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GRAP के चरण: दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने पर स्टेज 1 से 4 तक कौन-सी पाबंदियां लगती हैं, आसान भाषा में समझें

सर्दियों में दिल्ली-NCR की हवा खराब होते ही GRAP की चर्चा शुरू हो जाती है। जानिए यह योजना क्या है, इसके चार चरण कब लागू होते हैं और आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ता है।

दिल्ली-NCR में प्रदूषण और GRAP का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • अक्टूबर के आखिर से जनवरी तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता अक्सर खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच जाती है।
  • GRAP की खास बात यह है कि इसमें कार्रवाई पहले से तय होती है। जैसे ही AQI किसी सीमा को पार करता है या पूर्वानुमान में ऐसा होने की आशंका होती है, उस चरण की पाबंदियां अपने आप लागू करने का आदेश…
  • दूसरे चरण में पाबंदियां थोड़ी कड़ी होती हैं। सड़कों पर पानी का छिड़काव बढ़ाया जाता है, पार्किंग शुल्क बढ़ाकर निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने की कोशिश होती है और सार्वजनिक परिवहन की सेवाएं…
  • चरणों में शामिल कदम समय-समय पर संशोधित होते रहते हैं। किसी भी दिन क्या लागू है, इसकी सही जानकारी CAQM के आदेश से ही लें।

अक्टूबर के आखिर से जनवरी तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता अक्सर खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच जाती है। ऐसे में अखबारों और टीवी पर एक शब्द बार-बार सुनाई देता है, GRAP। कभी खबर आती है कि GRAP का दूसरा चरण लागू हुआ, कभी कि तीसरे चरण में निर्माण पर रोक लगी। बहुत से लोगों को यह साफ नहीं होता कि GRAP है क्या और इसके किस चरण में क्या बदलता है। इस लेख में आसान भाषा में समझिए।

GRAP क्या है

GRAP का पूरा नाम ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान है, यानी हवा की गुणवत्ता के हिसाब से चरणबद्ध कार्रवाई की योजना। इसे दिल्ली-NCR के लिए बनाया गया है। अभी इसे लागू करने की जिम्मेदारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM की है। आयोग की एक उप-समिति वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI और मौसम के पूर्वानुमान को देखकर तय करती है कि कौन-सा चरण लागू करना है। जरूरत पड़ने पर हवा सुधरने पर चरण हटाए भी जाते हैं।

GRAP की खास बात यह है कि इसमें कार्रवाई पहले से तय होती है। जैसे ही AQI किसी सीमा को पार करता है या पूर्वानुमान में ऐसा होने की आशंका होती है, उस चरण की पाबंदियां अपने आप लागू करने का आदेश जारी हो जाता है। ऊंचे चरण के लागू होने पर उससे निचले चरणों की पाबंदियां भी जारी रहती हैं।

मुख्य बातें: दिल्ली-NCR में प्रदूषण और GRAP का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

AQI के हिसाब से चार चरण

  • स्टेज 1: AQI 201 से 300, यानी खराब श्रेणी
  • स्टेज 2: AQI 301 से 400, यानी बहुत खराब श्रेणी
  • स्टेज 3: AQI 401 से 450, यानी गंभीर श्रेणी
  • स्टेज 4: AQI 450 से ऊपर, यानी गंभीर प्लस श्रेणी

AQI की गणना PM2.5, PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के आधार पर होती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हर दिन शहरों का AQI बुलेटिन जारी करता है।

स्टेज 1 में क्या होता है

पहले चरण में मुख्य जोर धूल और खुले में जलने वाले कचरे पर रोक पर होता है। CAQM की अनुसूची के मुताबिक इस चरण में आम तौर पर ये कदम उठाए जाते हैं:

  • निर्माण और तोड़फोड़ स्थलों पर धूल रोकने के नियमों का सख्त पालन
  • खुले में कचरा, पत्ते और बायोमास जलाने पर रोक
  • सड़कों पर मशीन से सफाई और पानी का छिड़काव
  • ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों और PUC नियमों पर निगरानी
  • होटलों और ढाबों में कोयले और लकड़ी के तंदूर पर रोक के निर्देश

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स्टेज 2 में क्या बढ़ता है

दूसरे चरण में पाबंदियां थोड़ी कड़ी होती हैं। सड़कों पर पानी का छिड़काव बढ़ाया जाता है, पार्किंग शुल्क बढ़ाकर निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने की कोशिश होती है और सार्वजनिक परिवहन की सेवाएं बढ़ाई जाती हैं। डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर नियंत्रण लगाया जाता है, सिवाय जरूरी सेवाओं के। लोगों से अपील की जाती है कि वे निजी वाहन कम चलाएं।

स्टेज 3 में क्या रुकता है

गंभीर श्रेणी में पहुंचने पर निर्माण और तोड़फोड़ के ज्यादातर गैर-जरूरी काम पर रोक लग जाती है, हालांकि रेलवे, मेट्रो, अस्पताल जैसी जरूरी परियोजनाओं को कुछ शर्तों के साथ छूट मिलती है। पत्थर तोड़ने की मशीनें और खनन गतिविधियां बंद की जाती हैं। दिल्ली और NCR के कुछ जिलों में BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल हल्के मोटर वाहनों पर रोक जैसे कदम उठाए जाते रहे हैं। छोटे बच्चों की कक्षाओं को हाइब्रिड या ऑनलाइन करने का फैसला राज्य सरकारें ले सकती हैं।

स्टेज 4 सबसे सख्त

चौथे चरण में ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगती है, सिवाय जरूरी सामान ले जाने वाले और साफ ईंधन वाले वाहनों के। सार्वजनिक परियोजनाओं समेत निर्माण पर भी रोक का दायरा बढ़ जाता है। राज्य सरकारें स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं, सरकारी और निजी दफ्तरों में आधे कर्मचारियों के साथ काम और घर से काम जैसे फैसले ले सकती हैं। ऑड-ईवन जैसे आपात कदमों पर भी विचार किया जा सकता है।

चरणों में शामिल कदम समय-समय पर संशोधित होते रहते हैं। किसी भी दिन क्या लागू है, इसकी सही जानकारी CAQM के आदेश से ही लें।

आम लोगों पर असर

  • निर्माण से जुड़े मजदूरों का काम रुकता है, कई राज्य सरकारें ऐसे समय में पंजीकृत मजदूरों को गुजारा भत्ता देने का एलान करती रही हैं
  • पुरानी गाड़ियों के मालिकों को पाबंदी वाले चरण में चालान का खतरा रहता है
  • स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए पढ़ाई का तरीका बदल सकता है
  • सांस और दिल के मरीजों को घर के अंदर रहने और डॉक्टर की सलाह मानने की जरूरत बढ़ जाती है

आप क्या कर सकते हैं

  1. रोज सुबह अपने इलाके का AQI देखें, CPCB का समीर ऐप इसमें मदद करता है
  2. गाड़ी का PUC प्रमाणपत्र अपडेट रखें
  3. कूड़ा या पत्ते न जलाएं, ऐसा होते दिखे तो शिकायत करें
  4. कम दूरी के लिए पैदल, साइकिल या सार्वजनिक परिवहन चुनें
  5. निर्माण करा रहे हैं, तो साइट को ढककर रखें और पानी का छिड़काव करें
  6. दिल्ली में ग्रीन दिल्ली ऐप पर प्रदूषण से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं

GRAP कौन लागू करता है

दिल्ली-NCR में GRAP को लागू करने का आदेश वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) देता है। इसके पालन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों, नगर निकायों, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की होती है।

क्या GRAP पूरे देश में लागू होता है

नहीं, GRAP दिल्ली और NCR के लिए बनाई गई योजना है। दूसरे शहरों के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम जैसी अलग योजनाएं हैं।

स्रोत: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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