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BREAKING: आरबीआई ने दिवाली पर दस बीस और पचास रुपये के नोटों की कमी को गलत बताया

आरबीआई ने दिवाली पर 10, 20 और 50 रुपये के नोटों की कमी के दावों को फर्जी बताते हुए पर्याप्त भंडार की पुष्टि की है।

BREAKING: आरबीआई ने दिवाली पर दस बीस और पचास रुपये के नोटों की कमी को गलत बताया
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / Rangan Datta Wiki)

भारतीय रिजर्व बैंक ने दिवाली के त्योहार से पहले बाजार में दस, बीस और पचास रुपये के नोटों की कमी से जुड़ी खबरों पर अपना रुख स्पष्ट किया है। केंद्रीय बैंक ने उन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि इस साल दिवाली के दौरान छोटे मूल्य के नोटों की उपलब्धता में कोई समस्या आएगी। आरबीआई ने जनता को भरोसा दिलाया है कि उसके पास सभी मूल्यवर्ग के नोटों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। यह स्पष्टीकरण सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक फर्जी संदेश के बाद आया है जिसने नागरिकों और छोटे व्यापारियों के बीच चिंता पैदा कर दी थी।

आरबीआई का स्पष्टीकरण
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / Rangan Datta Wiki)

सोशल मीडिया पर वायरल दावों का सच: पिछले कुछ दिनों से व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक संदेश तेजी से प्रसारित हो रहा था। इस संदेश में यह दावा किया गया था कि आगामी त्योहारों के मौसम में दस रुपये, बीस रुपये और पचास रुपये के नए नोटों की उपलब्धता पर बुरा असर पड़ सकता है। इस भ्रामक संदेश को भारतीय रिजर्व बैंक की एक आधिकारिक सलाह के रूप में पेश किया गया था। इस खबर के फैलने से दिवाली से ठीक पहले ग्राहकों और छोटे दुकानदारों में घबराहट का माहौल बन गया था क्योंकि त्योहारों के दौरान छोटे नोटों की मांग काफी बढ़ जाती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अब आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि यह पूरा दावा आधारहीन है। बैंक ने कहा है कि उसके वॉल्ट और करेंसी चेस्ट में सभी प्रकार के बैंक नोटों की कोई कमी नहीं है। जनता को सूचित किया गया है कि वे ऐसी किसी भी अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें जो आधिकारिक माध्यमों से न आई हो। फर्जी सर्कुलर और उसके गलत दावे: इस पूरे विवाद की जड़ में एक फर्जी सर्कुलर था जिस पर 27 अक्टूबर, 2026 की तारीख अंकित थी। इस जाली दस्तावेज का नंबर ‘RBI/2026-27/124’ बताया गया था। इस फर्जी सर्कुलर में यह दावा किया गया था कि भारतीय रिजर्व बैंक देश में कम कैश वाली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और डिजिटल भुगतान के उपयोग को विस्तारित करने के लिए धीरे-धीरे दस, बीस और पचास रुपये के नोटों की छपाई कम कर रहा है। इसमें आगे चेतावनी दी गई थी कि इस कदम के कारण दिवाली के दौरान इन छोटे नोटों की भारी कमी हो सकती है। संदेश में लोगों को यह सलाह भी दी गई थी कि वे त्योहार के दौरान होने वाली परेशानी से बचने के लिए पहले से ही नकदी निकाल लें या उसका इंतजाम कर लें। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस सर्कुलर में उसके नाम और लोगो का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया था। साथ ही, इस पर गवर्नर के नाम से किए गए हस्ताक्षर भी पूरी तरह से जाली थे। रिजर्व बैंक का आधिकारिक स्पष्टीकरण: भारतीय रिजर्व बैंक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से स्थिति को साफ किया है। बैंक ने अपने बयान में कहा है कि वह शुरू में ही यह स्पष्ट करना चाहता है कि सभी मूल्यवर्ग के नोट, जिनमें कम कीमत वाले नोट भी शामिल हैं, आरबीआई के वॉल्ट और करेंसी चेस्ट में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। बैंक ने जोर देकर कहा कि फर्जी सर्कुलर में दी गई जानकारी पूरी तरह से गुमराह करने वाली है। केंद्रीय बैंक ने दोहराया है कि उसने ऐसी कोई भी एडवाइजरी जारी नहीं की है जिसमें दिवाली से पहले छोटे नोटों की सप्लाई कम होने की बात कही गई हो। आरबीआई ने जनता से अपील की है कि वे इस तरह के फर्जी सर्कुलर पर न तो विश्वास करें और न ही इसे आगे साझा करें। बैंक के अनुसार, मुद्रा की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है और त्योहारों के दौरान मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। पीआईबी फैक्ट चेक की महत्वपूर्ण भूमिका: इस मामले में प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट ने भी सक्रियता दिखाई है। पीआईबी ने इस दावे की जांच की और इसे पूरी तरह से फर्जी पाया। फैक्ट चेक यूनिट ने पुष्टि की कि भारतीय रिजर्व बैंक ने कम मूल्य के नोटों की कमी के बारे में ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। यह स्पष्ट किया गया कि वायरल हो रहा संदेश केवल भ्रम फैलाने के उद्देश्य से बनाया गया था। सरकार की इस इकाई ने भी लोगों को सतर्क रहने और केवल विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी है। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि डिजिटल युग में फैलने वाली गलत सूचनाओं पर लगाम लगाई जा सके और आर्थिक स्थिरता के प्रति जनता का विश्वास बना रहे। आम जनता और व्यापारियों के लिए निर्देश: दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के समय घरों और दुकानदारों के लिए नकदी का महत्व बढ़ जाता है। आमतौर पर उपहार देने, खरीदारी करने और स्थानीय लेनदेन के लिए छोटे नोटों की मांग में भारी उछाल आता है। आरबीआई के इस ताजा बयान से यह सुनिश्चित हो गया है कि छोटे नोटों की आपूर्ति पर कोई आधिकारिक रोक नहीं है। बैंकों और करेंसी चेस्ट से उम्मीद की जा रही है कि वे सामान्य रूप से नोटों का वितरण जारी रखेंगे। आरबीआई और पीआईबी दोनों ने जनता से अनुरोध किया है कि वे किसी भी दावे को साझा करने से पहले केंद्रीय बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित सोशल मीडिया हैंडल से उसकी पुष्टि जरूर कर लें। बिना सत्यापन के सोशल मीडिया फॉरवर्ड पर भरोसा करना वित्तीय लेनदेन में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न कर सकता है।

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स्रोत: Aaj Tak

लेखक

Netsha Singh

नेत्शा सिंह डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं। वे सरकारी योजनाओं, आपका पैसा, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल न्यूज़ लेखन में उन्हें लगभग एक साल का अनुभव है; इससे पहले वे खबर नगरी और ऑनलाइन ताज़ा खबर के साथ काम कर चुकी हैं और यूट्यूब पर समसामयिक विषयों पर कंटेंट भी बनाती हैं।

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