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संसद में प्रश्नकाल और शून्यकाल क्या है: तारांकित, अतारांकित और अल्प सूचना प्रश्नों में अंतर आसान भाषा में

संसद की कार्यवाही का पहला घंटा सवालों का होता है। जानिए प्रश्नकाल और शून्यकाल कैसे सरकार को जवाबदेह बनाते हैं।

संसद के भीतर सदस्यों की बैठक का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • संसदीय लोकतंत्र में सरकार संसद के प्रति जवाबदेह होती है। इस जवाबदेही को तय करने का सबसे सीधा तरीका है सवाल पूछना।
  • तारांकित प्रश्न वे होते हैं जिनका जवाब मंत्री सदन में मौखिक रूप से देते हैं।
  • सांसदों की ओर से बड़ी संख्या में प्रश्नों के नोटिस आते हैं। PRS के अनुसार सामान्य प्रश्नों के लिए 15 दिन पहले नोटिस देना होता है और सूची में प्रश्नों का चयन बैलेट यानी लॉटरी जैसी प्रक्रिया…
  • कई बार विशेष सत्र या किसी खास वजह से प्रश्नकाल नहीं रखा जाता, जिस पर विपक्ष अक्सर आपत्ति जताता है, क्योंकि यह सरकार से सीधे सवाल पूछने का सबसे अहम मौका होता है।

संसदीय लोकतंत्र में सरकार संसद के प्रति जवाबदेह होती है। इस जवाबदेही को तय करने का सबसे सीधा तरीका है सवाल पूछना। संसद में हर दिन की कार्यवाही आमतौर पर प्रश्नकाल से शुरू होती है, जिसमें सांसद मंत्रियों से उनके मंत्रालय के कामकाज पर सवाल पूछते हैं। इसके बाद आता है शून्यकाल, जिसमें सांसद तत्काल महत्व के मुद्दे उठाते हैं। आइए समझते हैं कि प्रश्नकाल और शून्यकाल क्या हैं और ये कैसे काम करते हैं।

प्रश्नकाल क्या है

PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार लोकसभा की दिन की कार्यवाही आमतौर पर प्रश्नकाल से शुरू होती है। इस एक घंटे में सांसद सरकार की नीतियों और कामकाज पर मंत्रियों से सवाल पूछते हैं। कोई सांसद किसी मंत्री से उसके मंत्रालय के दायरे में आने वाले कानूनों और नीतियों के क्रियान्वयन से जुड़ा सवाल पूछ सकता है। इससे सरकार को सदन में सार्वजनिक रूप से जवाब देना पड़ता है।

मुख्य बातें: संसद के भीतर सदस्यों की बैठक का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सवालों के प्रकार

तारांकित प्रश्न

तारांकित प्रश्न वे होते हैं जिनका जवाब मंत्री सदन में मौखिक रूप से देते हैं। सूची में इन पर तारांकन का निशान लगा होता है, इसीलिए इन्हें तारांकित कहा जाता है। डिजिटल संसद की जानकारी के अनुसार लोकसभा में हर दिन ऐसे 20 प्रश्न सूचीबद्ध होते हैं। मंत्री के जवाब के बाद सवाल पूछने वाला सांसद पूरक प्रश्न भी पूछ सकता है। PRS के अनुसार आमतौर पर एक घंटे में सूची के शुरुआती 5-6 प्रश्नों का ही जवाब हो पाता है।

अतारांकित प्रश्न

अतारांकित प्रश्नों का जवाब मंत्रालय लिखित रूप में देता है, जिसे प्रश्नकाल के अंत में सदन के पटल पर रखा हुआ माना जाता है। इन पर पूरक प्रश्न नहीं पूछे जा सकते। लोकसभा में हर दिन ऐसे 230 तक प्रश्न अलग सूची में रखे जाते हैं। आंकड़ों और तथ्यात्मक जानकारी के लिए ये प्रश्न ज्यादा उपयोगी माने जाते हैं।

अल्प सूचना प्रश्न

सामान्य प्रश्नों के लिए तय समय पहले नोटिस देना होता है। लेकिन अत्यावश्यक सार्वजनिक महत्व के मामलों में सांसद कम समय के नोटिस पर भी प्रश्न दे सकते हैं, जिन्हें अल्प सूचना प्रश्न कहते हैं। लोकसभा के नियम 54 के अनुसार ऐसे प्रश्न दस दिन से कम के नोटिस पर दिए जा सकते हैं और नोटिस के साथ कारण बताना जरूरी है। अगर अध्यक्ष इसे अत्यावश्यक मानें और मंत्री जवाब देने को तैयार हों, तो इसका जवाब मौखिक प्रश्नों के बाद दिया जाता है। PRS के अनुसार यह व्यवस्था बहुत कम इस्तेमाल होती है।

प्रश्न कैसे चुने जाते हैं

सांसदों की ओर से बड़ी संख्या में प्रश्नों के नोटिस आते हैं। PRS के अनुसार सामान्य प्रश्नों के लिए 15 दिन पहले नोटिस देना होता है और सूची में प्रश्नों का चयन बैलेट यानी लॉटरी जैसी प्रक्रिया से होता है। प्रश्न स्वीकार होगा या नहीं, इसका फैसला अध्यक्ष करते हैं। प्रश्न में तथ्य स्पष्ट होने चाहिए और वह नियमों के अनुरूप होना चाहिए।

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शून्यकाल क्या है

प्रश्नकाल के खत्म होने और सदन के नियमित कामकाज शुरू होने के बीच के समय को आमतौर पर शून्यकाल कहा जाता है। इसमें सांसद तत्काल महत्व के मुद्दे उठाते हैं। प्रश्नकाल की तरह शून्यकाल का जिक्र सदन के प्रक्रिया नियमों में नहीं है, यह एक अनौपचारिक व्यवस्था है जो समय के साथ परंपरा बन गई। इसे भारतीय संसदीय व्यवस्था की देन माना जाता है। शून्यकाल में सांसद अपने इलाके की समस्याएं, किसी ताजा घटना या जनता से जुड़े मुद्दे सदन के सामने रखते हैं।

प्रश्नकाल का महत्व

  • सरकार को अपने फैसलों और कामकाज का सार्वजनिक हिसाब देना पड़ता है।
  • सांसद अपने क्षेत्र के मुद्दों पर सरकार का ध्यान खींच पाते हैं।
  • मंत्रालयों से मिले जवाब से ऐसी जानकारी सामने आती है जो आम तौर पर उपलब्ध नहीं होती।
  • पूरक प्रश्नों से मंत्री को तत्काल जवाब देना पड़ता है, जिससे सरकार की तैयारी की भी परीक्षा होती है।

जवाब कहां देखें

संसद में पूछे गए प्रश्न और उनके जवाब संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होते हैं। आम नागरिक, पत्रकार और शोधकर्ता इन जवाबों से सरकारी योजनाओं और आंकड़ों की जानकारी ले सकते हैं। कई खबरें भी संसद में दिए गए जवाबों पर आधारित होती हैं।

प्रश्नकाल न होने पर

कई बार विशेष सत्र या किसी खास वजह से प्रश्नकाल नहीं रखा जाता, जिस पर विपक्ष अक्सर आपत्ति जताता है, क्योंकि यह सरकार से सीधे सवाल पूछने का सबसे अहम मौका होता है। ऐसी स्थिति में सांसद लिखित प्रश्नों के जरिये जानकारी मांग सकते हैं।

राज्यसभा में व्यवस्था

राज्यसभा में भी प्रश्नकाल और शून्यकाल की व्यवस्था है, लेकिन वहां समय और प्रक्रिया से जुड़े कुछ नियम अलग हैं। राज्यसभा के अपने प्रक्रिया नियम हैं और कार्यवाही का क्रम सभापति के निर्देशों के अनुसार तय होता है।

प्रश्नकाल में कितने तारांकित प्रश्न सूचीबद्ध होते हैं

लोकसभा में हर दिन 20 तारांकित प्रश्न।

क्या शून्यकाल नियमों में लिखा है

नहीं। शून्यकाल एक अनौपचारिक व्यवस्था है जो परंपरा से चली आ रही है।

स्रोत: Digital Sansad: Lok Sabha Business, PRS: A Guide to Parliamentary Interventions, Lok Sabha, Lok Sabha Rules: Rule 54, Short notice questions

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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