Nandigram: नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के हत्याकांड के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी उस समय हुई जब ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान दे नामांकन वापस लेने के बाद वह नंदीग्राम में कांग्रेस का समर्थन करेंगी। उन्होंने यह फैसला देश को ध्यान में रखकर लिया बताया।

राज्य कांग्रेस नेतृत्व ने भाजपा पर साजिश का आरोप लगाया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी शुक्रवार रात प्रतिक्रिया दी। विधानसभा में विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी ने राहुल गांधी के संदेश का जवाब दिया।

घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं। एक तरफ इसे राजनीतिक बदले से जोड़ा जा रहा है, दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि पुराने मामलों में वारंट लागू करना जरूरी था।

Nandigram: ममता बनर्जी के समर्थन के बाद गिरफ्तारी कैसे हुई?

ममता बनर्जी की उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद उन्होंने कांग्रेस को नंदीग्राम में समर्थन देने की घोषणा की। इसके तुरंत बाद मिलन प्रधान गिरफ्तार हुए। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का कहना है कि विपक्षी दलों के एकजुट होने से भाजपा डर रही है।

कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व इस गिरफ्तारी से हैरान बताया गया है। पार्टी इसे संयोग नहीं मान रही। राज्य इकाई ने इसे साजिश करार दिया। समर्थन की घोषणा और कार्रवाई के समय को जोड़कर विपक्ष एकजुटता पर हमले का आरोप लगा रहा है।

नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की संवेदनशील सीट रही है। उपचुनाव के माहौल में उम्मीदवार की गिरफ्तारी से सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस अब राहुल गांधी के बयान के बाद इस मुद्दे को लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर उठा रही है।

राहुल गांधी ने एक्स पर क्या लिखा?

शुक्रवार की रात राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस नेता मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं है। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध और लोकतंत्र की हत्या बताया। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “भाजपा को चुनावों पर भरोसा नहीं है। इसी लिए कभी वह वोट चुराती है, कभी सरकार चुराती है, और कभी राजनीतिक दलों को चुराकर सत्ता में बने रहने की कोशिश करती है।”

उन्होंने यह भी संदेश दिया कि कांग्रेस झुकने वाली नहीं है। यह बयान राज्य कांग्रेस के आरोप के बाद आया कि कार्रवाई विपक्ष की एकजुटता से जुड़ी है। राहुल गांधी ने गिरफ्तारी को चुनावी भरोसे की कमी से जोड़ा।

स्रोत के अनुसार भाजपा की ओर से सीधे कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। जवाब रीतब्रत बनर्जी की तरफ से आया, जिन्हें शुक्रवार को चुनाव आयोग ने लिफाफा चुनाव चिह्न दिया था। उन्हें डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के नाम से उपचुनाव लड़ने का मौका मिला है।

रीतब्रत बनर्जी ने राहुल गांधी को क्या जवाब दिया?

रीतब्रत बनर्जी ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर कहा, “हमने शिकायत दर्ज कराई है। मिलन प्रधान के खिलाफ तीन हत्या के मामले दर्ज हैं। चुनाव के दौरान गिरफ्तारी वारंट को लागू करना अनिवार्य है। कांग्रेस नेताओं ने शायद राहुल गांधी को इस बारे में जानकारी नहीं दी।”

उनका तर्क यह है कि मामले पुराने दर्ज हैं और चुनाव के दौरान वारंट लागू करना कानूनी जरूरत है। उन्होंने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस जवाब से साफ है कि एक पक्ष इसे अनिवार्य कानूनी कदम बता रहा है जबकि दूसरा पक्ष समय और संदर्भ को राजनीतिक मान रहा है।

दोनों बयान आरोप और प्रतिआधार हैं। अदालत या पुलिस की विस्तृत चार्जशीट का ब्योरा स्रोत में नहीं दिया गया है। इसलिए 2007 के मामले की पूरी पृष्ठभूमि यहां नहीं जोड़ी जा सकती। उपलब्ध जानकारी यही है कि गिरफ्तारी उस हत्याकांड के सिलसिले में बताई गई है और रीतब्रत ने तीन हत्या के मामलों का जिक्र किया है।

Nandigram: इस विवाद का उपचुनाव और विपक्ष एकजुटता से क्या संबंध है?

ममता बनर्जी ने कांग्रेस समर्थन का फैसला देशहित में बताया। कांग्रेस इसे विपक्षी एकजुटता का संकेत मान रही है। अधीर रंजन चौधरी के अनुसार इसी एकजुटता से भाजपा चिंतित है। राहुल गांधी ने गिरफ्तारी को संयोग न मानते हुए प्रतिशोध बताया।

रीतब्रत बनर्जी अब अलग नाम और चिह्न के साथ मैदान में हैं। आयोग ने उन्हें लिफाफा चिह्न दिया है। नंदीग्राम की लड़ाई इसलिए और पेचीदा हो गई है क्योंकि मूल तृणमूल खेमे में बंटवारा और कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी एक साथ चर्चा में हैं।

पाठक के लिए मतलब यह है कि उपचुनाव सिर्फ स्थानीय उम्मीदवार का मुद्दा नहीं रह गया। केंद्र के विपक्षी नेता और राज्य के विपक्षी नेता सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। एक तरफ लोकतंत्र और बदले की भाषा है, दूसरी तरफ वारंट और दर्ज मामलों की भाषा है।

आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया कैसे चलती है और नामांकन संबंधी औपचारिकताएं क्या रहती हैं। स्रोत में आगे की अदालती सुनवाई या जमानत का ब्योरा नहीं है। फिलहाल सियासी संदेश और पत्र के जवाब ही सार्वजनिक रिकॉर्ड पर हैं।

नंदीग्राम की यह घटना पश्चिम बंगाल की मौजूदा चुनावी हलचल से जुड़ गई है। ममता के समर्थन, कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी, राहुल गांधी के ट्वीट और रीतब्रत के पत्र ने एक ही दिन में कई परतें खोल दी हैं। दावे अलग-अलग हैं। तथ्यों की पुष्टि अदालती दस्तावेजों से आगे बढ़ेगी, जो इस सामग्री में उपलब्ध नहीं हैं।

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