सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि यदि देश में शत प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां सड़कों पर उतरती हैं, तो उनके लिए आवश्यक ईंधन की निरंतर आपूर्ति किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने इस विषय पर अपनी चिंता व्यक्त की और सरकार से भविष्य की योजना के बारे में जानकारी मांगी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इथेनॉल नीति का निर्माण करते समय देश के किसानों के हितों को केंद्र में रखना अनिवार्य है और इसे केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यह सुनवाई इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025:26 के लिए वितरण से जुड़ी याचिकाओं के दौरान हुई।

ईधन की उपलब्धता पर न्यायिक चिंता
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने हाल ही में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लिया। इन रिपोर्टों में बताया गया था कि सरकार ने ऐसे वाहनों को अनुमति देने का निर्णय लिया है जो पूरी तरह से इथेनॉल पर आधारित होंगे। पीठ ने सवाल किया कि यदि देश में 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को अनुमति दी जा रही है, तो उनके लिए पर्याप्त ईंधन की व्यवस्था कैसे की जाएगी। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के लिए ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। इस पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने जवाब दिया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विनिर्माण और उत्पादन प्रणालियों में बड़े स्तर पर बदलाव करने होंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि भविष्य में यदि इन वाहनों का उपयोग बढ़ता है, तो देश को बड़े पैमाने पर तैयारी करने की आवश्यकता होगी।
फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए नए नियम
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है। 26 अक्टूबर 2026 को जारी इस अधिसूचना के माध्यम से सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। इन बदलावों के तहत फ्लेक्स:फ्यूल वाहनों के लिए E100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल से चलने वाले वाहनों का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मंत्रालय ने वाहनों के उत्सर्जन प्रमाणन से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है, जिसमें अब E85 के साथ E100 को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। E85 ईंधन में 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है, जबकि E100 लगभग पूरी तरह से इथेनॉल होता है। फ्लेक्स:फ्यूल गाड़ियों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वे पेट्रोल के साथ इथेनॉल के उच्च मिश्रण वाले ईंधन पर भी कुशलतापूर्वक चल सकें। हालांकि, सामान्य पेट्रोल गाड़ियों की तुलना में इनके इंजन और ईंधन प्रणाली में विशिष्ट तकनीकी परिवर्तन किए जाते हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इथेनॉल नीति को सामाजिक और आर्थिक लाभ के नजरिए से देखने की आवश्यकता बताई। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा कि देश की एक बहुत बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और किसानों को सशक्त बनाने का मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है। अदालत ने कहा कि इथेनॉल नीति को केवल ईंधन और पर्यावरण के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसमें किसानों के हितों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पीठ का मानना है कि आम लोगों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इस नीति के माध्यम से लाभ मिलना चाहिए। अटॉर्नी जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे अपनी दलीलों के दौरान किसानों से जुड़े इन महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल करेंगे। सुनवाई में उपस्थित वकीलों ने भी तर्क दिया कि इथेनॉल को बढ़ावा देने से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसानों को लाभ होगा और सरकार की वर्तमान नीति में उनके हितों का ध्यान रखा गया है।यह पूरा मामला इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2025:26 के लिए इथेनॉल वितरण से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं से संबंधित है। इससे पहले 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के एक निर्देश पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। उस निर्देश में इथेनॉल की आपूर्ति बढ़ाने की मांग पर विचार करने को कहा गया था। एक तेल विपणन कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चिंता जताई थी कि हाईकोर्ट के आदेश से पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल सम्मिश्रण की मौजूदा नीति प्रभावित हो सकती है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले महीने के लिए निर्धारित की है। सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह न केवल वाहनों के लिए नियमों में बदलाव करे, बल्कि उत्पादन क्षमता को भी उस स्तर तक ले जाए जहां 100 प्रतिशत इथेनॉल की मांग को पूरा किया जा सके। विनिर्माण क्षेत्र में आने वाले इन बदलावों और किसानों की भागीदारी पर अदालत की कड़ी नजर बनी हुई है।यह भी पढ़ें: OMSS 2026-27: खुले बाजार में FCI का गेहूं किस दाम पर, 2600 रुपये रिजर्व प्राइस और मंडी भाव पर असर
स्रोत: Aaj Tak





