दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप के तीसरे चरण को लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब राजधानी की हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी के बेहद करीब पहुंच गई और वायु गुणवत्ता सूचकांक 391 दर्ज किया गया। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों, खनन गतिविधियों और विशिष्ट श्रेणी के वाहनों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए प्राथमिक विद्यालयों की कक्षाओं को हाइब्रिड मोड में चलाने का निर्देश भी जारी किया गया है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक और वर्तमान स्थिति का विवरण
शुक्रवार की सुबह दिल्ली के आसमान में धुंध की एक मोटी परत छाई रही, जिससे दृश्यता कम हो गई और हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार सुबह 9:00 बजे दिल्ली के कुल 59 निगरानी केंद्रों में से 30 केंद्रों पर वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। शहर के बाकी निगरानी केंद्रों पर भी स्थिति चिंताजनक रही और वहां हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में पाई गई। समग्र रूप से दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 391 पर पहुंच गया, जो स्वास्थ्य के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील स्थिति मानी जाती है। इसी बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ग्रैप के तीसरे चरण के तहत आपातकालीन उपायों को लागू करना अनिवार्य हो गया था।
वाहनों के संचालन पर लगाए गए कड़े प्रतिबंध
ग्रैप के तीसरे चरण के लागू होने के साथ ही दिल्ली और एनसीआर के कई जिलों में वाहनों के आवागमन पर सख्त पाबंदियां लगा दी गई हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब दिल्ली के साथ-साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर जिलों में बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल मानक वाले हल्के मोटर वाहनों यानी चार पहिया गाड़ियों के चलने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि पुराने मानक वाले इंजन अधिक प्रदूषण फैलाते हैं और वर्तमान वायुमंडलीय परिस्थितियों में यह स्थिति और भी घातक हो सकती है। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन स्वामियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य सड़कों पर चलने वाले प्रदूषणकारी वाहनों की संख्या को कम करना है ताकि हवा में जहरीले कणों की मात्रा को नियंत्रित किया जा सके।
निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर रोक की जानकारी
वायु प्रदूषण का एक मुख्य कारण धूल के कण होते हैं, जिसे देखते हुए पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धूल पैदा करने वाली निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। हालांकि इस प्रतिबंध में कुछ अनिवार्य सेवाओं को छूट दी गई है, लेकिन सामान्य निर्माण कार्यों को तत्काल बंद करने का आदेश है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार ने पहले ही 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक के लिए निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा रखा था। इसके अतिरिक्त, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने भी 5 नवंबर से 20 नवंबर तक के लिए धूल पैदा करने वाले विध्वंस और बाहरी नागरिक निर्माण कार्यों पर रोक लगाई थी। अब ग्रैप-3 के तहत इन प्रतिबंधों को और अधिक व्यापक और कड़ा बना दिया गया है ताकि निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को रोका जा सके।
शिक्षा और कार्यालयों के लिए नए दिशा निर्देश
प्रदूषण के बढ़ते स्तर का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है, इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के जिलों में कक्षा 5 तक के छात्रों के लिए पढ़ाई अब हाइब्रिड मोड में संचालित की जाएगी। इसका अर्थ है कि स्कूलों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का उपयोग करना होगा ताकि छोटे बच्चों को जहरीली हवा में बाहर न निकलना पड़े। इसके साथ ही, सरकारी कार्यालयों के लिए भी विशेष निर्देश दिए जा सकते हैं, जिसमें कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जा सकती है। इससे न केवल सड़कों पर भीड़ कम होगी, बल्कि वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में भी कमी आने की संभावना है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि जरूरत पड़ने पर और भी कदम उठाए जा सकें।
ग्रैप और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की भूमिका
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान एक ऐसा ढांचा है जिसे दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसे चार अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है, जो हवा की गुणवत्ता के स्तर के आधार पर लागू किए जाते हैं। तीसरा चरण तब सक्रिय होता है जब स्थिति गंभीर होने की कगार पर होती है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है और वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर प्रतिबंधों को लागू करने या हटाने का निर्णय लेता है। प्रदूषण को कम करने के प्रयासों के तहत नई दिल्ली में एंटी स्मॉग वाहनों का उपयोग करके सड़कों पर पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है ताकि धूल के कण जमीन पर बैठ सकें। यह सभी उपाय अल्पकालिक आपातकालीन कदम हैं जिनका उद्देश्य नागरिकों को तत्काल राहत प्रदान करना है।
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