हर साल सितंबर के आसपास भारतीय फिल्म जगत में एक खबर का इंतजार रहता है कि ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री कौन सी फिल्म होगी। यह फिल्म एकेडमी अवॉर्ड्स की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में भेजी जाती है। लेकिन यह चयन कैसे होता है, इसके नियम क्या हैं और एंट्री चुने जाने के बाद क्या होता है, इसे लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहते हैं। आइए समझते हैं पूरी प्रक्रिया।
इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी क्या है
यह ऑस्कर की वह श्रेणी है जिसमें अमेरिका के बाहर बनी और मुख्य रूप से अंग्रेजी से इतर भाषा वाली फीचर फिल्में मुकाबला करती हैं। पहले इसे बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कहा जाता था, बाद में इसका नाम बदलकर बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कर दिया गया। इस श्रेणी में पुरस्कार फिल्म के निर्देशक या निर्माता को नहीं, बल्कि देश के नाम पर दर्ज होता है।

हर देश से सिर्फ एक फिल्म
एकेडमी के नियमों के अनुसार हर देश में सिर्फ एक मान्य चयन समिति होती है और हर देश सिर्फ एक फिल्म आधिकारिक रूप से भेज सकता है। भारत में यह जिम्मेदारी फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की है, जो देश के फिल्म निर्माताओं और फिल्म उद्योग से जुड़े संगठनों का संघ है।
भारत में चयन कैसे होता है
India Today और Filmfare की रिपोर्टों के अनुसार चयन की प्रक्रिया मोटे तौर पर इस तरह चलती है:
- फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया योग्य फिल्मों के लिए आवेदन मंगाता है।
- निर्माता तय शुल्क और जरूरी दस्तावेजों के साथ अपनी फिल्म भेजते हैं।
- फेडरेशन की ओर से बनाई गई जूरी इन फिल्मों को देखती है।
- जूरी के सदस्य वोट करते हैं और सबसे ज्यादा वोट पाने वाली फिल्म भारत की आधिकारिक एंट्री बनती है।
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पात्रता के नियम
एकेडमी के नियमों और रिपोर्टों के अनुसार 99वें ऑस्कर के लिए वही फिल्में योग्य थीं, जो 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच भारत के सिनेमाघरों में रिलीज हुईं और लगातार कम से कम सात दिन तक व्यावसायिक रूप से चलीं। फिल्म का बड़ा हिस्सा अंग्रेजी से इतर भाषा में होना चाहिए। हर साल की तारीखें और शर्तें एकेडमी अपने नियमों में घोषित करती है।
एंट्री के बाद क्या होता है
आधिकारिक एंट्री बनना ऑस्कर नामांकन नहीं है। दुनिया भर से आई फिल्मों में से एकेडमी के सदस्य पहले एक शॉर्टलिस्ट तैयार करते हैं और फिर उसमें से अंतिम नामांकन चुने जाते हैं। इसके बाद ऑस्कर समारोह में विजेता घोषित होता है। इस दौरान फिल्मों के लिए अमेरिका में प्रचार अभियान यानी कैंपेन भी अहम माना जाता है, ताकि एकेडमी के सदस्य फिल्म देखें।
भारत का सफर
भारत की कुछ ही फिल्में इस श्रेणी में अंतिम नामांकन तक पहुंच सकी हैं। इनमें मदर इंडिया, सलाम बॉम्बे और लगान शामिल हैं। अब तक भारत की कोई फिल्म इस श्रेणी में पुरस्कार नहीं जीत सकी है। हालांकि दूसरी श्रेणियों में भारतीय कलाकारों और फिल्मों ने ऑस्कर जीते हैं, जैसे RRR के गीत नाटू नाटू को बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग और द एलिफेंट व्हिस्परर्स को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म का ऑस्कर मिला।
दूसरी श्रेणियों में भारतीयों की कामयाबी
ऑस्कर जीतने वाली पहली भारतीय भानु अथैया थीं, जिन्हें फिल्म गांधी के लिए बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन का पुरस्कार मिला। महान फिल्मकार सत्यजीत रे को 1992 में मानद ऑस्कर से सम्मानित किया गया। संगीतकार ए आर रहमान ने फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर के लिए दो ऑस्कर जीते, जबकि उसी फिल्म के लिए गुलजार और साउंड डिजाइनर रेसुल पूकुट्टी को भी ऑस्कर मिला। ये उपलब्धियां बताती हैं कि भारतीय प्रतिभा को ऑस्कर में पहचान मिली है, भले ही इंटरनेशनल फीचर श्रेणी में जीत का इंतजार अभी बाकी है।
99वें ऑस्कर के लिए भारत की एंट्री
डेमोक्रेटिक भारत लाइव की पिछली रिपोर्ट के अनुसार 99वें ऑस्कर के लिए मराठी फिल्म गोंधल को भारत की आधिकारिक एंट्री चुना गया। अब यह देखना होगा कि यह फिल्म शॉर्टलिस्ट और नामांकन तक पहुंच पाती है या नहीं।
चयन को लेकर बहस
हर साल भारत की एंट्री को लेकर बहस भी होती है। कई बार आलोचक कहते हैं कि कोई दूसरी फिल्म अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए बेहतर विकल्प होती। कुछ फिल्में आधिकारिक एंट्री न बनने पर भी दूसरी श्रेणियों में सीधे दावेदारी के लिए अमेरिका में रिलीज और प्रचार का रास्ता अपनाती हैं।
ऑस्कर के लिए भारत की एंट्री कौन चुनता है
फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से बनाई गई जूरी।
क्या एक देश कई फिल्में भेज सकता है
नहीं। इस श्रेणी में हर देश सिर्फ एक आधिकारिक फिल्म भेज सकता है।
स्रोत: Academy: 99th Oscars International Feature FAQs, India Today: Film Federation opens applications for India’s entry to 99th Academy Awards, Filmfare: How Indian films are shortlisted for the official entry





