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BREAKING: यूजीसी इक्विटी नियमों पर सरकार का यू टर्न, समीक्षा के लिए बनेगी नई कमेटी

केंद्र सरकार ने सवर्ण समाज के विरोध के बाद यूजीसी इक्विटी रूल्स 2026 की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने का निर्णय लिया है।

BREAKING: यूजीसी इक्विटी नियमों पर सरकार का यू टर्न, समीक्षा के लिए बनेगी नई कमेटी
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / NASA, ESA, and the Hubble Heritage Team (STScI/AURA))

सारांश

  • केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के इक्विटी रूल्स 2026 की समीक्षा करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
  • यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
  • यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए जो नए इक्विटी नियम बनाए थे, उनका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों, फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों को…
  • सरकार द्वारा यूजीसी नियमों पर लिए गए इस यू टर्न को आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के इक्विटी रूल्स 2026 की समीक्षा करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि वह इन नियमों पर दोबारा विचार करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन करने जा रही है। यह कदम सवर्ण समाज की ओर से लगातार किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों और छात्रों की चिंताओं को देखते हुए उठाया गया है।

यूजीसी और आरबीआई अपडेट
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / NASA, ESA, and the Hubble Heritage Team (STScI/AURA))

सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष और आश्वासन

यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को जानकारी दी कि सरकार यूजीसी इक्विटी रूल्स 2026 की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने पर विचार कर रही है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वासन दिया कि देश के सभी वर्गों के छात्रों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वर्ग का छात्र खुद को असुरक्षित, असंतुष्ट या डरा हुआ महसूस न करे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रत्येक छात्र के हितों की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नियम बनाते समय देश की युवा पीढ़ी के भविष्य और उनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर समाज को न्याय मिलना चाहिए और इसी उद्देश्य के साथ शीर्ष अदालत ने जनवरी में इन नियमों पर रोक लगा दी थी। अब सरकार की ओर से बनने वाली कमेटी इन नियमों के हर पहलू पर गहराई से विचार करेगी और सवर्ण समाज की आपत्तियों का समाधान खोजने का प्रयास करेगी।

इक्विटी नियमों पर विवाद और सवर्ण समाज की आपत्तियां

यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए जो नए इक्विटी नियम बनाए थे, उनका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों, फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों को जातिगत भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करना था। हालांकि, इन नियमों के सार्वजनिक होने के बाद सवर्ण समाज की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। लखनऊ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सवर्ण संगठनों से जुड़े लोगों और छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क यह है कि भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए ये नियम केवल विशिष्ट वर्गों को ही सुरक्षा प्रदान करते हैं। सवर्ण समाज का कहना है कि यदि सामान्य वर्ग के किसी छात्र के साथ भेदभाव या प्रताड़ना होती है, तो इन नियमों में उनके लिए सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। छात्रों की मांग है कि नियमों में ऐसा बदलाव किया जाए जिससे सभी वर्गों के छात्रों को समान रूप से न्याय मिल सके। सवर्ण संगठनों ने इन नियमों को पूरी तरह से वापस लेने या इनमें व्यापक संशोधन करने की मांग की है। उनका कहना है कि सुरक्षा के नियम समावेशी होने चाहिए न कि किसी एक वर्ग तक सीमित।

आगामी विधानसभा चुनाव और राजनीतिक समीकरण

सरकार द्वारा यूजीसी नियमों पर लिए गए इस यू टर्न को आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वर्ष 2027 में देश के सात महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सवर्ण समाज भारतीय जनता पार्टी का एक महत्वपूर्ण कोर वोटबैंक रहा है। ऐसे में चुनावों से पहले सरकार किसी भी बड़े वर्ग को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहती। उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में सवर्ण मतदाताओं की भूमिका काफी निर्णायक होती है। यही कारण है कि सरकार ने इन नियमों की समीक्षा के लिए कमेटी बनाने का फैसला किया है ताकि चुनावी मैदान में जाने से पहले इस विवाद को सुलझाया जा सके। सरकार की कोशिश है कि कमेटी के माध्यम से एक ऐसा संतुलित समाधान निकाला जाए जिससे सामाजिक न्याय का उद्देश्य भी पूरा हो और किसी भी वर्ग में असंतोष की भावना न रहे।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ट्रेजरी बिलों की नीलामी

एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत सरकार के ट्रेजरी बिलों की नीलामी की घोषणा की है। आरबीआई के अनुसार, कुल 23,000 करोड़ रुपये के ट्रेजरी बिलों की नीलामी की जाएगी। इस नीलामी प्रक्रिया में तीन अलग-अलग अवधियों के बिल शामिल हैं। इसमें 91 दिवसीय ट्रेजरी बिलों के लिए 8,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि निर्धारित की गई है। इसी तरह, 182 दिवसीय ट्रेजरी बिलों के लिए भी 8,000 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है। इसके अलावा, 364 दिवसीय ट्रेजरी बिलों के लिए 7,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि रखी गई है। इन बिलों की नीलामी 11 नवंबर 2026, बुधवार को आयोजित की जाएगी। नीलामी की निपटान प्रक्रिया अगले दिन यानी 12 नवंबर 2026, गुरुवार को पूरी होगी। यह बिक्री भारत सरकार द्वारा 26 मार्च 2025 को जारी सामान्य अधिसूचना के नियमों और शर्तों के अधीन होगी। इस नीलामी में राज्य सरकारें, केंद्र शासित प्रदेश, पात्र भविष्य निधि और अन्य निर्दिष्ट संस्थाएं भाग ले सकती हैं। आरबीआई की यह घोषणा वित्तीय बाजार में तरलता प्रबंधन और सरकारी उधारी कार्यक्रम का एक हिस्सा है।

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स्रोत: RBI, India TV

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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