नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने काठमांडू में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है। यह मुलाकात इस महीने के अंत में होने वाली प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से पहले हुई है, जो उनके कार्यकाल का पहला द्विपक्षीय विदेशी दौरा होगा। इससे पहले प्रधानमंत्री ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए भारतीय अधिकारियों से मिलने से परहेज किया था, लेकिन अब दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। बैठक के दौरान जल संसाधनों, ऊर्जा और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है।

काठमांडू में कूटनीतिक हलचल और आधिकारिक मुलाकात
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के रुख में भारत को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। करीब छह महीने पहले जिस प्रधानमंत्री ने भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मिलने से मना कर दिया था, अब उन्होंने काठमांडू में उनके साथ औपचारिक बैठक की है। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री 4 और 5 नवंबर को नेपाल के दो दिवसीय दौरे पर थे। इस यात्रा के दौरान उन्होंने नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। इसके अतिरिक्त उन्होंने नेपाल सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों से भी मुलाकात की, जिनमें वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले, विदेश मंत्री शिशिर खनाल, ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ और बुनियादी ढांचा विकास मंत्री सुनील लम्साल शामिल थे। अपने दौरे के अंतिम दिन विक्रम मिस्री ने प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात की और उन्हें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं।
प्रोटोकॉल और पुराने रुख में आया महत्वपूर्ण बदलाव
बालेन शाह और विक्रम मिस्री की यह मुलाकात इसलिए चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि मई 2026 में जब विक्रम मिस्री नेपाल जाने वाले थे, तब यह दौरा टालना पड़ा था। उस समय की रिपोर्टों के अनुसार, बालेन शाह ने एक नया कूटनीतिक प्रोटोकॉल अपनाया था जिसके तहत वह अपने समकक्ष स्तर से नीचे के किसी भी विदेशी अधिकारी के साथ व्यक्तिगत बैठक नहीं करना चाहते थे। इसी नियम के कारण उन्होंने पूर्व में अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री पॉल कपूर और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से भी मिलने से इनकार कर दिया था। हालांकि, अब इस महीने के अंत में होने वाली अपनी भारत यात्रा से पहले उन्होंने इस प्रोटोकॉल को किनारे रखकर भारतीय विदेश सचिव से मुलाकात की है। इस बैठक के दौरान एक और खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री बालेन शाह अपने चिर-परिचित चश्मे के बिना नजर आए, जो उनके सार्वजनिक स्वरूप में एक बदलाव के रूप में देखा गया।
सीमा विवाद और ऐतिहासिक संधियों का संदर्भ
भारत और नेपाल के बीच पिछले कुछ समय से सीमा विवाद को लेकर तनाव की स्थिति बनी रही है। मुख्य विवाद लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को लेकर है। नेपाल इन क्षेत्रों पर अपना दावा पेश करता है और इसके लिए 1816 की सुगौली संधि का हवाला देता है। नेपाल का मानना है कि इस संधि के तहत ये क्षेत्र उसके भौगोलिक दायरे में आते हैं। दूसरी ओर, भारत इन क्षेत्रों को उत्तराखंड राज्य का अभिन्न हिस्सा मानता है। तनाव तब और बढ़ गया था जब भारत और चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख दर्रे को फिर से खोलने पर सहमति जताई थी। नेपाल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी और विवाद सुलझाने के लिए चीन और ब्रिटेन जैसे तीसरे पक्षों की भूमिका की बात भी कही थी, जिसे भारत ने आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया था। हालांकि, वर्तमान मुलाकात दर्शाती है कि दोनों देश अब कूटनीतिक माध्यमों से आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।
बाढ़ राहत और भारत की मानवीय सहायता का प्रभाव
नेपाल के प्रधानमंत्री के बदलते रुख के पीछे एक बड़ा कारण भारत द्वारा हाल ही में दी गई मानवीय सहायता को माना जा रहा है। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कारण 1400 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और लगभग 6000 लोग लापता हो गए थे। इस संकट की घड़ी में भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए तुरंत सहायता भेजी थी। भारत की ओर से 26 अगस्त से 19 सितंबर के बीच 140 टन से अधिक राहत सामग्री नेपाल भेजी गई। इसमें बेली ब्रिज जैसे महत्वपूर्ण उपकरण शामिल थे ताकि आपदा प्रभावित दूर-दराज के इलाकों से संपर्क बहाल किया जा सके। इसके अलावा, भारत ने जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए अपने टनलिंग विशेषज्ञों और विशेष बचाव दलों को भी भेजा था। नेपाल ने इस तकनीकी सहायता और राहत कार्यों के लिए भारत के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है।
आर्थिक विकास और भविष्य की द्विपक्षीय योजनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल अब अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस कर रहा है। दक्षिण एशियाई मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक मंदी और अन्य बाधाओं के बीच नेपाल की भारत पर आर्थिक निर्भरता बढ़ी है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने हाल ही में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत की प्रशंसा की थी और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत, नेपाल और चीन के बीच एक साझा तंत्र बनाने का प्रस्ताव भी दिया था। आगामी 22 नवंबर को बालेन शाह की भारत यात्रा प्रस्तावित है। मार्च में कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सहयोग, जल संसाधन प्रबंधन और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जिससे भविष्य के संबंधों की नई रूपरेखा तैयार होगी।
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स्रोत: Aaj Tak





