ताज़ा खबर
दिल्ली विवाह पंजीकरण कैसे करें: राजस्व विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज, SDM कार्यालय और प्रमाण पत्र BREAKING: सरकारी योजनाओं के लिए आधार की जगह अब बायोमेट्रिक और वोटर आईडी हो सकती है अनिवार्य सुल्तानपुर में संजय सिंह ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- कांग्रेस खुद बनवाती है भाजपा की सरकार Beekeeping for Farmers: How to Start, Bee Species, Honey Mission Support and Crop Benefits इंटरपोल नोटिस क्या होते हैं: रेड, ब्लू, येलो से सिल्वर तक, जानिए हर रंग का मतलब और भारत कैसे लेता है मदद BREAKING: जेईई मेन 2027 के लिए एनआरआई उम्मीदवार अब पासपोर्ट को पहचान पत्र मान सकेंगे Amrapali Dubey TV Serial: टीवी धारावाहिक में अनाथ लड़की के किरदार और अलका याज्ञनिक के गाने से आम्रपाली दुबे को मिली खास पहचान कसार के लड्डू: छठ प्रसाद के लिए चावल के आटे और गुड़ से लड्डू बनाने का पारंपरिक तरीका
ट्रेंडिंग
राजनीति

BREAKING: सरकारी योजनाओं के लिए आधार की जगह अब बायोमेट्रिक और वोटर आईडी हो सकती है अनिवार्य

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने संकेत दिया है कि सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए अब आधार के बजाय बायोमेट्रिक और वोटर आईडी जरूरी हो सकते हैं।

BREAKING: सरकारी योजनाओं के लिए आधार की जगह अब बायोमेट्रिक और वोटर आईडी हो सकती है अनिवार्य
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / Govt. of India)

सारांश

  • केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अब तक आधार कार्ड को सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता रहा है, लेकिन भविष्य में इस व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने…
  • केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, जिन्हें ललन सिंह के नाम से भी जाना जाता है, ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा…
  • वर्तमान में केंद्र सरकार की अधिकांश प्रमुख योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और उनके बैंक खातों में सीधे पैसा भेजने के लिए आधार कार्ड का ही उपयोग किया जाता है।
  • केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अब तक आधार कार्ड को सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता रहा है, लेकिन भविष्य में इस व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने हाल ही में संकेत दिया है कि लाभार्थियों को सरकारी भुगतान करने के लिए अब आधार कार्ड के स्थान पर बायोमेट्रिक पहचान और वोटर आईडी कार्ड के ईपीआईसी नंबर का उपयोग किया जा सकता है। इस संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और विपक्षी नेताओं ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। फिलहाल सरकार की ओर से इस नई व्यवस्था को लागू करने की किसी निश्चित तिथि या विस्तृत प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

नया पहचान प्रस्ताव
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / Govt. of India)

सरकारी योजनाओं के भुगतान की व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव

केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, जिन्हें ललन सिंह के नाम से भी जाना जाता है, ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा किया है। उन्होंने संकेत दिया कि केंद्र सरकार अब लाभार्थियों की पहचान और उन्हें मिलने वाली वित्तीय सहायता के हस्तांतरण के लिए आधार कार्ड की निर्भरता को कम करने पर विचार कर रही है। मंत्री के अनुसार, आने वाले समय में लाभार्थियों के भुगतान का आधार केवल आधार कार्ड नहीं रहेगा। इसके बजाय, सरकार बायोमेट्रिक डेटा और मतदाता पहचान पत्र यानी वोटर आईडी के ईपीआईसी नंबर को प्राथमिकता दे सकती है। यह बयान 30 अक्टूबर को आयोजित एक नेशनल वर्कशॉप में दिया गया था, जो पंचायती राज मंत्रालय द्वारा पीपुल्स प्लान कैंपेन 2026:27 के संदर्भ में आयोजित की गई थी। इस कार्यशाला में ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जुड़ी भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जा रही थी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए अधिक सटीक और विश्वसनीय तरीकों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यह बदलाव किन विशिष्ट योजनाओं में सबसे पहले लागू होगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।

आधार कार्ड की जगह नई पहचान प्रणाली के पीछे का तर्क

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने आधार कार्ड की वर्तमान स्थिति और इसे बनाने की प्रक्रिया पर कुछ सवाल भी उठाए हैं। उन्होंने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में आधार कार्ड बनाने वाली संस्थाएं और केंद्र लगभग हर स्थान पर उपलब्ध हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आजकल किसी भी व्यक्ति का आधार कार्ड मात्र कुछ ही मिनटों के भीतर तैयार किया जा सकता है। मंत्री के इस तर्क से यह संकेत मिलता है कि सरकार को लगता है कि आधार कार्ड की सुलभता के कारण इसकी विशिष्टता या सत्यापन की प्रक्रिया में कुछ चुनौतियां हो सकती हैं। इसी कारण से, सरकार अब लाभार्थियों के भुगतान के लिए बायोमेट्रिक पहचान और उनके वोटर आईडी कार्ड के ईपीआईसी नंबर का उपयोग करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। बायोमेट्रिक पहचान में उंगलियों के निशान या आंखों की पुतलियों का स्कैन शामिल होता है, जिसे बदलना या फर्जी तरीके से बनाना कठिन होता है। वहीं, वोटर आईडी कार्ड का ईपीआईसी नंबर सीधे चुनाव आयोग के डेटाबेस से जुड़ा होता है। मंत्री के बयान से यह स्पष्ट होता है कि सरकार भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से इन दो वैकल्पिक तरीकों को अपनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

इन प्रमुख योजनाओं पर पड़ सकता है व्यापक असर

वर्तमान में केंद्र सरकार की अधिकांश प्रमुख योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और उनके बैंक खातों में सीधे पैसा भेजने के लिए आधार कार्ड का ही उपयोग किया जाता है। यदि मंत्री द्वारा संकेतित बदलाव लागू होते हैं, तो इसका असर कई बड़ी योजनाओं पर पड़ सकता है। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि शामिल है, जिसके तहत करोड़ों किसानों को सीधे नकद सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में भी आधार एक अनिवार्य दस्तावेज है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत दी जाने वाली विभिन्न पेंशन योजनाएं, जैसे वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन भी वर्तमान में आधार से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से ही संचालित होती हैं। मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालय की योजनाओं में भी आधार की अनिवार्यता है, जैसे नेशनल लाइवस्टॉक मिशन एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम में लाभार्थियों को आधार ऑथेंटिकेशन कराना पड़ता है। यदि आधार की जगह वोटर आईडी और बायोमेट्रिक पहचान को अनिवार्य बनाया जाता है, तो इन सभी योजनाओं के लाभार्थियों को नई सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह बदलाव सभी योजनाओं में एक साथ लागू होगा या इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।

राहुल गांधी ने लगाया वोट चोरी और साजिश का आरोप

केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंत्री का एक वीडियो साझा करते हुए इसे एक गहरी साजिश करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अब योजनाओं का लाभ देने के लिए आधार के बजाय वोटर आईडी को आधार बनाने की तैयारी कर रही है ताकि लोगों के अधिकारों पर नियंत्रण पाया जा सके। राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी गरीब व्यक्ति की पेंशन उसके वोटर कार्ड की गुलाम नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पेशल इंटेसिव रिवीजन यानी एसआईआर का जिक्र करते हुए दावा किया कि इसके नाम पर करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं। राहुल गांधी का आरोप है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, उनमें से अधिकांश वे लोग हैं जो वर्तमान सरकार के खिलाफ नाराजगी रखते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची तैयार करने में भाजपा के साथ मिलीभगत की जा रही है। राहुल गांधी ने चिंता जताई कि यदि किसी का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया, तो वह न केवल वोट देने के अधिकार से वंचित होगा, बल्कि उसे सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना भी बंद हो जाएगा।

लाभार्थियों के लिए वर्तमान स्थिति और भविष्य की प्रक्रिया

राजनीतिक विवाद और मंत्री के संकेतों के बीच, आम लाभार्थियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि वर्तमान में नियमों में कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है। मंत्री का बयान भविष्य की एक संभावित योजना का संकेत देता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आधार कार्ड की उपयोगिता अभी समाप्त हो गई है। वर्तमान में जो भी सरकारी योजनाएं चल रही हैं, उनमें लाभार्थियों को मौजूदा नियमों के अनुसार ही अपने दस्तावेज जमा करने चाहिए और ई:केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। सरकार ने अभी तक इस प्रस्तावित नई व्यवस्था के लिए कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है और न ही इसके कार्यान्वयन की कोई समयसीमा तय की गई है। लाभार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मंत्री के बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या भविष्य में वोटर आईडी कार्ड ही नागरिकता और सरकारी लाभ प्राप्त करने का एकमात्र मुख्य आधार बनेगा। आने वाले समय में यह देखना होगा कि सरकार इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है और विपक्ष के विरोध के बीच इस नई पहचान प्रणाली को किस प्रकार लागू किया जाता है। फिलहाल, आधार कार्ड ही अधिकांश योजनाओं के लिए प्राथमिक दस्तावेज बना हुआ है।

स्रोत: Aaj Tak, Aaj Tak

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X