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Nag Panchami 2026: तीसरे सावन सोमवार पर पड़ेगा पावन पर्व, जानें सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Nag Panchami 2026: तीसरे सावन सोमवार पर पड़ेगा पावन पर्व, जानें सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Nag Panchami 2026

सारांश

  • Nag Panchami 2026: हिंदू धर्म में नाग पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व है।
  • वर्ष 2026 में नाग पंचमी का पर्व बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग में पड़ रहा है।
  • नाग पंचमी पर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा के लिए निम्नलिखित शुभ समय रहेगा:
  • भगवान शिव अपने गले में वासुकी नाग को आभूषण के रूप में धारण करते हैं।

Nag Panchami 2026: हिंदू धर्म में नाग पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व है। हर वर्ष सावन (श्रावण) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्यौहार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व नाग देवता और देवाधिदेव महादेव की आराधना को समर्पित है।

वर्ष 2026 में नाग पंचमी का पर्व बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग में पड़ रहा है। इस बार नाग पंचमी 17 अगस्त 2026 को तीसरे सावन सोमवार के दिन मनाई जाएगी। सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ होना शिव भक्तों और साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।

Nag Panchami 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

नाग पंचमी पर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा के लिए निम्नलिखित शुभ समय रहेगा:

विवरणतिथि व समय
नाग पंचमी तिथि17 अगस्त 2026, सोमवार
पूजा का शुभ मुहूर्तसुबह 06:00 बजे से 08:10 बजे तक
पंचमी तिथि प्रारंभ16 अगस्त 2026, शाम 04:55 बजे
पंचमी तिथि समाप्त17 अगस्त 2026, शाम 05:00 बजे

धार्मिक महत्व और कालसर्प दोष से मुक्ति

भगवान शिव अपने गले में वासुकी नाग को आभूषण के रूप में धारण करते हैं। इसलिए नाग पंचमी के दिन महादेव और नाग देव की संयुक्त पूजा का विशेष विधान है।

  • ग्रह दोषों से राहत: ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, इस दिन शिवलिंग और नाग देवता पर जल तथा कच्चा दूध अर्पित करने से कालसर्प दोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

  • भय से सुरक्षा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नाग पूजन करने से परिवार में सर्प भय समाप्त होता है और सुख-समृद्धि का वास होता है।

नाग पंचमी पूजा विधि

  1. संकल्प: प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत तथा पूजन का संकल्प लें।

  2. प्रतिमा स्थापना: घर के मंदिर या मुख्य द्वार पर मिट्टी, धातु अथवा चित्र के रूप में नाग देवता की स्थापना करें।

  3. अभिषेक: नाग देवता और शिवलिंग पर गंगाजल, साफ जल और कच्चा दूध अर्पित करें।

  4. पूजन सामग्री: रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प और विशेष रूप से धान का लावा (खील) अर्पित करें।

  5. मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” और नाग गायत्री मंत्र “ॐ नवकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नः सर्पः प्रचोदयात्॥” का श्रद्धापूर्वक जाप करें।

  6. आरती व प्रसाद: अंत में धूप-दीप जलाकर आरती करें और परिवार के मंगल की कामना करते हुए प्रसाद वितरित करें।

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लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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