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अरहर MSP 2026-27: तुअर का समर्थन मूल्य 8450 रुपये प्रति क्विंटल, कटाई और बिक्री से पहले किसान जानें जरूरी बातें

केंद्र सरकार ने खरीफ 2026-27 के लिए अरहर यानी तुअर का MSP 8450 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। जानिए किसानों के लिए इसका मतलब।

अरहर की फलियों और दाल के दानों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • अरहर यानी तुअर भारत की सबसे लोकप्रिय दालों में से एक है। लगभग हर घर में रोज बनने वाली दाल का बड़ा हिस्सा अरहर से आता है।
  • भारत दुनिया में दालों का बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है। दालें शाकाहारी भोजन में प्रोटीन का अहम स्रोत हैं।
  • अरहर के दानों में दाल का घुन जैसे कीट लग सकते हैं। भंडारण से पहले दानों को धूप में अच्छी तरह सुखाएं।
  • अरहर की फसल में मेहनत और समय दोनों ज्यादा लगते हैं, इसलिए सही दाम पाना और भी जरूरी है।

अरहर यानी तुअर भारत की सबसे लोकप्रिय दालों में से एक है। लगभग हर घर में रोज बनने वाली दाल का बड़ा हिस्सा अरहर से आता है। यह खरीफ में बोई जाने वाली लंबी अवधि की फसल है, जिसकी कटाई ज्यादातर इलाकों में सर्दियों में शुरू होती है। ऐसे में किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि इस सीजन में सरकार ने अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य कितना तय किया है और फसल बेचने से पहले किन बातों का ध्यान रखें।

अरहर MSP 2026-27 कितना है

PIB और DD News की जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए अरहर यानी तुअर का MSP 8450 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। पिछले सीजन में यह 8000 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी इस बार अरहर के MSP में 450 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

मुख्य बातें: अरहर की फलियों और दाल के दानों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

अरहर क्यों है अहम

भारत दुनिया में दालों का बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है। दालें शाकाहारी भोजन में प्रोटीन का अहम स्रोत हैं। घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत को कुछ दालें आयात भी करनी पड़ती हैं। इसलिए सरकार दलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर देती है और MSP में बढ़ोतरी को भी इसी नजरिये से देखा जाता है। अरहर की जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती हैं, इसलिए इसे फसल चक्र के लिहाज से भी उपयोगी माना जाता है।

कहां होती है अरहर

अरहर मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और झारखंड जैसे राज्यों में उगाई जाती है। अलग-अलग इलाकों और किस्मों के हिसाब से इसकी कटाई का समय बदलता है। कम अवधि वाली किस्में जल्दी तैयार होती हैं, जबकि लंबी अवधि वाली किस्मों की कटाई सर्दियों के आखिर तक चलती है।

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MSP और मंडी भाव का फर्क

MSP सरकार की ओर से घोषित न्यूनतम कीमत है, जबकि मंडी भाव रोज की मांग और आवक से तय होता है। दाल मिलों की मांग, आयात की स्थिति, पिछले साल का स्टॉक और नई फसल की आवक जैसे कारण मंडी भाव पर असर डालते हैं। जब मंडी भाव MSP से नीचे जाता है, तब सरकारी खरीद केंद्र किसानों के लिए अहम विकल्प बनते हैं। दालों की सरकारी खरीद तय एजेंसियों के जरिये और तय नियमों के तहत होती है।

कटाई के समय सावधानी

  • जब ज्यादातर फलियां पककर भूरी हो जाएं, तब कटाई करें।
  • कटाई के बाद पौधों को अच्छी तरह सुखाकर ही गहाई करें।
  • दानों में नमी कम होनी चाहिए, नहीं तो भंडारण में कीड़े और फफूंद लगने का खतरा रहता है।
  • गहाई के बाद दानों को साफ करके टूटे, सिकुड़े और खराब दाने अलग करें।

बेचने से पहले तैयारी

  • आसपास की मंडियों के भाव e-NAM पोर्टल या राज्य कृषि विपणन बोर्ड की वेबसाइट पर देखें।
  • सरकारी खरीद के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया और तारीख अपने राज्य के कृषि विभाग से पता करें।
  • जमीन के कागजात, आधार और बैंक खाते का ब्योरा पहले से तैयार रखें।
  • बिक्री के बाद रसीद जरूर लें।

भंडारण के सुझाव

अरहर के दानों में दाल का घुन जैसे कीट लग सकते हैं। भंडारण से पहले दानों को धूप में अच्छी तरह सुखाएं। साफ, सूखे और हवादार गोदाम या कोठी में रखें। बोरियों को दीवार और जमीन से थोड़ा दूर रखें। भंडारण में किसी रसायन का इस्तेमाल करना हो तो कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह के बिना न करें।

दूसरी दालों का MSP

सरकार ने खरीफ 2026-27 के लिए मूंग और उड़द जैसी दूसरी दालों का MSP भी घोषित किया है। हर फसल का MSP PIB की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में देखा जा सकता है। किसान अपनी फसल के लिए वहीं से सही आंकड़ा देखें।

उत्पादन बढ़ाने के उपाय

अरहर की अच्छी पैदावार के लिए उन्नत और रोग प्रतिरोधी किस्मों के बीज, समय पर बुआई, बीज उपचार और खेत में जल निकासी की सही व्यवस्था जरूरी मानी जाती है। उकठा रोग और फली छेदक कीट अरहर की बड़ी समस्याएं हैं। इनसे बचाव के लिए अपने इलाके के कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह से ही दवा या दूसरे उपाय अपनाएं। अगली बुआई से पहले इन बातों की योजना बनाना फायदेमंद रहता है।

किसानों के लिए सुझाव

अरहर की फसल में मेहनत और समय दोनों ज्यादा लगते हैं, इसलिए सही दाम पाना और भी जरूरी है। बिक्री का फैसला मंडी भाव, सरकारी खरीद की स्थिति और अपनी पैसों की जरूरत को देखकर करें। अगर भंडारण की अच्छी सुविधा न हो, तो लंबे समय तक फसल रोकने से नुकसान भी हो सकता है।

अरहर MSP 2026-27 कितना है

8450 रुपये प्रति क्विंटल।

पिछले साल से कितनी बढ़ोतरी हुई

450 रुपये प्रति क्विंटल, क्योंकि पिछला MSP 8000 रुपये था।

सलाह लें: फसल बेचने या भंडारण का फैसला करने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग या मंडी समिति से ताजा जानकारी जरूर लें।

स्रोत: PIB: Cabinet approves MSP for Kharif Crops for Marketing Season 2026-27, DD News: Cabinet approves higher MSP for 14 Kharif crops

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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