संसद के उच्च सदन राज्यसभा के ज्यादातर सदस्य राज्यों की विधानसभाओं के विधायकों द्वारा चुने जाते हैं। लेकिन राज्यसभा में 12 सदस्य ऐसे भी होते हैं जो किसी चुनाव से नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के मनोनयन से सदन में पहुंचते हैं। अक्सर इनमें जाने-माने खिलाड़ी, कलाकार, लेखक, वैज्ञानिक और समाजसेवी शामिल होते हैं। आइए समझते हैं कि संविधान में यह व्यवस्था क्यों की गई और इन सदस्यों के क्या अधिकार हैं।
संविधान क्या कहता है
संविधान का अनुच्छेद 80 राज्यसभा की संरचना तय करता है। इसके अनुसार राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 सदस्य होंगे और बाकी सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होंगे। अनुच्छेद 80(3) कहता है कि मनोनीत किए जाने वाले सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों का विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो।
संविधान विशेषज्ञों के अनुसार इन चार क्षेत्रों की सूची उदाहरण के तौर पर है, अंतिम नहीं। व्यवहार में खेल, पत्रकारिता, कानून और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों की हस्तियों को भी मनोनीत किया जाता रहा है।

यह व्यवस्था क्यों बनी
संविधान निर्माताओं का मानना था कि संसद में केवल राजनीतिक दलों से जुड़े लोग ही नहीं, बल्कि ऐसे विशेषज्ञ और प्रतिष्ठित लोग भी होने चाहिए जो चुनावी राजनीति में नहीं आते लेकिन अपने क्षेत्र का गहरा ज्ञान रखते हैं। उनकी मौजूदगी से कानून बनाने और बहस की गुणवत्ता बढ़ सकती है। साथ ही यह देश के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सम्मान देने का एक तरीका भी है।
मनोनयन कैसे होता है
संविधान के अनुसार मनोनयन राष्ट्रपति करते हैं, लेकिन संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति आमतौर पर केंद्र सरकार की सलाह पर काम करते हैं। इसलिए व्यवहार में मनोनीत सदस्यों के नाम सरकार की सिफारिश पर तय होते हैं। मनोनयन की अधिसूचना जारी होने के बाद सदस्य राज्यसभा में शपथ लेते हैं।
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कार्यकाल और अधिकार
मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल भी चुने हुए सदस्यों की तरह 6 साल का होता है। सदन की कार्यवाही में वे पूरी तरह भाग लेते हैं: बहस में बोल सकते हैं, प्रश्न पूछ सकते हैं, विधेयकों पर मतदान कर सकते हैं और संसदीय समितियों के सदस्य बन सकते हैं। उन्हें वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधाएं भी चुने हुए सांसदों की तरह मिलती हैं।
वोटिंग से जुड़ा एक अहम फर्क
मनोनीत सदस्यों के अधिकारों में एक अहम अंतर है। राष्ट्रपति के चुनाव में केवल संसद और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य वोट डालते हैं, इसलिए मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं दे सकते। लेकिन उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य वोट डालते हैं, जिसमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं।
दल-बदल कानून और मनोनीत सदस्य
संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत मनोनीत सदस्य के लिए खास नियम है। अगर कोई मनोनीत सदस्य सदन में अपनी सीट ग्रहण करने के छह महीने के भीतर किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है, तो इसकी अनुमति है। लेकिन छह महीने के बाद किसी दल में शामिल होने पर वह सदस्यता के अयोग्य घोषित हो सकता है। इसी कारण कई मनोनीत सदस्य शुरुआत में ही तय कर लेते हैं कि वे किसी दल से जुड़ेंगे या स्वतंत्र रहेंगे।
राज्यसभा की कुल संरचना
अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं, जिनमें 12 मनोनीत और अधिकतम 238 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होते हैं। राज्यों को सीटें संविधान की चौथी अनुसूची के अनुसार आवंटित होती हैं। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जो भंग नहीं होता। इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं।
लोकसभा में मनोनयन का क्या हुआ
पहले लोकसभा में भी एंग्लो-इंडियन समुदाय के दो सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत करने का प्रावधान था। यह व्यवस्था 2020 में लागू 104वें संविधान संशोधन के बाद खत्म हो गई। अब संसद में मनोनयन की व्यवस्था केवल राज्यसभा में है।
किन क्षेत्रों से आते रहे हैं मनोनीत सदस्य
राज्यसभा में अब तक साहित्य, संगीत, सिनेमा, खेल, विज्ञान, शिक्षा, कानून और समाज सेवा जैसे कई क्षेत्रों की हस्तियां मनोनीत होती रही हैं। कवि, लेखक, शास्त्रीय संगीतकार, फिल्मी कलाकार, क्रिकेट खिलाड़ी, अर्थशास्त्री और पत्रकार इस सूची में शामिल रहे हैं। इससे सदन में अलग-अलग अनुभवों और नजरियों की झलक मिलती है। राज्यसभा की वेबसाइट पर वर्तमान और पूर्व मनोनीत सदस्यों की सूची देखी जा सकती है।
मनोनीत और निर्वाचित सदस्य में अंतर एक नजर में
- चयन: निर्वाचित सदस्य विधायकों के वोट से चुने जाते हैं, मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं।
- प्रतिनिधित्व: निर्वाचित सदस्य किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं, मनोनीत सदस्य किसी राज्य से नहीं जुड़े होते।
- राष्ट्रपति चुनाव: निर्वाचित सदस्य वोट देते हैं, मनोनीत सदस्य नहीं।
- कार्यकाल: दोनों का कार्यकाल 6 साल।
आलोचना और बहस
मनोनीत सदस्यों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। कुछ आलोचकों का कहना है कि कई बार मनोनयन राजनीतिक कारणों से होता है। सदन में कुछ प्रसिद्ध मनोनीत सदस्यों की कम उपस्थिति पर भी सवाल उठे हैं। वहीं समर्थकों का तर्क है कि कई मनोनीत सदस्यों ने विशेषज्ञ के रूप में बहसों और समितियों में अहम योगदान दिया है।
राज्यसभा में कितने मनोनीत सदस्य होते हैं
अनुच्छेद 80 के अनुसार राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत करते हैं।
क्या मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालते हैं
नहीं। राष्ट्रपति चुनाव में केवल निर्वाचित सदस्य वोट देते हैं, जबकि उपराष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सदस्य भी वोट डालते हैं।
स्रोत: Constitution of India: Article 80, Rajya Sabha Secretariat: Membership of Rajya Sabha





