ताज़ा खबर
One Nation One Ration Card: How Migrant Families Can Take Ration Anywhere in India and Use the Mera Ration App BREAKING: पीएम मोदी ने पुणे मेट्रो पिंक लाइन का उद्घाटन किया और चार नए रूटों की नींव रखी आज का मंडी भाव 3 नवंबर 2026: देशभर की मंडियों में चना/आलू/प्याज समेत 28 फसलों के रेट कौड़ी और गोमती चक्र: दिवाली पूजा में इनकी परंपरा, मान्यता और पूजा के बाद क्या करें BREAKING: वाराणसी में बनेगा नमो ब्रिज, ऊपर छह लेन सड़क और नीचे चार रेलवे ट्रैक राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस 9 नवंबर: कौन ले सकता है मुफ्त कानूनी मदद, कहां करें आवेदन, हेल्पलाइन 15100 BREAKING: अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर किया हमला, नेतन्याहू ने ट्रंप पर बनाया दबाव लक्ष्मी जी की आरती: दिवाली पूजा में आरती का क्रम, अर्थ, थाली की तैयारी और आरती के नियम
ट्रेंडिंग
धर्म

Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी 2026 कल 19 सितंबर शनिवार को जानें तिथि मुहूर्त और पूजा विधि

Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी 2026 कल 19 सितंबर शनिवार को जानें तिथि मुहूर्त और पूजा विधि
Radha Ashtami 2026

सारांश

  • Radha Ashtami 2026: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर राधा अष्टमी मनाई जाती है।
  • कई लोग तिथि दो दिन छूने से भ्रमित हो जाते हैं। एक दिन तिथि प्रवेश होता है दूसरा दिन उदया के कारण पर्व का दिन बनता है।
  • सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल अच्छी तरह साफ करें।
  • घर में छोटी पूजा हो या मंदिर में बड़ा आयोजन मूल भाव एक है। राधा और कृष्ण को साथ स्थापित करने की विधि उसी जोड़ी को केंद्र में रखती है।

Radha Ashtami 2026: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर राधा अष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को श्री राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। भक्तों के लिए यह दिन इसी वजह से खास माना जाता है।

इस साल राधा अष्टमी 2026 शनिवार 19 सितंबर को है। पंचांगों में भी यही तारीख दर्ज है। अष्टमी तिथि एक दिन पहले शुरू हो जाएगी फिर भी उदया तिथि के आधार पर पर्व 19 तारीख को ही मनाया जाएगा।

ब्रज के बरसाना वृंदावन मथुरा और नंदगांव में इस अवसर पर विशेष पूजा और आयोजन होते हैं। घरों में भी राधा कृष्ण की संयुक्त आराधना की परंपरा है। सही तिथि और स्थानीय समय देखकर पूजा करना ज्यादा व्यावहारिक रहता है।

Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी 2026 की तिथि कब से कब तक रहेगी?

पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर करीब एक बजे शुरू होगी। यह तिथि 19 सितंबर को दोपहर करीब 3 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी।

उदया तिथि के आधार पर राधा अष्टमी 19 सितंबर को मनाई जाएगी। यानी सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो उसी के हिसाब से पर्व तय होता है। 18 तारीख को तिथि शुरू होने के बावजूद मुख्य दिन शनिवार ही माना गया है।

कई लोग तिथि दो दिन छूने से भ्रमित हो जाते हैं। एक दिन तिथि प्रवेश होता है दूसरा दिन उदया के कारण पर्व का दिन बनता है। राधा अष्टमी 2026 में यही गणना लागू है। पंचांग स्रोत पर 19 सितंबर स्पष्ट दर्ज है।

शहर के हिसाब से सूर्योदय और तिथि के मिनट बदल सकते हैं। इसलिए अंतिम समय स्थानीय पंचांग से मिला लेना ठीक रहता है। ब्रज क्षेत्र में उत्साह ज्यादा रहता है क्योंकि राधा रानी की लीला भूमि इन्हीं नगरों से जुड़ी मानी जाती है।

पूजा का शुभ समय क्या माना गया है?

राधा रानी की पूजा के लिए दोपहर का समय विशेष बताया गया है। अलग अलग शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। एक उदाहरण महिषादल का दिया गया है जहां मध्याह्न पूजा 10 बजकर 19 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक बताई गई है।

यह उदाहरण याद दिलाता है कि एक ही देश में घड़ी का फर्क पड़ जाता है। इसलिए अपने नगर का पंचांग देखना उचित है। दोपहर विशेष मानी गई है लेकिन सटीक खिड़की जगह पर निर्भर करती है।

घर में यदि सामूहिक पूजा है तो परिवार वाले स्थानीय मुहूर्त के अंदर समय बांट सकते हैं। मंदिरों में आयोजन ब्रज में बड़े पैमाने पर होते हैं। बरसाना वृंदावन मथुरा और नंदगांव की बात स्रोत में खास तौर पर कही गई है।

राधा अष्टमी 2026 के दिन शनिवार होने से कई घरों में सुबह की तैयारी और दोपहर की पूजा आसानी से बैठ सकती है। समय का अंतिम फैसला पंचांग और अपने क्षेत्र की परंपरा से करें।

Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी पर पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल अच्छी तरह साफ करें। राधा रानी के साथ भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

राधा रानी का पंचामृत से अभिषेक कराएं। नए वस्त्र फूल और आभूषण अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर विधि विधान से पूजा करें। श्रद्धा के अनुसार राधा रानी के मंत्रों का जाप करें और आरती करें।

पूजा के अंत में फल मिठाई या घर में बने सात्विक भोजन का भोग लगाएं। परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें। ये चरण स्रोत में बताई गई सामान्य विधि हैं। कोई अतिरिक्त जटिल विधान इसमें नहीं जोड़ा गया है।

साफ स्थान और दोनों स्वरूप साथ रखना इस दिन की पहचान है। पंचामृत अभिषेक वस्त्र और आभूषण श्रृंगार का हिस्सा माने जाते हैं। भोग सात्विक रखने की बात कही गई है। घर के लोग मिलकर प्रसाद लें यह भी विधि का हिस्सा है।

राधा अष्टमी का धार्मिक महत्व क्या है?

राधा रानी को भक्ति प्रेम और समर्पण का स्वरूप माना जाता है। राधा अष्टमी उनके प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। धार्मिक परंपरा में इस दिन राधा कृष्ण की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है।

प्राकट्य की मान्यता भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से जुड़ी है। इसीलिए तिथि का ध्यान रखा जाता है। भक्त प्रेम और समर्पण वाले भाव से पूजा करते हैं। ब्रज के चार प्रमुख स्थलों पर उत्साह इसी महत्व से जुड़ा है।

घर में छोटी पूजा हो या मंदिर में बड़ा आयोजन मूल भाव एक है। राधा और कृष्ण को साथ स्थापित करने की विधि उसी जोड़ी को केंद्र में रखती है। पर्व केवल तारीख नहीं उस स्वरूप की स्मृति भी है जिसे भक्ति का आदर्श कहा गया है।

राधा अष्टमी 2026 शनिवार को पड़ रही है। सप्ताह के इस दिन कई परिवार एक साथ बैठ पाते हैं। महत्व वही रहता है जो हर वर्ष रहता है प्राकट्य की याद और संयुक्त आराधना।

Radha Ashtami 2026: पूजा में वास्तु की कौन सी बात रखें?

राधा अष्टमी की पूजा के लिए कोई एक अनिवार्य वास्तु दिशा शास्त्रीय रूप से निर्धारित बताना उचित नहीं माना गया। सामान्य वास्तु मान्यता में पूजा स्थल साफ शांत और व्यवस्थित रखना शुभ बताया जाता है।

कुछ वास्तु मार्गदर्शिकाओं में पूजा करते समय पूर्व या उत्तर पूर्व की ओर मुख करने की परंपरा मिलती है। इसे इस पर्व का अनिवार्य नियम नहीं माना जाना चाहिए। यानी दिशा सुविधा और साफ सुथरे स्थान से ज्यादा बड़ी शर्त नहीं बनाई गई है।

घर के जिस कोने में नियमित पूजा होती है वहीं व्यवस्था पर्याप्त हो सकती है। शोर कम हो स्थान व्यवस्थित हो यही व्यावहारिक सलाह है। शहर के मुहूर्त की तरह वास्तु भी स्थानीय आदत पर छोड़ना ठीक है।

तिथि 18 सितंबर दोपहर से चलनी शुरू होगी और 19 सितंबर दोपहर बाद उतरेगी। पर्व का दिन 19 सितंबर ही है। पूजा दोपहर केंद्रित मानी गई है विधि सरल है और महत्व प्राकट्य से जुड़ा है। स्थानीय पंचांग देखकर समय तय करें। ब्रज के आयोजनों की खबरें अलग से आती रहती हैं। घर में राधा कृष्ण को साथ रखकर सात्विक भोग और परिवार के साथ प्रसाद राधा अष्टमी 2026 की सीधी तैयारी है।

यह भी पढ़ें

लेखक

Adarsh Pandey

आदर्श पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव में न्यूज़ राइटर हैं। वे देश की ताजा खबरें, आपका पैसा (कारोबार), मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े विषय कवर करते हैं। डिजिटल मीडिया में उन्हें एक साल से अधिक का अनुभव है।

टिप्पणियां (2)

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X