हिंदू परंपरा में भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तीनों देवों का संयुक्त स्वरूप माना जाता है। उन्हें आदि गुरु के रूप में भी पूजा जाता है। हर साल मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को उनका जन्मोत्सव दत्तात्रेय जयंती या दत्त जयंती के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश में यह पर्व विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है। आइए जानते हैं 2026 में दत्तात्रेय जयंती कब है और इससे जुड़ी मान्यताएं क्या हैं।
दत्तात्रेय जयंती 2026 कब है
द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए दत्तात्रेय जयंती 2026 बुधवार, 23 दिसंबर को है। पूर्णिमा तिथि 23 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगी और 24 दिसंबर को सुबह 6 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी। इसी दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा भी है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

भगवान दत्तात्रेय कौन हैं
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान दत्तात्रेय महर्षि अत्रि और माता अनसूया के पुत्र हैं। दत्तात्रेय नाम का अर्थ बताया जाता है, अत्रि को दिया गया, यानी दत्त और आत्रेय। उन्हें आमतौर पर तीन मुख और छह भुजाओं वाले स्वरूप में दिखाया जाता है। उनके साथ एक गाय और चार श्वान भी दिखाए जाते हैं। कई परंपराओं में गाय को पृथ्वी और चार श्वानों को चार वेदों का प्रतीक माना जाता है।
जन्म की कथा
लोक कथाओं के अनुसार माता अनसूया अपने पतिव्रत धर्म के लिए प्रसिद्ध थीं। उनकी परीक्षा लेने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश उनके आश्रम पहुंचे। माता अनसूया ने अपने तपोबल से तीनों देवों को शिशु रूप में बदल दिया और माता की तरह उनका पालन किया। बाद में देवियों के अनुरोध पर तीनों देव अपने रूप में लौटे और प्रसन्न होकर वरदान दिया कि वे उनके पुत्र रूप में जन्म लेंगे। मान्यता है कि इसी वरदान से भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ। अलग-अलग पुराणों और परंपराओं में इस कथा के रूप कुछ भिन्न मिलते हैं।
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24 गुरुओं की शिक्षा
भगवान दत्तात्रेय से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध शिक्षा उनके 24 गुरुओं की है। श्रीमद्भागवत पुराण के एकादश स्कंध में अवधूत और राजा यदु के संवाद में इसका वर्णन मिलता है, जिसे दत्तात्रेय से जोड़ा जाता है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने प्रकृति और जीवों से सीख ली। इन गुरुओं में पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, अग्नि, चंद्रमा, सूर्य, कबूतर, अजगर, समुद्र, पतंगा, मधुमक्खी, हाथी, हिरण, मछली और बालक जैसे कई उदाहरण शामिल हैं। जैसे पृथ्वी से सहनशीलता, जल से निर्मलता और आकाश से निर्लिप्तता की सीख। संदेश यह है कि जीवन में हर चीज से कुछ न कुछ सीखा जा सकता है।
पूजा की परंपरा
मान्यताओं के अनुसार दत्तात्रेय जयंती पर ये परंपराएं निभाई जाती हैं:
- सुबह स्नान के बाद भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा या चित्र की पूजा।
- गुरुचरित्र या दत्त से जुड़े ग्रंथों का पाठ।
- दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा जैसे भजनों का गायन।
- कई भक्त इस दिन व्रत रखते हैं।
- गाय और जरूरतमंदों की सेवा को भी इस दिन पुण्यकारी माना जाता है।
प्रमुख दत्त तीर्थ
कर्नाटक का गाणगापुर दत्त भक्तों का प्रमुख तीर्थ माना जाता है, जहां गुरुवार और दत्त जयंती पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाराष्ट्र में नरसोबाची वाडी और औदुंबर, गुजरात में गिरनार पर्वत का दत्त शिखर और कई अन्य स्थान भी दत्त उपासना से जुड़े हैं। इन स्थानों पर दत्त जयंती पर विशेष उत्सव होते हैं।
दत्त संप्रदाय की परंपरा
दत्त उपासना की परंपरा में श्रीपाद श्रीवल्लभ और श्री नृसिंह सरस्वती जैसे संतों को भगवान दत्तात्रेय का अवतार माना जाता है। गुरुचरित्र ग्रंथ में इन्हीं की कथाएं हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में दत्त संप्रदाय के अनेक मठ और मंदिर हैं, जहां सालभर भक्त पहुंचते हैं।
गुरुवार और दत्त उपासना
दत्त परंपरा में गुरुवार का विशेष महत्व माना जाता है। कई भक्त हर गुरुवार को दत्त मंदिर जाते हैं और गुरुचरित्र का पाठ करते हैं। कुछ परंपराओं में दत्त जयंती से पहले सात दिन तक गुरुचरित्र का पाठ यानी सप्ताह भी किया जाता है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व
मार्गशीर्ष मास को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। इस महीने की पूर्णिमा पर स्नान, दान और पूजा की परंपरा है। 2026 में इस पखवाड़े में 14 दिसंबर को विवाह पंचमी, 20 दिसंबर को गीता जयंती और 23 दिसंबर को दत्तात्रेय जयंती पड़ रही है।
गुरु तत्व का संदेश
भगवान दत्तात्रेय को गुरु तत्व का प्रतीक माना जाता है। उनके 24 गुरुओं की कथा बताती है कि सीखने के लिए विनम्रता और खुला मन जरूरी है। आज के दौर में भी यह संदेश प्रासंगिक है कि आसपास की हर चीज और हर व्यक्ति से कुछ सीखा जा सकता है।
दत्तात्रेय जयंती 2026 कब है
बुधवार, 23 दिसंबर 2026 को।
भगवान दत्तात्रेय के माता-पिता कौन हैं
महर्षि अत्रि और माता अनसूया।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।
स्रोत: Drik Panchang: Dattatreya Jayanti 2026, Drik Panchang: Lord Dattatreya





