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अपडेटेड रिटर्न ITR-U: गलती सुधारने के लिए अब 48 महीने का समय, जानिए कितना अतिरिक्त टैक्स देना होगा

इनकम टैक्स रिटर्न में आय छूट गई या रिटर्न भरना भूल गए? अपडेटेड रिटर्न यानी ITR-U से गलती सुधारी जा सकती है, लेकिन अतिरिक्त टैक्स के साथ।

कैलकुलेटर, टैक्स फॉर्म और लैपटॉप का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय कई बार कोई आय छूट जाती है, जैसे बचत खाते या FD का ब्याज, पुराना किराया या कोई दूसरी कमाई।
  • अपडेटेड रिटर्न मुफ्त नहीं है। इसमें बकाया टैक्स और ब्याज के जोड़ पर अतिरिक्त टैक्स देना होता है, जो देरी के साथ बढ़ता है:
  • अपडेटेड रिटर्न हर स्थिति में नहीं भरी जा सकती। सामान्य तौर पर इससे टैक्स देनदारी कम नहीं की जा सकती, न ही रिफंड बढ़ाया या नया रिफंड मांगा जा सकता।
  • आयकर अधिनियम 2025 के लागू होने के बाद कई धाराओं के नंबर और कुछ प्रक्रियाएं बदली हैं।

इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय कई बार कोई आय छूट जाती है, जैसे बचत खाते या FD का ब्याज, पुराना किराया या कोई दूसरी कमाई। कई लोग समय पर रिटर्न भरना ही भूल जाते हैं और बिलेटेड रिटर्न की तारीख भी निकल जाती है। ऐसे लोगों के लिए आयकर कानून में अपडेटेड रिटर्न यानी ITR-U का विकल्प है। इससे करदाता खुद आगे आकर अपनी आय की जानकारी सुधार सकते हैं, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है। आइए समझते हैं कि ITR-U क्या है और इसके नियम क्या हैं।

अपडेटेड रिटर्न क्या है

अपडेटेड रिटर्न की व्यवस्था करदाताओं को अपनी पहले भरी गई रिटर्न में छूटी आय जोड़ने या रिटर्न न भरने की स्थिति में बाद में रिटर्न भरने का मौका देती है। इसका मकसद स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना और मुकदमेबाजी कम करना है। यह सुविधा तब काम आती है जब सामान्य रिटर्न, बिलेटेड रिटर्न और संशोधित रिटर्न भरने की समय सीमा निकल चुकी हो।

मुख्य बातें: कैलकुलेटर, टैक्स फॉर्म और लैपटॉप का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

अब 48 महीने का समय

आयकर विभाग की जानकारी के अनुसार वित्त अधिनियम 2025 ने अपडेटेड रिटर्न भरने की समय सीमा 24 महीने से बढ़ाकर 48 महीने कर दी है। यह समय संबंधित असेसमेंट ईयर के खत्म होने से गिना जाता है। यानी अब करदाताओं के पास अपनी गलती सुधारने के लिए पहले से दोगुना समय है।

कितना अतिरिक्त टैक्स देना होगा

अपडेटेड रिटर्न मुफ्त नहीं है। इसमें बकाया टैक्स और ब्याज के जोड़ पर अतिरिक्त टैक्स देना होता है, जो देरी के साथ बढ़ता है:

  • असेसमेंट ईयर खत्म होने के 12 महीने के भीतर: 25%
  • 12 से 24 महीने के बीच: 50%
  • 24 से 36 महीने के बीच: 60%
  • 36 से 48 महीने के बीच: 70%

इसका मतलब है कि गलती जितनी जल्दी सुधारी जाए, उतना कम अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

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उदाहरण से समझें

मान लीजिए किसी व्यक्ति की छूटी आय पर टैक्स और ब्याज मिलाकर 20,000 रुपये बनते हैं। अगर वह 12 महीने के भीतर अपडेटेड रिटर्न भरता है, तो उसे 25% यानी 5,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे, यानी कुल 25,000 रुपये। अगर वही रिटर्न 36 से 48 महीने के बीच भरी जाए, तो अतिरिक्त टैक्स 70% यानी 14,000 रुपये होगा और कुल रकम 34,000 रुपये हो जाएगी। यह उदाहरण सिर्फ समझाने के लिए है, असली गणना आपकी आय और ब्याज पर निर्भर करेगी।

कौन भर सकता है ITR-U

आमतौर पर वे करदाता अपडेटेड रिटर्न भर सकते हैं:

  • जिन्होंने रिटर्न भरी ही नहीं थी।
  • जिन्होंने रिटर्न भरी, लेकिन कोई आय दिखाना भूल गए।
  • जिन्होंने गलत आय शीर्ष में आय दिखाई।
  • जिन्होंने गलत दर से टैक्स गणना की।

किन हालात में ITR-U नहीं भर सकते

अपडेटेड रिटर्न हर स्थिति में नहीं भरी जा सकती। सामान्य तौर पर इससे टैक्स देनदारी कम नहीं की जा सकती, न ही रिफंड बढ़ाया या नया रिफंड मांगा जा सकता। घाटा दिखाने के लिए भी यह रिटर्न नहीं भरी जा सकती। अगर उस साल के लिए तलाशी, सर्वे या आयकर विभाग की कुछ खास कार्रवाई शुरू हो चुकी है, तो भी यह विकल्प उपलब्ध नहीं होता। पूरी शर्तें आयकर विभाग की वेबसाइट पर दी गई हैं।

ITR-U कैसे भरें

  1. आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें।
  2. संबंधित असेसमेंट ईयर चुनें और अपडेटेड रिटर्न का विकल्प चुनें।
  3. पहले बकाया टैक्स, ब्याज और अतिरिक्त टैक्स जमा करें।
  4. सही ITR फॉर्म में अपडेटेड रिटर्न भरें और भुगतान का ब्योरा दर्ज करें।
  5. रिटर्न जमा करके उसे सत्यापित करें।

AIS जरूर देखें

अपडेटेड रिटर्न भरने से पहले आयकर पोर्टल पर अपना वार्षिक सूचना विवरण यानी AIS और फॉर्म 26AS जरूर देखें। इनमें बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर लेनदेन और TDS जैसी जानकारी होती है। इससे पता चल जाता है कि कौन सी आय छूट गई थी। विभाग के पास पहले से मौजूद जानकारी और आपकी रिटर्न में अंतर होने पर नोटिस आने की संभावना रहती है, इसलिए खुद आगे आकर सुधार करना बेहतर है।

ITR-U भरना कब समझदारी है

अगर आपको पता चल जाए कि कोई आय छूट गई है, तो इंतजार करने के बजाय जल्दी अपडेटेड रिटर्न भरना बेहतर है। एक तो अतिरिक्त टैक्स कम लगता है, दूसरे आयकर विभाग की ओर से नोटिस आने के बाद कई मामलों में यह विकल्प सीमित हो जाता है। अगर छूटी आय बहुत छोटी है और उस पर टैक्स बनता ही नहीं, तो भी किसी जानकार से सलाह लेकर तय करें कि ITR-U की जरूरत है या नहीं। भरने के बाद पावती और भुगतान के चालान की कॉपी संभालकर रखें।

नए आयकर कानून पर ध्यान दें

आयकर अधिनियम 2025 के लागू होने के बाद कई धाराओं के नंबर और कुछ प्रक्रियाएं बदली हैं। इसलिए ITR-U भरते समय आयकर विभाग की वेबसाइट पर उस साल के लिए लागू ताजा नियम और फॉर्म जरूर देखें।

ITR-U कितने समय तक भरी जा सकती है

संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने से 48 महीने तक।

क्या ITR-U से रिफंड मांगा जा सकता है

नहीं। अपडेटेड रिटर्न से रिफंड नहीं मांगा जा सकता और न ही टैक्स देनदारी घटाई जा सकती है।

सलाह लें: अपनी स्थिति के अनुसार सही फैसला लेने के लिए किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स सलाहकार से सलाह जरूर लें।

स्रोत: Income Tax Department: Updated Return of Income, Income Tax Department: Updated Return (PDF)

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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