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BREAKING: भारत ने लॉन्च किए तीन स्वदेशी AI मॉडल, बिना इंटरनेट चलेंगे दो

भारत ने तीन नए स्वदेशी एआई मॉडल EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B लॉन्च किए हैं जो भारतीय भाषाओं पर केंद्रित हैं।

BREAKING: भारत ने लॉन्च किए तीन स्वदेशी AI मॉडल, बिना इंटरनेट चलेंगे दो
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / CHAIR Prof. Yoshua Bengio, Université de Montréal / Mila - Q)

सारांश

  • भारत में तीन नए मॉडल को पेश किया है, जिनके नाम EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B हैं. इन टूल्स को देश में ही तैयार किया गया है और यह भारतीयों की जरूरत को पूरा कर सकते हैं. साथ ही तीन में दो मॉडल…
  • भारत सरकार ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम उठाते हुए तीन नए स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल का अनावरण किया है।
  • इन तीनों मॉडलों में EKA-1 सबसे बड़ा और अत्यंत शक्तिशाली मॉडल माना जा रहा है।
  • EKA-1 के विपरीत, Dhir 2B और Dhir 5B मॉडल को अलग उद्देश्यों और उपयोग के लिए विकसित किया गया है।

भारत का नया तकनीकी कदम

भारत में तीन नए मॉडल को पेश किया है, जिनके नाम EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B हैं. इन टूल्स को देश में ही तैयार किया गया है और यह भारतीयों की जरूरत को पूरा कर सकते हैं. साथ ही तीन में दो मॉडल बिना इंटरनेट के काम करते हैं.

स्वदेशी AI मॉडल
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / CHAIR
Prof. Yoshua Bengio, Université de Montréal / Mila – Q)

भारत सरकार ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम उठाते हुए तीन नए स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल का अनावरण किया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंडियाएआई मिशन के साथ मिलकर इन तकनीकी उपकरणों को विकसित करने का कार्य किया है। इन मॉडलों को पूर्णतः देश के भीतर तैयार किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं और स्थानीय व्यवसायों की विशिष्ट आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना है। इस पहल का एक प्रमुख लक्ष्य विदेशी एआई मॉडलों पर निर्भरता को कम करना है, जिससे भारत की तकनीकी संप्रभुता को मजबूती मिल सके। नई दिल्ली में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान इन मॉडलों को सार्वजनिक रूप से पेश किया गया। इस अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन सहित कई सरकारी अधिकारियों ने इन मॉडलों की कार्यप्रणाली और उनके संभावित उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। यह कदम देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

EKA-1 मॉडल की तकनीकी क्षमताएं

इन तीनों मॉडलों में EKA-1 सबसे बड़ा और अत्यंत शक्तिशाली मॉडल माना जा रहा है। इसे बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप सोकेट लैब्स द्वारा विकसित किया गया है। यह एक ओपन और स्पार्श हाइब्रिड लैंग्वेज मॉडल है, जिसे विशेष रूप से जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्यों को निष्पादित करने के लिए डिजाइन किया गया है। EKA-1 की क्षमता का आकलन इसके तकनीकी आंकड़ों से किया जा सकता है, क्योंकि यह 26.3 अरब पैरामीटर्स पर आधारित है और इसे 7.5 ट्रिलियन टेक्स्ट टोकन्स के विशाल डेटासेट के साथ प्रशिक्षित किया गया है। यह मॉडल न केवल गणित और सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग जैसे कठिन विषयों में सक्षम है, बल्कि रीजनिंग से संबंधित जटिल प्रश्नों के उत्तर देने में भी माहिर है। एक एआई एजेंट के रूप में कार्य करते हुए, यह कई कार्यों को एक साथ पूरा करने की क्षमता रखता है। यह मॉडल अंग्रेजी के साथ-साथ भारत की सभी अनुसूचित भाषाओं को समझने और प्रोसेस करने में पूरी तरह समर्थ है। इसकी उच्च कार्यक्षमता को देखते हुए इसे बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है ताकि इन संवेदनशील क्षेत्रों में सटीक परिणाम प्राप्त किए जा सकें।

Dhir 2B और Dhir 5B की अनूठी विशेषताएं

EKA-1 के विपरीत, Dhir 2B और Dhir 5B मॉडल को अलग उद्देश्यों और उपयोग के लिए विकसित किया गया है। इन दोनों मॉडलों को ZenteiQ AiTech इनोवेशन द्वारा तैयार किया गया है। इन मॉडलों की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी विशेषता यह है कि इन्हें बिना इंटरनेट के भी संचालित किया जा सकता है। वर्तमान में अधिकांश एआई मॉडल क्लाउड सर्वर पर निर्भर होते हैं, लेकिन इन दोनों मॉडलों के लिए किसी भी बड़े क्लाउड सर्वर की आवश्यकता नहीं है। उपयोगकर्ता इन्हें बहुत आसानी से अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप में सीधे डाउनलोड करके उपयोग कर सकते हैं। यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए अत्यधिक लाभकारी साबित हो सकती है जहां इंटरनेट की उपलब्धता सीमित है या जहां डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के कारण क्लाउड का उपयोग संभव नहीं है। यह स्थानीय स्तर पर एआई के उपयोग को सुलभ बनाने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है, जिससे आम नागरिकों को भी आधुनिक तकनीक का लाभ मिल सकेगा।

भविष्य और उपयोग के व्यापक क्षेत्र

सरकारी अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन स्वदेशी एआई मॉडलों का उपयोग सरकारी कार्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और शैक्षणिक संस्थानों में व्यापक स्तर पर किया जाएगा। सचिव एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया है कि यह स्वदेशी तकनीक भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक होगी। इन मॉडलों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे भारतीय सांस्कृतिक और भाषाई संदर्भ में बेहतर और सटीक परिणाम प्रदान कर सकें। भविष्य में इन मॉडलों का विस्तार अन्य क्षेत्रों में भी करने की योजना है ताकि इनका लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच सके। यह पहल आत्मनिर्भर भारत के विजन को तकनीकी धरातल पर उतारने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। सरकार का मानना है कि इन टूल्स के माध्यम से न केवल कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित होगी। इन मॉडलों का विकास यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर एआई अनुसंधान और विकास में अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

यह भी पढ़ें: BREAKING: इंडियाएआई मिशन ने स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल एका 1 और धीर का अनावरण किया

स्रोत: Aaj Tak

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लेखक

Shobhit Pandey

शोभित पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव के शिकायत अधिकारी (Grievance Officer) हैं। सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत पाठकों की शिकायतें और सुधार संबंधी अनुरोध हमारे संपर्क पेज के माध्यम से भेजे जा सकते हैं।

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