छठ महापर्व चार दिन चलता है, और इसका अंतिम चरण उषा अर्घ्य है। इस दिन व्रती भोर में घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद ही वे खरना की शाम से चल रहा निर्जला व्रत खोलते हैं, जिसे पारण कहते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए इस बार संध्या अर्घ्य 15 नवंबर और उषा अर्घ्य 16 नवंबर 2026 को है। सूर्योदय का समय शहर के हिसाब से अलग होता है, इसलिए अपने शहर का समय पंचांग में देखें। जानिए उषा अर्घ्य और पारण की विधि।
उगते सूर्य को अर्घ्य क्यों
छठ इकलौता बड़ा पर्व माना जाता है, जिसमें डूबते और उगते दोनों सूर्य की पूजा होती है। संध्या अर्घ्य जीवन के हर चरण के सम्मान और उषा अर्घ्य नई शुरुआत और आशा का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि छठी मैया संतान की रक्षा और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद देती हैं।

रात की तैयारी
- संध्या अर्घ्य के बाद कई परिवार घर पर या घाट पर ही रात बिताते हैं
- कई जगह रात में कोसी भरने की परंपरा है, जिसमें गन्ने के डंठलों से मंडप बनाकर दीप जलाए जाते हैं
- सूप और दउरा का प्रसाद फिर से सजाया जाता है, ताजे फल रखे जाते हैं
- भोर से पहले घाट पहुंचने की तैयारी रात में ही कर लें
अर्घ्य की विधि
1. व्रती सूर्योदय से पहले स्नान करके पानी में खड़े होते हैं
2. पूर्व दिशा की ओर मुंह करके सूर्य के उगने का इंतजार किया जाता है
3. सूर्य दिखने पर सूप में प्रसाद रखकर सूर्य देव को दिखाया जाता है
4. परिवार के सदस्य लोटे से दूध और जल का अर्घ्य देते हैं
5. व्रती छठी मैया और सूर्य देव से परिवार की मंगल कामना करते हैं
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घाट पर प्रसाद
अर्घ्य के बाद व्रती घाट पर ही प्रसाद बांटते हैं। लोग व्रती के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और ठेकुआ व फल का प्रसाद ग्रहण करते हैं। छठ का प्रसाद मांगकर लेना भी शुभ माना जाता है।
पारण कैसे होता है
- घर लौटकर व्रती पूजा स्थान पर प्रणाम करते हैं
- पारण आमतौर पर अदरक, गुड़ या प्रसाद के टुकड़े और पानी या शरबत से किया जाता है
- इसके बाद हल्का भोजन लिया जाता है
- परिवार की परंपरा के अनुसार पारण का भोजन अलग-अलग होता है
सेहत का ध्यान
लगभग 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद एक साथ बहुत ज्यादा पानी या भारी खाना न लें। धीरे-धीरे तरल और फिर हल्का भोजन लें। चक्कर या कमजोरी लगे तो डॉक्टर से संपर्क करें।
ठंड में सावधानी
नवंबर की सुबह ठंडी होती है। पानी से निकलते ही व्रती को सूखे और गर्म कपड़े पहनाएं। बच्चों और बुजुर्गों को भी गर्म कपड़ों में लाएं।
अगर सूर्य बादलों में छिपा हो?
परंपरा के अनुसार सूर्योदय के तय समय पर पूर्व दिशा की ओर अर्घ्य दिया जाता है, भले बादल हों।
स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





