खरीफ की प्रमुख तिलहन फसल मूंगफली की कटाई और बिक्री का मौसम चल रहा है। ऐसे में किसानों के लिए सबसे अहम सवाल यह होता है कि उन्हें फसल का सही दाम कैसे मिले। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP घोषित किया है, जिसमें मूंगफली भी शामिल है। इस लेख में जानिए मूंगफली MSP कितना है, इसमें कितनी बढ़ोतरी हुई और मंडी में फसल बेचने से पहले किन बातों का ध्यान रखें।
मूंगफली MSP 2026-27 कितना है
PIB और DD News की जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए मूंगफली का MSP 7517 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। पिछले सीजन में यह 7263 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी इस बार मूंगफली के MSP में 254 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

MSP का मतलब क्या है
न्यूनतम समर्थन मूल्य वह दाम है जिसे सरकार किसी फसल के लिए न्यूनतम कीमत के तौर पर घोषित करती है। इसका मकसद है कि बाजार में दाम बहुत गिरने पर भी किसानों को एक तय कीमत का भरोसा मिले। MSP कृषि लागत और मूल्य आयोग यानी CACP की सिफारिशों के आधार पर तय होता है। ध्यान रहे कि MSP की घोषणा का मतलब यह नहीं कि हर मंडी में व्यापारी इसी दाम पर खरीदेंगे। सरकारी खरीद तय केंद्रों और तय नियमों के तहत होती है।
मंडी भाव और MSP में अंतर
मंडी भाव रोज बदलता है और मांग, आवक, गुणवत्ता और तेल उद्योग की खरीद जैसे कारणों पर निर्भर करता है। कई बार मंडी भाव MSP से ऊपर रहता है, तो कई बार नीचे। जब मंडी भाव MSP से नीचे जाता है, तब सरकारी खरीद केंद्र किसानों के लिए अहम हो जाते हैं। इसलिए फसल बेचने से पहले अपने इलाके की मंडी का ताजा भाव और सरकारी खरीद की स्थिति दोनों जान लेना फायदेमंद है।
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मूंगफली कहां ज्यादा होती है
भारत में मूंगफली मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में उगाई जाती है। यह खरीफ और कुछ इलाकों में रबी व गर्मी के मौसम में भी बोई जाती है। मूंगफली से तेल निकाला जाता है और इसके दाने सीधे खाने, नमकीन और मिठाइयों में इस्तेमाल होते हैं। मूंगफली की खली पशु आहार के रूप में काम आती है।
मंडी में बेचने से पहले तैयारी
- फलियों को अच्छी तरह सुखाएं। ज्यादा नमी वाली मूंगफली के दाम कम मिलते हैं और भंडारण में खराब होने का खतरा रहता है।
- मिट्टी, कंकड़ और खराब फलियों को अलग कर दें। साफ माल की कीमत बेहतर मिलती है।
- अलग-अलग किस्म और आकार की फलियों को मिलाकर न बेचें, क्योंकि ग्रेडिंग के आधार पर दाम तय होते हैं।
- बेचने से पहले आसपास की दो-तीन मंडियों का भाव पता करें।
- सरकारी खरीद के लिए अपने राज्य के पोर्टल या कृषि विभाग में पंजीकरण की प्रक्रिया और समय सीमा पहले ही पता कर लें।
भंडारण में सावधानी
अगर तुरंत दाम अच्छा न मिल रहा हो और किसान कुछ समय रुककर बेचना चाहे, तो सही भंडारण जरूरी है। मूंगफली को सूखी, हवादार और नमी से बची जगह पर रखें। बोरियों को सीधे जमीन पर न रखें, नीचे लकड़ी के तख्ते या पॉलीथिन बिछाएं। नमी लगने पर मूंगफली में फफूंद लग सकती है, जिससे उसकी गुणवत्ता और दाम दोनों प्रभावित होते हैं।
e-NAM और ऑनलाइन जानकारी
कई मंडियां राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी e-NAM से जुड़ी हैं। किसान e-NAM पोर्टल और ऐप पर जुड़ी मंडियों के भाव देख सकते हैं। इसके अलावा राज्य के कृषि विपणन बोर्ड की वेबसाइट पर भी मंडियों के भाव उपलब्ध होते हैं। फसल ले जाने से पहले यह जानकारी देखने से सही मंडी चुनने में मदद मिलती है।
दूसरी तिलहन फसलों का हाल
सरकार ने खरीफ 2026-27 के लिए दूसरी तिलहन फसलों जैसे सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल का MSP भी घोषित किया है। हर फसल का MSP PIB की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में देखा जा सकता है। तिलहन में आत्मनिर्भरता सरकार की प्राथमिकताओं में है, क्योंकि भारत खाद्य तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
किसानों के लिए जरूरी सुझाव
फसल बेचने में जल्दबाजी करने के बजाय पहले यह देखें कि आपके इलाके में सरकारी खरीद शुरू हुई है या नहीं और उसकी शर्तें क्या हैं। जमीन के कागजात, आधार, बैंक खाते का ब्योरा और फसल पंजीकरण की रसीद जैसे दस्तावेज पहले से तैयार रखें, ताकि खरीद केंद्र पर देरी न हो। मंडी में बिक्री के बाद पक्की पर्ची या रसीद जरूर लें। भुगतान बैंक खाते में आने तक उस रसीद को संभालकर रखें। अगर किसी खरीद केंद्र या मंडी में तय नियमों का पालन नहीं हो रहा है, तो मंडी समिति या कृषि विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत की जा सकती है।
मूंगफली MSP 2026-27 कितना है
7517 रुपये प्रति क्विंटल।
पिछले साल से कितनी बढ़ोतरी हुई
254 रुपये प्रति क्विंटल, क्योंकि पिछला MSP 7263 रुपये था।
सलाह लें: फसल बेचने या भंडारण का फैसला करने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग या मंडी समिति से ताजा जानकारी जरूर लें।
स्रोत: PIB: Cabinet approves MSP for Kharif Crops for Marketing Season 2026-27, DD News: Cabinet approves higher MSP for 14 Kharif crops





