छठ महापर्व की पहचान उसके लोकगीत भी हैं। नहाय खाय से उषा अर्घ्य तक, प्रसाद बनाते समय, दउरा सिर पर रखकर घाट जाते समय और पानी में खड़े होकर अर्घ्य देते समय महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं। इस बार छठ 13 से 16 नवंबर 2026 तक है। जानिए छठ गीतों की लोक परंपरा और उनका भाव।
किन भाषाओं में
छठ गीत मुख्य रूप से भोजपुरी, मैथिली, मगही और अंगिका में गाए जाते हैं। ये बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक बोलियां हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी ये गीत मौखिक परंपरा से आगे बढ़े हैं, यानी मां और दादी से बेटियों और बहुओं तक।

गीतों के विषय
- **सूर्य देव की आराधना:** सूर्य से जल्दी उगने और दर्शन देने की विनती
- **छठी मैया से प्रार्थना:** संतान, परिवार की खुशहाली और सुहाग की कामना
- **प्रसाद और तैयारी:** केला, नारियल, ठेकुआ, सूप और दउरा का वर्णन
- **घाट की यात्रा:** बहंगी उठाकर घाट जाने का वर्णन
- **परदेस गए बेटे का इंतजार:** कई गीतों में घर लौटने की पुकार दिखती है
घाट पर जाते गीत
दउरा या बहंगी को सिर या कंधे पर उठाकर घाट जाने का दृश्य छठ की सबसे जानी-पहचानी छवियों में है। इस समय गाए जाने वाले गीतों में बहंगी के लचकने और रास्ते की कठिनाई का वर्णन मिलता है, जो व्रत की तपस्या को दिखाता है।
यह भी पढ़ें: छठ पूजा 2026: 13 से 16 नवंबर तक महापर्व, जानें नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य का समय | उषा अर्घ्य और पारण: छठ के चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने की विधि, घाट की तैयारी और व्रत खोलने का तरीका
अर्घ्य के समय
संध्या और उषा अर्घ्य के समय गाए जाने वाले गीतों में सूर्य देव से प्रार्थना होती है। भोर के गीतों में सूर्य से जल्दी उगने की विनती की जाती है, क्योंकि व्रती ठंडे पानी में खड़े होकर इंतजार करते हैं।
गीतों का सामाजिक भाव
छठ गीतों में जाति या वर्ग का भेद नहीं दिखता। घाट पर हर कोई एक साथ गाता है। इन गीतों में प्रकृति, नदी, सूर्य और खेती के प्रति कृतज्ञता है। ये गीत परदेस में बसे पूर्वांचल के लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
शारदा सिन्हा की विरासत
लोक गायिका शारदा सिन्हा ने छठ गीतों को रेडियो, कैसेट और फिर डिजिटल माध्यम से घर-घर पहुंचाया। उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनके गाए छठ गीत आज भी इस पर्व पर सबसे ज्यादा बजने वाले गीतों में हैं। उनके अलावा कई लोक गायकों ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाया है।
नई पीढ़ी के लिए
शहरों में रहने वाले कई परिवारों में ये गीत अब कम गाए जाते हैं। घर के बड़ों से गीत सीखना, उन्हें रिकॉर्ड करना और बच्चों को उनका अर्थ बताना इस परंपरा को जिंदा रखने का अच्छा तरीका है।
ध्यान रखें
घाट पर तेज आवाज में स्पीकर बजाने से बुजुर्गों और आसपास के लोगों को परेशानी होती है। प्रशासन के ध्वनि नियमों का पालन करें।
क्या छठ गीत किसी किताब में संकलित हैं?
कई लोक संस्कृति संस्थानों और शोधकर्ताओं ने छठ गीतों का संकलन किया है। सबसे जीवंत स्रोत आज भी घर की बुजुर्ग महिलाएं हैं।
स्रोत: संगीत नाटक अकादमी, बिहार पर्यटन। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





