टेनिस दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है, लेकिन इसकी स्कोरिंग पहली बार देखने वाले को उलझा सकती है। जहां ज्यादातर खेलों में स्कोर 1, 2, 3 के क्रम में बढ़ता है, वहीं टेनिस में 15, 30 और 40 जैसे अंक सुनाई देते हैं। फिर ड्यूस, एडवांटेज और टाई-ब्रेक जैसे शब्द आते हैं। अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ यानी ITF के नियमों के आधार पर इस लेख में टेनिस की स्कोरिंग को आसान भाषा में समझते हैं।
टेनिस मैच की बनावट
टेनिस मैच तीन स्तरों में बंटा होता है: अंक यानी पॉइंट, गेम और सेट। कई अंक मिलकर एक गेम बनाते हैं, कई गेम मिलकर एक सेट और सेट जीतकर मैच जीता जाता है। आमतौर पर मैच बेस्ट ऑफ थ्री सेट यानी तीन में से दो सेट जीतने वाला होता है। कुछ बड़े टूर्नामेंटों में पुरुष एकल मैच बेस्ट ऑफ फाइव सेट के होते हैं।

गेम में अंक कैसे गिने जाते हैं
ITF के नियमों के अनुसार एक गेम में स्कोर इस तरह बोला जाता है:
- कोई अंक नहीं: लव (0)
- पहला अंक: 15
- दूसरा अंक: 30
- तीसरा अंक: 40
- चौथा अंक: गेम
सर्विस करने वाले खिलाड़ी का स्कोर पहले बोला जाता है। जैसे 30-15 का मतलब है कि सर्वर के दो अंक हैं और रिसीवर का एक।
ड्यूस और एडवांटेज
गेम जीतने के लिए चार अंक और कम से कम दो अंकों की बढ़त जरूरी है। अगर दोनों खिलाड़ी तीन-तीन अंक जीत लें, यानी स्कोर 40-40 हो जाए, तो इसे ड्यूस कहते हैं। ड्यूस के बाद जो खिलाड़ी अगला अंक जीतता है, उसे एडवांटेज मिलता है। अगर वही खिलाड़ी अगला अंक भी जीत ले, तो गेम उसका। लेकिन अगर विरोधी अंक जीत ले, तो स्कोर फिर ड्यूस हो जाता है। यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक कोई खिलाड़ी लगातार दो अंक जीतकर गेम न जीत ले।
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सेट कैसे जीता जाता है
ITF के नियमों के अनुसार जो खिलाड़ी पहले छह गेम जीतता है और विरोधी से कम से कम दो गेम आगे रहता है, वह सेट जीतता है। जैसे 6-4 या 6-3 से सेट जीता जा सकता है। अगर स्कोर 5-5 हो जाए, तो सेट जीतने के लिए 7-5 करना होगा। अगर स्कोर 6-6 हो जाए, तो आमतौर पर टाई-ब्रेक खेला जाता है।
टाई-ब्रेक क्या है
टाई-ब्रेक में अंक सीधे शून्य, एक, दो, तीन के क्रम में गिने जाते हैं। ITF के नियमों के अनुसार जो खिलाड़ी पहले सात अंक जीतता है और विरोधी से कम से कम दो अंक आगे रहता है, वह टाई-ब्रेक और सेट जीतता है। अगर स्कोर 6-6 हो जाए, तो दो अंकों की बढ़त होने तक खेल चलता रहता है। टाई-ब्रेक जीतने पर सेट का स्कोर 7-6 लिखा जाता है।
टाई-ब्रेक में सर्विस
टाई-ब्रेक में पहला अंक एक खिलाड़ी सर्व करता है, फिर दूसरा खिलाड़ी अगले दो अंक सर्व करता है और इसके बाद हर खिलाड़ी बारी-बारी से दो-दो अंक सर्व करता है। हर छह अंक के बाद खिलाड़ी पाला बदलते हैं।
सर्विस के नियम
- सर्वर को बेसलाइन के पीछे से तिरछी दिशा में विरोधी के सर्विस बॉक्स में सर्व करना होता है।
- पहली सर्विस गलत होने पर दूसरी सर्विस का मौका मिलता है।
- दोनों सर्विस गलत होने पर विरोधी को अंक मिल जाता है, इसे डबल फॉल्ट कहते हैं।
- सर्विस नेट को छूकर सही बॉक्स में गिरे, तो इसे लेट कहते हैं और सर्विस दोबारा होती है।
- हर गेम के बाद सर्विस दूसरे खिलाड़ी के पास चली जाती है।
कुछ और जरूरी शब्द
- ब्रेक: जब रिसीवर विरोधी की सर्विस वाला गेम जीत ले।
- ब्रेक पॉइंट: वह अंक जिसे जीतकर रिसीवर गेम जीत सकता है।
- सेट पॉइंट और मैच पॉइंट: वह अंक जिसे जीतकर खिलाड़ी सेट या मैच जीत सकता है।
- ऐस: ऐसी सर्विस जिसे विरोधी छू भी न पाए।
अलग-अलग टूर्नामेंट, अलग नियम
ITF के नियम कुछ वैकल्पिक स्कोरिंग तरीकों की भी अनुमति देते हैं, जैसे नो-एडवांटेज स्कोरिंग, जिसमें ड्यूस पर अगला अंक जीतने वाला गेम जीत जाता है, या आखिरी सेट की जगह मैच टाई-ब्रेक। इसलिए अलग-अलग टूर्नामेंट और स्तर पर कुछ नियम अलग हो सकते हैं। बड़े टूर्नामेंट अपने आखिरी सेट के टाई-ब्रेक के नियम खुद घोषित करते हैं।
15, 30, 40 ही क्यों
टेनिस में 15, 30 और 40 के इस्तेमाल को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं, जैसे घड़ी के चौथाई हिस्सों से जुड़ी कहानी। लेकिन इसकी उत्पत्ति को लेकर कोई एक पक्का ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। जो भी हो, यह अनोखी स्कोरिंग आज टेनिस की पहचान बन चुकी है।
टेनिस में ड्यूस कब होता है
जब दोनों खिलाड़ियों का स्कोर 40-40 हो जाए।
टाई-ब्रेक कितने अंकों का होता है
सामान्य टाई-ब्रेक में पहले 7 अंक और कम से कम 2 अंकों की बढ़त जरूरी है।





