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IMF और विश्व बैंक में क्या अंतर है: 1944 के ब्रेटन वुड्स सम्मेलन से बनीं दो संस्थाएं, काम और भारत से रिश्ता

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक का नाम अक्सर साथ लिया जाता है, लेकिन दोनों का काम अलग है। जानिए दोनों संस्थाओं को आसान भाषा में।

दुनिया के नक्शे पर मुद्रा और विकास परियोजनाओं के प्रतीक
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की खबरों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF और विश्व बैंक का नाम अक्सर साथ आता है।
  • IMF का मुख्य काम अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक व्यवस्था को स्थिर रखना है।
  • दोनों संस्थाओं में दुनिया के लगभग सभी देश सदस्य हैं। विश्व बैंक के अनुसार विश्व बैंक का सदस्य बनने के लिए किसी देश को पहले IMF का सदस्य बनना होता है।
  • भारत दोनों संस्थाओं का संस्थापक सदस्य है और ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुआ था।

अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की खबरों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF और विश्व बैंक का नाम अक्सर साथ आता है। किसी देश पर आर्थिक संकट आए तो IMF से कर्ज की बात होती है, और किसी बड़ी विकास परियोजना के लिए विश्व बैंक की मदद की चर्चा होती है। दोनों का जन्म एक ही सम्मेलन से हुआ और दोनों का मुख्यालय भी एक ही शहर में है, लेकिन दोनों का काम अलग है। आइए समझते हैं कि IMF और विश्व बैंक में क्या अंतर है।

ब्रेटन वुड्स सम्मेलन

विश्व बैंक की जानकारी के अनुसार दोनों संस्थाएं 1944 में अमेरिका के ब्रेटन वुड्स में हुए सम्मेलन में बनाई गईं। दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने वाला था और देशों को चिंता थी कि युद्ध के बाद दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से 1930 के दशक जैसी मंदी और मुद्रा अस्थिरता में न फंस जाए। इसी सोच के साथ अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के लिए दो संस्थाएं बनीं। इसलिए इन्हें ब्रेटन वुड्स संस्थाएं भी कहा जाता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

IMF क्या करता है

IMF का मुख्य काम अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक व्यवस्था को स्थिर रखना है। इसके प्रमुख काम हैं:

  • सदस्य देशों की आर्थिक नीतियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था की निगरानी करना।
  • भुगतान संतुलन के संकट से जूझ रहे देशों को कर्ज देना, ताकि वे जरूरी आयात और विदेशी देनदारियां संभाल सकें।
  • देशों को आर्थिक नीतियों, कर व्यवस्था और केंद्रीय बैंकिंग जैसे मामलों में तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण देना।

IMF का कर्ज आमतौर पर कुछ शर्तों के साथ आता है, जिनमें आर्थिक सुधार और खर्च से जुड़े कदम शामिल हो सकते हैं।

विश्व बैंक क्या करता है

विश्व बैंक का मुख्य काम विकास और गरीबी कम करना है। यह विकासशील देशों को लंबी अवधि के कर्ज, अनुदान और विशेषज्ञ सलाह देता है। इसके पैसे से सड़क, बिजली, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और स्वच्छता जैसी परियोजनाएं चलती हैं। विश्व बैंक समूह में कई संस्थाएं हैं, जिनमें इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट यानी IBRD और इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन यानी IDA प्रमुख हैं।

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दोनों में मुख्य अंतर

  • मकसद: IMF वित्तीय और मौद्रिक स्थिरता पर ध्यान देता है, विश्व बैंक विकास पर।
  • कर्ज: IMF का कर्ज आमतौर पर भुगतान संतुलन संकट से निपटने के लिए अपेक्षाकृत कम अवधि का होता है, विश्व बैंक का कर्ज विकास परियोजनाओं के लिए लंबी अवधि का।
  • नजरिया: IMF पूरी अर्थव्यवस्था की सेहत देखता है, विश्व बैंक खास क्षेत्रों और परियोजनाओं पर काम करता है।

सदस्यता का नियम

दोनों संस्थाओं में दुनिया के लगभग सभी देश सदस्य हैं। विश्व बैंक के अनुसार विश्व बैंक का सदस्य बनने के लिए किसी देश को पहले IMF का सदस्य बनना होता है। दोनों संस्थाओं का मुख्यालय अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में है।

वोटिंग और कोटा

IMF में हर सदस्य देश का एक कोटा होता है, जो मोटे तौर पर उसकी अर्थव्यवस्था के आकार से जुड़ा होता है। यही कोटा तय करता है कि देश कितना योगदान देगा, कितना कर्ज ले सकता है और उसके पास कितने वोट होंगे। विकासशील देश लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के हिसाब से कोटा और वोटिंग अधिकारों में सुधार हो, ताकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज बढ़े।

भारत और ब्रेटन वुड्स संस्थाएं

भारत दोनों संस्थाओं का संस्थापक सदस्य है और ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुआ था। 1991 के आर्थिक संकट के दौरान भारत ने IMF से मदद ली थी, जिसके बाद आर्थिक सुधारों का दौर शुरू हुआ। विश्व बैंक ने भारत में कई विकास परियोजनाओं में सहयोग दिया है। भारत आज दोनों संस्थाओं में सुधार की मांग करने वाले प्रमुख देशों में है।

SDR क्या है

IMF की एक खास व्यवस्था स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी SDR है। यह कोई मुद्रा नहीं, बल्कि IMF की ओर से बनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित संपत्ति है, जिसकी कीमत कुछ प्रमुख मुद्राओं की टोकरी के आधार पर तय होती है। IMF समय-समय पर सदस्य देशों को उनके कोटा के अनुपात में SDR आवंटित करता है। देश जरूरत पड़ने पर इन्हें दूसरी मुद्राओं में बदल सकते हैं। IMF अपना हिसाब-किताब भी SDR में रखता है।

सालाना बैठकें

IMF और विश्व बैंक की सालाना बैठकें हर साल होती हैं, जिनमें सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर हिस्सा लेते हैं। इन बैठकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, कर्ज संकट, जलवायु वित्त और विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है। IMF की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट भी इसी समय चर्चा में रहती है, जिसमें भारत समेत दुनिया की विकास दर के अनुमान होते हैं।

IMF और विश्व बैंक कब बने

1944 के ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में।

क्या विश्व बैंक का सदस्य बनने के लिए IMF की सदस्यता जरूरी है

हां, पहले IMF का सदस्य बनना जरूरी है।

स्रोत: World Bank: The World Bank Group and the IMF, IMF: The IMF and the World Bank, How do they differ?, PIB: Journey of India’s Central Bank

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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