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छठ व्रत में सेहत: 36 घंटे के निर्जला व्रत से पहले और बाद में क्या खाएं, किन्हें डॉक्टर से पूछना चाहिए

छठ का निर्जला व्रत सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है, और ठंड में पानी में खड़े होकर अर्घ्य देना पड़ता है। जानिए व्रत से पहले की तैयारी, किन लोगों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, घाट पर बचाव और पारण के बाद हल्का भोजन।

छठ के निर्जला व्रत में सेहत की सावधानियों का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • छठ में खरना के प्रसाद के बाद व्रती संध्या अर्घ्य और फिर अगली सुबह उषा अर्घ्य तक, लगभग 36 घंटे बिना पानी पिए व्रत रखते हैं।
  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल समेत स्वास्थ्य संस्थाएं लंबे उपवास से पहले कुछ लोगों को डॉक्टर से बात करने की सलाह देती हैं:
  • चक्कर आना, बहुत कमजोरी, तेज धड़कन, सीने में दर्द, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो व्रत की चिंता किए बिना तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • यह धार्मिक मान्यता का विषय है, पर डॉक्टरों के अनुसार जरूरी दवा छोड़ना खतरनाक हो सकता है।

छठ में खरना के प्रसाद के बाद व्रती संध्या अर्घ्य और फिर अगली सुबह उषा अर्घ्य तक, लगभग 36 घंटे बिना पानी पिए व्रत रखते हैं। इस बार खरना 14 नवंबर, संध्या अर्घ्य 15 नवंबर और उषा अर्घ्य 16 नवंबर को है। नवंबर की ठंड में सुबह-शाम पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने से शरीर पर और दबाव पड़ता है। आस्था के साथ सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। यह जानकारी सामान्य है, इलाज की सलाह नहीं। जानिए छठ व्रत में सेहत का ख्याल कैसे रखें।

किन्हें डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल समेत स्वास्थ्य संस्थाएं लंबे उपवास से पहले कुछ लोगों को डॉक्टर से बात करने की सलाह देती हैं:

  • डायबिटीज के मरीज, खासकर जो इंसुलिन या शुगर की दवा लेते हैं
  • हाई या लो ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी वाले
  • किडनी के मरीज
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
  • बहुत बुजुर्ग लोग और जो पहले कभी बेहोश हुए हों

डॉक्टर दवा का समय बदलने या व्रत को आसान रूप में रखने की सलाह दे सकते हैं।

मुख्य बातें: छठ के निर्जला व्रत में सेहत की सावधानियों का ग्राफिक
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व्रत से पहले की तैयारी

  • नहाय खाय और खरना से पहले के दिनों में भरपूर पानी पिएं
  • खरना के प्रसाद तक नारियल पानी, फल और तरल चीजें लें
  • तला-भुना और बहुत नमकीन खाना कम करें, इससे प्यास ज्यादा लगती है
  • तैयारी के काम में पूरी रात न जागें, नींद लें

व्रत के दौरान

  • धूप और भीड़ में ज्यादा देर न रहें
  • अर्घ्य के अलावा बाकी समय आराम करें
  • भारी काम परिवार के दूसरे लोग संभालें

यह भी पढ़ें: करवा चौथ का निर्जला व्रत और सेहत: किन लोगों को सावधानी चाहिए, डिहाइड्रेशन के लक्षण और व्रत खोलने का तरीका | खरना का प्रसाद: छठ के दूसरे दिन गुड़ की खीर और रोटी कैसे बनती है, नियम, पूजा और 36 घंटे के व्रत की शुरुआत

ठंड और पानी से बचाव

  • घाट पर पानी में उतनी ही देर खड़े रहें, जितनी परंपरा के लिए जरूरी हो
  • पानी से निकलते ही सूखे कपड़े पहनें और शॉल ओढ़ें
  • घाट पर साथ में कंबल या गर्म कपड़े रखें
  • गहरे पानी में न जाएं और फिसलन से बचें

चेतावनी के संकेत

चक्कर आना, बहुत कमजोरी, तेज धड़कन, सीने में दर्द, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो व्रत की चिंता किए बिना तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डायबिटीज के मरीजों में पसीना, कंपकंपी या बहुत कमजोरी शुगर कम होने का संकेत हो सकती है।

पारण के बाद

  • पारण पानी, शरबत या दूध से करें, फिर थोड़ा प्रसाद
  • एक साथ बहुत ज्यादा ठेकुआ या भारी खाना न खाएं
  • धीरे-धीरे सामान्य भोजन पर लौटें
  • अगले दिन भी भरपूर पानी पिएं

परिवार की भूमिका

व्रती के आराम, गर्म कपड़ों, दवाओं और घाट तक सुरक्षित आने-जाने की जिम्मेदारी परिवार के लोग लें। बुजुर्ग व्रती के साथ हमेशा कोई रहे।

क्या दवा लेने से व्रत टूटता है?

यह धार्मिक मान्यता का विषय है, पर डॉक्टरों के अनुसार जरूरी दवा छोड़ना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर और परिवार के बड़ों से बात करके फैसला करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

स्रोत: राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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