्यवाही कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रोटेम स्पीकर और लोकसभा अध्यक्ष में अंतर
- लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव सदन करता है, जबकि प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
- अध्यक्ष पूरे कार्यकाल के लिए चुना जाता है, जबकि प्रोटेम स्पीकर की भूमिका कुछ ही दिनों की होती है।
- अध्यक्ष के पास सदन से जुड़े व्यापक अधिकार होते हैं, जबकि प्रोटेम स्पीकर का काम मुख्य रूप से शपथ और अध्यक्ष का चुनाव कराना होता है।
क्यों जरूरी है यह पद
लोकतंत्र में सदन का कामकाज बिना रुकावट चलते रहना जरूरी है। प्रोटेम स्पीकर की व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि नई लोकसभा के पहले दिन से ही कार्यवाही नियमों के तहत चले और सांसद शपथ लेकर अपना कामकाज शुरू कर सकें।
प्रोटेम स्पीकर कितने दिन पद पर रहते हैं
प्रोटेम स्पीकर की भूमिका तब तक रहती है जब तक सदन नया अध्यक्ष नहीं चुन लेता। आमतौर पर यह कुछ ही दिनों की होती है।
प्रोटेम स्पीकर को शपथ कौन दिलाता है
लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर को राष्ट्रपति शपथ दिलाते हैं। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर नए सांसदों को शपथ दिलाते हैं।
प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति कौन करता है
लोकसभा के लिए राष्ट्रपति और विधानसभा के लिए राज्यपाल प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति करते हैं।
क्या प्रोटेम स्पीकर हमेशा सबसे वरिष्ठ सांसद होता है
परंपरा यही रही है, लेकिन संविधान में ऐसा कोई बाध्यकारी नियम नहीं है।
स्रोत: Constitution of India (Legislative Department), The Hindu: Bhartruhari Mahtab appointed pro tem Speaker of Lok Sabha





