कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के प्रदूषण स्रोतों पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है, जिसमें परिवहन और बायोमास दहन को मुख्य कारक बताया गया है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 10 नवंबर से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की भविष्यवाणी की है। इसके प्रभाव से दिल्ली, एनसीआर और उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश होने की संभावना है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

दिल्ली में प्रदूषण के मुख्य स्रोतों का विश्लेषण
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण की समस्या को लेकर कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने देश की शीर्ष अदालत में एक महत्वपूर्ण डेटा प्रस्तुत किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की हवा को खराब करने में परिवहन क्षेत्र की भूमिका सबसे बड़ी है, जिसकी हिस्सेदारी 19 प्रतिशत से 24 प्रतिशत के बीच आंकी गई है। इसके साथ ही, बायोमास दहन भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है, जिसका योगदान 17 प्रतिशत से 23 प्रतिशत तक है। बायोमास दहन की श्रेणी में कचरा जलाना, लकड़ी का उपयोग और फसल अवशेषों को जलाना शामिल किया गया है। CAQM ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट किसी एक अध्ययन पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें साल 2015 से लेकर 2025 के बीच किए गए विभिन्न शोधों और अध्ययनों के आंकड़ों को सम्मिलित किया गया है। इन सभी अध्ययनों के निष्कर्षों को मिलाकर प्रदूषण के स्रोतों का एक व्यापक आकलन तैयार किया गया है।
पराली जलाने की घटनाओं में भारी गिरावट
प्रदूषण के कारणों पर चर्चा करते हुए CAQM ने पराली जलाने से जुड़े आंकड़ों में भी महत्वपूर्ण सुधार की जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर से 4 नवंबर के बीच की अवधि में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। साल 2021 के आंकड़ों की तुलना में पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 91.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, हरियाणा में स्थिति और भी बेहतर रही है, जहां इसी अवधि के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में 98.4 प्रतिशत की कमी आई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता केवल स्थानीय कारकों से प्रभावित नहीं होती है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषक भी इसमें बड़ा योगदान देते हैं। सर्दियों के मौसम में PM2.5 को दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को प्रभावित करने वाला सबसे प्रमुख प्रदूषक माना गया है। प्रदूषण के अन्य स्रोतों में औद्योगिक उत्सर्जन, थर्मल पावर प्लांट, सड़कों की धूल और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली मिट्टी शामिल है।
पश्चिमी विक्षोभ और मौसम में बदलाव का पूर्वानुमान
दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए मौसम विभाग की ओर से राहत भरी खबर आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 10 नवंबर से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करना शुरू करेगा। इसका शुरुआती असर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पहाड़ी इलाकों में देखने को मिलेगा। इसके बाद, 11 और 12 नवंबर को इसका प्रभाव मैदानी इलाकों तक पहुंचेगा, जिससे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बारिश होने से हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण जमीन पर बैठ जाएंगे, जिससे स्मॉग से राहत मिल सकती है। इसके अलावा, तेज हवाएं चलने से प्रदूषकों का जमाव कम होगा और वे दूसरे क्षेत्रों की ओर फैल जाएंगे। जम्मू-कश्मीर में 12 नवंबर को भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है, जबकि हिमाचल प्रदेश में 10 से 12 नवंबर के बीच गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।
देश के अन्य हिस्सों में बारिश की स्थिति
उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम की गतिविधियां तेज होने वाली हैं। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 7 से 10 नवंबर के दौरान भारी बारिश होने की आशंका है। केरल और माहे में भी 7 और 8 नवंबर को भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 7 नवंबर को बारिश हो सकती है, जबकि कर्नाटक के तटीय और आंतरिक हिस्सों में 7 से 10 नवंबर के बीच मौसम खराब रहने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 10 और 11 नवंबर को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी 9 से 11 नवंबर के दौरान बारिश होने के आसार हैं। पूर्वी भारत में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी अगले सप्ताह के दौरान छिटपुट बारिश देखी जा सकती है।
वायु गुणवत्ता पर मौसम का वैज्ञानिक प्रभाव
प्रदूषण को नियंत्रित करने में मौसम की स्थिति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब हवा की गति कम होती है और तापमान गिरता है, तो प्रदूषक कण हवा में ही फंस जाते हैं, जिससे एक मोटी धुंध की परत बन जाती है। पश्चिमी विक्षोभ के आने से हवा की गति में वृद्धि होती है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जो झोंकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक जा सकती है। यह तेज हवा दिल्ली जैसे शहरों में जमा प्रदूषण को हटाने में सहायक होती है। वर्तमान में दक्षिण-पूर्वी अरब सागर से केरल होते हुए कर्नाटक तक एक ट्रफ रेखा बनी हुई है, साथ ही बांग्लादेश और असम के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इन प्रणालियों के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश हो रही है, जो समग्र रूप से वायुमंडल को साफ करने में मदद कर रही है। दिल्ली के लिए अगले कुछ दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन 11 नवंबर के बाद मौसम में आने वाला बदलाव बड़ी राहत दे सकता है।





