छठ में नदी या तालाब के घाट पर अर्घ्य देने की परंपरा है, लेकिन बड़े शहरों में घाट दूर होते हैं, भीड़ भारी होती है और कई नदियां प्रदूषित हैं। इसलिए दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और दूसरे शहरों में बहुत से परिवार अब घर की छत, आंगन या सोसायटी में अस्थायी कुंड बनाकर अर्घ्य देते हैं। इस बार संध्या अर्घ्य 15 नवंबर और उषा अर्घ्य 16 नवंबर को है। जानिए छत पर छठ कुंड कैसे बनाएं।
पहले छत की क्षमता समझें
पानी बहुत भारी होता है। एक घन मीटर पानी का वजन लगभग एक टन होता है। इसलिए:
- पुरानी या कमजोर छत पर बड़ा कुंड न बनाएं
- कुंड को बीम या दीवार के पास रखें, छत के बीच में नहीं
- गहराई कम रखें, व्रती के घुटनों या पिंडलियों तक का पानी काफी है
- संदेह हो तो किसी इंजीनियर या मिस्त्री से सलाह लें

कुंड बनाने के तरीके
- **ईंटों का घेरा और तिरपाल:** ईंटों से चौकोर घेरा बनाकर अंदर मोटी प्लास्टिक तिरपाल बिछाएं
- **बड़ा टब या प्लास्टिक पूल:** बाजार में मिलने वाले बड़े टब या फुलाने वाले पूल
- **पक्का अस्थायी कुंड:** कुछ परिवार सीमेंट से छोटा कुंड बनाते हैं, जो हर साल काम आता है
वाटरप्रूफिंग
- तिरपाल दोहरी परत में बिछाएं
- नीचे पुराना गद्दा या बोरी डालें, ताकि ईंट के कोनों से तिरपाल न फटे
- छत की नाली खुली और साफ रखें, ताकि रिसाव हो तो पानी निकल जाए
- पानी भरने से पहले थोड़ा पानी डालकर रिसाव जांच लें
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पानी भरना
संध्या अर्घ्य से कुछ घंटे पहले ही पानी भरें। बहुत पहले भरने पर पानी गंदा होता है और मच्छर पनप सकते हैं। नवंबर में पानी ठंडा होता है, बुजुर्ग व्रती के लिए यह ध्यान रखें।
सजावट
- कुंड के चारों ओर दीये, रंगोली और फूल
- गन्ने के डंठल और केले के पत्ते
- सूप रखने के लिए साफ चौकी
- पूर्व और पश्चिम दिशा पहले से तय कर लें, ताकि सूर्य की ओर मुंह करके अर्घ्य दिया जा सके
सुरक्षा
- छत की मुंडेर नीची हो तो बच्चों पर नजर रखें
- गीली फर्श पर फिसलन से बचने के लिए चटाई बिछाएं
- बिजली की झालर और तार पानी से दूर रखें
- रात में छत पर अच्छी रोशनी रखें
बाद में पानी का क्या करें
अर्घ्य के बाद पानी को नाली में बहाने की बजाय पौधों, बगीचे या सफाई में इस्तेमाल करें। केंद्रीय भूजल बोर्ड पानी बचाने और दोबारा इस्तेमाल की सलाह देता है। कुंड का सामान सुखाकर अगले साल के लिए रख लें।
सोसायटी में मिलकर
कई सोसायटी पार्क या खुली जगह पर साझा कुंड बनाती हैं। इसके लिए सोसायटी प्रबंधन से पहले अनुमति लें और सफाई की जिम्मेदारी तय करें।
क्या घर पर अर्घ्य देना मान्य है?
धार्मिक जानकारों के अनुसार जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देना मुख्य है। घर के कुंड में भी यह परंपरा निभाई जा सकती है।
स्रोत: केंद्रीय भूजल बोर्ड, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





