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टीएमसी सिंबल फ्रीज के बाद ममता के तीन नाम फुटबॉल खिलाड़ी बैट रीतब्रत के लिफाफा मशाल

टीएमसी सिंबल फ्रीज के बाद ममता के तीन नाम फुटबॉल खिलाड़ी बैट रीतब्रत के लिफाफा मशाल
TMC Symbol Freeze

सारांश

  • TMC Symbol Freeze: चुनाव आयोग द्वारा जोराफुल चिन्ह फ्रीज करने के बाद तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों ने नए नाम और चुनाव चिन्हों के विकल्प आयोग को भेज दिए हैं।
  • तीनों विकल्पों में ममता और तृणमूल का मेल अलग क्रम में है। एक में नाम पहले है दूसरे में बाद में तीसरे में बीच जैसा प्रयोग है।
  • रीतब्रत शिविर राष्ट्रवादी तृणमूल कांग्रेस या लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस में से किसी एक नाम से चुनाव लड़ना चाहता है।
  • जोराफुल फ्रीज के बाद यही शब्द और चित्र दोनों लड़ाई का मैदान बन गए।

TMC Symbol Freeze: चुनाव आयोग द्वारा जोराफुल चिन्ह फ्रीज करने के बाद तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों ने नए नाम और चुनाव चिन्हों के विकल्प आयोग को भेज दिए हैं। कोलकाता से मिली जानकारी के अनुसार ममता बनर्जी गुट ने आयोग के फैसले के एक घंटे के भीतर पसंदीदा नाम और चिन्ह भेज दिए।

सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी ने गुरुवार रात 11 बजकर 36 मिनट पर ईमेल से अपना विकल्प बताया। जोराफुल इस्तेमाल नहीं हो सकता इसलिए दोनों पक्षों को एक दूसरे को तीन वैकल्पिक चिन्हों की सूचना देनी है। ममता खेमे ने नामों में अपना नाम जोड़ने वाली तीन शब्दावलियां भेजी हैं। चिन्ह के रूप में फुटबॉल खिलाड़ी और बैट चुने गए हैं।

रीतब्रत बनर्जी गुट राष्ट्रवादी तृणमूल कांग्रेस या लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस में से किसी एक नाम से चुनाव लड़ना चाहता है। उनके प्रतीक लिफाफा मशाल और ब्लैकबोर्ड बताए गए हैं। पुराना घास फूल अब दोनों के लिए बंद है।

TMC Symbol Freeze: ममता गुट ने चुनाव आयोग को कौन से तीन नाम भेजे?

सूत्रों के अनुसार ममता खेमे ने तीन नाम प्रस्तावित किए हैं। पहला ममता सरभारतीय तृणमूल कांग्रेस है। दूसरा सरभारतीय तृणमूल कांग्रेस ममता है। तीसरा तृणमूल ममता कांग्रेस है। इनमें से किसी एक के इस्तेमाल की इच्छा जताई गई है।

राजनीतिक हलकों का मानना है कि नाम में ममता शब्द रखने की रणनीति है। मतदाता तब खेमे को आसानी से पहचान सकेंगे। साथ ही तृणमूल कांग्रेस वाला पूरा मुहावरा दोनों गुटों के लिए अहम माना जा रहा है। इसलिए तृणमूल और कांग्रेस दोनों शब्द बचाने की कोशिश दिखती है।

तीनों विकल्पों में ममता और तृणमूल का मेल अलग क्रम में है। एक में नाम पहले है दूसरे में बाद में तीसरे में बीच जैसा प्रयोग है। आयोग इनमें से क्या आवंटित करता है यह अगला कदम है। ईमेल रात 11 बजकर 36 मिनट पर गया बताया गया है। फैसले के एक घंटे के भीतर जवाब पहुंचाने की बात भी स्रोत ने कही।

पहचान का संकट उपचुनाव और आगे के प्रचार दोनों को छूता है। पुराना जोराफुल तीन मुख्यमंत्री चुनावों से जुड़ा रहा। नया नाम मतदाता की जुबान पर कितनी जल्दी चढ़ेगा यही दांव है। ममता गुट का प्रस्ताव नाम के अंदर नेता का नाम रखकर उस दांव को छोटा करने जैसा है।

जोराफुल की जगह ममता गुट ने कौन से चिन्ह चुने?

ममता बनर्जी ने स्वयं घास के फूल या दोहरे फूल को चुनाव चिन्ह बनाया था। उसी चिन्ह से वे तीन बार मुख्यमंत्री चुनी गईं। दोनों गुटों की खींचतान के बाद आयोग ने फिलहाल इस चिन्ह को स्थिर कर दिया यानी फ्रीज कर दिया।

इसके बाद ममता गुट ने दो चिन्ह चुने। एक फुटबॉल खिलाड़ी है। दूसरा बैट है। स्रोत में तीसरा चिन्ह इस सूची में नहीं जोड़ा गया हालांकि आयोग प्रक्रिया में तीन विकल्पों की सूचना का उल्लेख है। अभी सार्वजनिक रूप से ये दो प्रतीक ही ममता पक्ष से जुड़े बताए गए।

फुटबॉल और बैट दोनों खेल से जुड़ी छवियां हैं। पुराना फूल प्रकृति वाला था। नया प्रस्ताव मैदान और खेल की भाषा में जाता है। आयोग अंतिम आवंटन करेगा। तब तक ये केवल पसंद हैं आधिकारिक चिन्ह नहीं।

जोराफुल बंद होने से प्रचार सामग्री बैनर और ईवीएम बटन सब बदलने पड़ेंगे। तीन बार जीत वाला चिन्ह हाथ से निकलना ममता खेमे के लिए भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों चोट है। इसलिए विकल्प जल्दी भेजने की होड़ दिखी। एक घंटे का जिक्र उसी जल्दबाजी को रेखांकित करता है।

TMC Symbol Freeze: रीतब्रत गुट ने क्या नाम और प्रतीक भेजे?

रीतब्रत शिविर राष्ट्रवादी तृणमूल कांग्रेस या लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस में से किसी एक नाम से चुनाव लड़ना चाहता है। दोनों विकल्पों में तृणमूल कांग्रेस बचाकर आगे राष्ट्रवादी या लोकतांत्रिक शब्द जोड़ा गया है।

भेजे गए प्रतीक तीन हैं। लिफाफा मशाल और ब्लैकबोर्ड। ये ममता गुट के खेल चिन्हों से बिलकुल अलग सेट हैं। लिफाफा संचार का संकेत माना जा सकता है मशाल मशाल जुलूस वाली छवि देती है ब्लैकबोर्ड शिक्षा या संदेश बोर्ड जैसा दिखता है। अर्थ आयोग नहीं गढ़ता आवंटन करता है।

दोनों खेमे तृणमूल और कांग्रेस शब्द रखना चाहते हैं यह राजनीतिक हलकों की पढ़त है। रीतब्रत पक्ष ने ममता नाम नहीं जोड़ा बल्कि राष्ट्रवादी या लोकतांत्रिक विशेषण लगाया। पहचान की लड़ाई यहां शब्द चयन से साफ है। एक तरफ व्यक्ति का नाम है दूसरी तरफ वैचारिक विशेषण।

आयोग को दोनों सूचियां मिल चुकी हैं। एक दूसरे को तीन वैकल्पिक चिन्ह बताने की शर्त भी जुड़ी है। अंतिम प्रतीक तब तक अस्थायी रहेंगे जब तक आयोग आवंटित न करे। उपचुनाव उसी नए नाम और नए चिन्ह से लड़े जाएंगे जब तक विवाद का पक्का निपटारा न हो।

दोनों गुट तृणमूल कांग्रेस शब्द क्यों बचाना चाहते हैं?

सूत्रों और राजनीतिक हलकों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस नाम कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। सालों से बंगाल की राजनीति इसी दो शब्द वाले ब्रांड से पहचानी गई। फूल चिन्ह उसी ब्रांड का चित्र था।

ममता गुट ने नाम के साथ ममता जोड़कर ब्रांड और चेहरा एक करने की कोशिश की। रीतब्रत गुट ने तृणमूल कांग्रेस रखते हुए राष्ट्रवादी या लोकतांत्रिक उपनाम जोड़ा। दोनों ही पुराने पूरे नाम से कटना नहीं चाहते। कटने का मतलब मतदाता स्मृति में नया पूरा वाक्य बसाना होगा।

जोराफुल फ्रीज के बाद यही शब्द और चित्र दोनों लड़ाई का मैदान बन गए। आयोग ने चिन्ह स्थिर किया ताकि कोई एक पक्ष पुरानी संपत्ति अकेले न चलाए। नाम के विकल्प इसी शून्य को भरने के लिए आए। तीन बार मुख्यमंत्री बनाने वाला चिन्ह अब कागज पर बंद है। नया चित्र मतदान केंद्र पर पहली बार दिखेगा।

प्रक्रिया के मुताबिक तीन तीन विकल्प आने के बाद आयोग आवंटन करेगा। कौन सा नाम और कौन सा चिन्ह किस गुट को मिलता है यह अभी घोषित नहीं है। ईमेल और प्रस्ताव की सूची ही इस वक्त पक्की खबर है।

TMC Symbol Freeze: आगे आयोग के पास क्या फैसला बाकी है?

जोराफुल का उपयोग बंद है। दोनों दलों को एक दूसरे को तीन वैकल्पिक चुनाव चिन्ह बताने हैं। ममता पक्ष ने रात 11 बजकर 36 मिनट पर ईमेल किया। फैसले के एक घंटे के भीतर जवाब पहुंचाने का दावा स्रोत का है।

ममता के तीन नाम और फुटबॉल खिलाड़ी तथा बैट वाले चिन्ह आयोग के पास हैं। रीतब्रत के दो नाम विकल्प और लिफाफा मशाल ब्लैकबोर्ड आयोग के पास हैं। आवंटन के बाद नामांकन और प्रचार इन्हीं से चलेगा। अंतिम पार्टी विवाद का निपटारा अलग पड़ा है।

बंगाल के मतदाता अब फूल की जगह नया चित्र देखेंगे। नाम भी आंशिक नया होगा। ममता शब्द वाला सेट एक खेमे की पहचान बनाएगा। राष्ट्रवादी या लोकतांत्रिक वाला सेट दूसरे खेमे की। आयोग जब तक चुनकर न दे दोनों सूचियां केवल प्रस्ताव हैं।

टीएमसी सिंबल फ्रीज के बाद ममता गुट ने तीन नाम और फुटबॉल खिलाड़ी बैट जैसे चिन्ह भेजे। रीतब्रत गुट ने राष्ट्रवादी या लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस तथा लिफाफा मशाल ब्लैकबोर्ड दिए। जोराफुल तीन मुख्यमंत्री जीत का चिन्ह रहा अब फ्रीज है। आगे की तस्वीर आयोग के आवंटन से बनेगी।

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लेखक

Adarsh Pandey

आदर्श पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव में न्यूज़ राइटर हैं। वे देश की ताजा खबरें, आपका पैसा (कारोबार), मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े विषय कवर करते हैं। डिजिटल मीडिया में उन्हें एक साल से अधिक का अनुभव है।

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