ताज़ा खबर
छत पर छठ कुंड कैसे बनाएं: शहरों में घर पर अर्घ्य के लिए पानी का कुंड, वजन, वाटरप्रूफिंग और सजावट Denza Z9 GT की भारत में 2026 में हो सकती है एंट्री, ₹1.25 करोड़ अनुमानित कीमत BREAKING: Fire Erupts in Four Coaches of Karmabhumi Express Near Rajpura Punjab BREAKING: पंजाब के राजपुरा में कर्मभूमि एक्सप्रेस के चार डिब्बों में लगी भीषण आग किसान दिवस: खेती और गांव की आवाज रहे चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन 23 दिसंबर को 2001 से मनाया जा रहा है राष्ट्रीय किसान दिवस शेयर बाजार क्लोजिंग 6 नवंबर 2026: सेंसेक्स 81,028.02 (↑ 2.17%), निफ्टी 25,030.35 (↑ 2.01%) दत्तात्रेय जयंती 2026: 23 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा, जानिए त्रिदेव स्वरूप भगवान दत्त और उनके 24 गुरुओं की कथा दिल्ली विवाह पंजीकरण कैसे करें: राजस्व विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज, SDM कार्यालय और प्रमाण पत्र
ट्रेंडिंग
धर्म

दत्तात्रेय जयंती 2026: 23 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा, जानिए त्रिदेव स्वरूप भगवान दत्त और उनके 24 गुरुओं की कथा

मार्गशीर्ष पूर्णिमा को भगवान दत्तात्रेय का जन्मोत्सव मनाया जाता है। उन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का संयुक्त स्वरूप माना जाता है।

तीन मुख वाले भगवान दत्तात्रेय की प्रतीकात्मक कलाकृति
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • हिंदू परंपरा में भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तीनों देवों का संयुक्त स्वरूप माना जाता है।
  • लोक कथाओं के अनुसार माता अनसूया अपने पतिव्रत धर्म के लिए प्रसिद्ध थीं।
  • कर्नाटक का गाणगापुर दत्त भक्तों का प्रमुख तीर्थ माना जाता है, जहां गुरुवार और दत्त जयंती पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
  • मार्गशीर्ष मास को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। इस महीने की पूर्णिमा पर स्नान, दान और पूजा की परंपरा है।

हिंदू परंपरा में भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तीनों देवों का संयुक्त स्वरूप माना जाता है। उन्हें आदि गुरु के रूप में भी पूजा जाता है। हर साल मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को उनका जन्मोत्सव दत्तात्रेय जयंती या दत्त जयंती के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश में यह पर्व विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है। आइए जानते हैं 2026 में दत्तात्रेय जयंती कब है और इससे जुड़ी मान्यताएं क्या हैं।

दत्तात्रेय जयंती 2026 कब है

द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए दत्तात्रेय जयंती 2026 बुधवार, 23 दिसंबर को है। पूर्णिमा तिथि 23 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगी और 24 दिसंबर को सुबह 6 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी। इसी दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा भी है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

मुख्य बातें: तीन मुख वाले भगवान दत्तात्रेय की प्रतीकात्मक कलाकृति
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

भगवान दत्तात्रेय कौन हैं

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान दत्तात्रेय महर्षि अत्रि और माता अनसूया के पुत्र हैं। दत्तात्रेय नाम का अर्थ बताया जाता है, अत्रि को दिया गया, यानी दत्त और आत्रेय। उन्हें आमतौर पर तीन मुख और छह भुजाओं वाले स्वरूप में दिखाया जाता है। उनके साथ एक गाय और चार श्वान भी दिखाए जाते हैं। कई परंपराओं में गाय को पृथ्वी और चार श्वानों को चार वेदों का प्रतीक माना जाता है।

जन्म की कथा

लोक कथाओं के अनुसार माता अनसूया अपने पतिव्रत धर्म के लिए प्रसिद्ध थीं। उनकी परीक्षा लेने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश उनके आश्रम पहुंचे। माता अनसूया ने अपने तपोबल से तीनों देवों को शिशु रूप में बदल दिया और माता की तरह उनका पालन किया। बाद में देवियों के अनुरोध पर तीनों देव अपने रूप में लौटे और प्रसन्न होकर वरदान दिया कि वे उनके पुत्र रूप में जन्म लेंगे। मान्यता है कि इसी वरदान से भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ। अलग-अलग पुराणों और परंपराओं में इस कथा के रूप कुछ भिन्न मिलते हैं।

यह भी पढ़ें: गुरु नानक जयंती 2026: 24 नवंबर को 557वां प्रकाश पर्व, जानें इतिहास, शिक्षाएं और गुरपुरब की परंपराएं | Sawan Somwar 2026: जानिए शिव पुराण में वर्णित भगवान शिव के 4 सबसे शक्तिशाली गणों और सेनापतियों की अनोखी गाथा

24 गुरुओं की शिक्षा

भगवान दत्तात्रेय से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध शिक्षा उनके 24 गुरुओं की है। श्रीमद्भागवत पुराण के एकादश स्कंध में अवधूत और राजा यदु के संवाद में इसका वर्णन मिलता है, जिसे दत्तात्रेय से जोड़ा जाता है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने प्रकृति और जीवों से सीख ली। इन गुरुओं में पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, अग्नि, चंद्रमा, सूर्य, कबूतर, अजगर, समुद्र, पतंगा, मधुमक्खी, हाथी, हिरण, मछली और बालक जैसे कई उदाहरण शामिल हैं। जैसे पृथ्वी से सहनशीलता, जल से निर्मलता और आकाश से निर्लिप्तता की सीख। संदेश यह है कि जीवन में हर चीज से कुछ न कुछ सीखा जा सकता है।

पूजा की परंपरा

मान्यताओं के अनुसार दत्तात्रेय जयंती पर ये परंपराएं निभाई जाती हैं:

  • सुबह स्नान के बाद भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा या चित्र की पूजा।
  • गुरुचरित्र या दत्त से जुड़े ग्रंथों का पाठ।
  • दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा जैसे भजनों का गायन।
  • कई भक्त इस दिन व्रत रखते हैं।
  • गाय और जरूरतमंदों की सेवा को भी इस दिन पुण्यकारी माना जाता है।

प्रमुख दत्त तीर्थ

कर्नाटक का गाणगापुर दत्त भक्तों का प्रमुख तीर्थ माना जाता है, जहां गुरुवार और दत्त जयंती पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाराष्ट्र में नरसोबाची वाडी और औदुंबर, गुजरात में गिरनार पर्वत का दत्त शिखर और कई अन्य स्थान भी दत्त उपासना से जुड़े हैं। इन स्थानों पर दत्त जयंती पर विशेष उत्सव होते हैं।

दत्त संप्रदाय की परंपरा

दत्त उपासना की परंपरा में श्रीपाद श्रीवल्लभ और श्री नृसिंह सरस्वती जैसे संतों को भगवान दत्तात्रेय का अवतार माना जाता है। गुरुचरित्र ग्रंथ में इन्हीं की कथाएं हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में दत्त संप्रदाय के अनेक मठ और मंदिर हैं, जहां सालभर भक्त पहुंचते हैं।

गुरुवार और दत्त उपासना

दत्त परंपरा में गुरुवार का विशेष महत्व माना जाता है। कई भक्त हर गुरुवार को दत्त मंदिर जाते हैं और गुरुचरित्र का पाठ करते हैं। कुछ परंपराओं में दत्त जयंती से पहले सात दिन तक गुरुचरित्र का पाठ यानी सप्ताह भी किया जाता है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व

मार्गशीर्ष मास को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। इस महीने की पूर्णिमा पर स्नान, दान और पूजा की परंपरा है। 2026 में इस पखवाड़े में 14 दिसंबर को विवाह पंचमी, 20 दिसंबर को गीता जयंती और 23 दिसंबर को दत्तात्रेय जयंती पड़ रही है।

गुरु तत्व का संदेश

भगवान दत्तात्रेय को गुरु तत्व का प्रतीक माना जाता है। उनके 24 गुरुओं की कथा बताती है कि सीखने के लिए विनम्रता और खुला मन जरूरी है। आज के दौर में भी यह संदेश प्रासंगिक है कि आसपास की हर चीज और हर व्यक्ति से कुछ सीखा जा सकता है।

दत्तात्रेय जयंती 2026 कब है

बुधवार, 23 दिसंबर 2026 को।

भगवान दत्तात्रेय के माता-पिता कौन हैं

महर्षि अत्रि और माता अनसूया।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।

स्रोत: Drik Panchang: Dattatreya Jayanti 2026, Drik Panchang: Lord Dattatreya

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X